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मुजफ्फरपुर के गरीबनाथ मंदिर के फूल और बेलपत्र से बनेगा जैविक खाद

Praveen Thakur | News18 Bihar
Updated: November 6, 2019, 9:53 AM IST
मुजफ्फरपुर के गरीबनाथ मंदिर के फूल और बेलपत्र से बनेगा जैविक खाद
बिहार के मुजफ्फरपुर का गरीबनाथ मंदिर

उत्तर बिहार के प्रसिद्ध देव स्थानों में शामिल बाबा गरीबनाथ (Garibnath Temple) धाम मंदिर में साल में 365 क्विंटल से अधिक फूल, बेलपत्र और केले की तना चढ़ावे के बाद जमा होता है. सावन (Sawan) के माह में खासकर सोमवारी के दिन अधिक मात्रा में फूल और बेलपत्र बाबा गरीबनाथ को चढ़ता है.

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मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर (Garibnath Temple) में चढ़ाये गये फूल और बेलपत्र से जैविक खाद तैयार किया जायेगा. ये खाद पूसा स्थित राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय (Agriculture University) द्वारा बनाया जायेगा. फूल और बेलपत्र के साथ ही केले के तना और मंदिर में चढ़ाये गये दूसरे अपशिष्ट पदार्थों से विश्वविद्यालय जैविक खाद तैयार करेगा. विश्वविद्यालय परिसर में जैविक खाद बनाने की मशीन और पिट लगा हुआ है. पूसा स्थित राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन बाबा गरीबनाथ धाम से एक ट्रैक्टर मंदिर पर फूल (Flower) और बेलपत्र के अलावे दूसरे अपशिष्ट पदार्थों को ले गया है जिससे जैविक खाद तैयार करने का काम शुरू होगा. जैविक खाद की मार्केटिंग विश्वविद्यालय करेगा लेकिन जैविक खाद के पैकेट पर बाबा गरीबनाथ धाम के अपशिष्ट का जिक्र होगा.

मंदिर न्यास समिति और राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के बीच हुआ एमओयू

एक नवंबर को जैविक खाद तैयार करने के लिए गरीबनाथ धाम मंदिर न्यास समिति और केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ है. एमओयू पर मंदिर न्यास समिति के सचिव एनके सिन्हा और केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति पी सी श्रीवास्तव ने हस्ताक्षर किया है. एमओयू के तहत मंदिर पर चढ़ाये गये सभी फूल, बेलपत्र केले की तना सहित दूसरे अवशेषों को विश्वविद्यालय प्रशासन ले जायेगा.

रोज चढ़ता है एक क्विंटल फूल, बेलपत्र

उत्तर बिहार के प्रसिद्ध देव स्थानों में शामिल बाबा गरीबनाथ धाम मंदिर में साल में 365 क्विंटल से अधिक फूल, बेलपत्र और केले की तना चढ़ावे के बाद जमा होता है. सावन के माह में खासकर सोमवारी के दिन अधिक मात्रा में फूल और बेलपत्र बाबा गरीबनाथ को चढ़ता है. माना जाता है कि 5 क्विंटल के आस-पास ये चढ़ावा सावन के सभी सोमवारी में होता है लेकिन रोजाना के हिसाब से औसतन एक क्विंटल यह चढ़ावा होता है.

डम्पिंग थी अब तक मंदिर प्रशासन के लिए चुनौती

मंदिर पर चढ़ाये जाने वाले फूल और बेलपत्र मंदिर प्रशासन के लिए चुनौती बनता जा रहा था. 5 साल पहले तक शहर के बीचो-बीच बहने वाली बूढ़ी गंडक में फूल और बेलपत्र का विसर्जन होता था लेकिन नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए मंदिर न्यास समिति द्वारा चलाये जा रहे दादर ईलाके के डे केयर सेन्टर के पास फूल और बेलपत्र का डम्पिंग शुरू हुआ लेकिन कुछ दिनों से वहां भी समस्या आनी शुरू हो गई थी लेकिन पूसा कृषि विश्वविद्यालय के प्रयास से मंदिर प्रशासन की चुनौती अब अवसर में बदल गया है.
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जैविक खाद पर बाबा गरीबनाथ मंदिर के निर्माल का होगा जिक्र

बाजार में जब किसानों के हाथ यह जैविक खाद मिलेगी तो उसमें बाबा गरीबनाथ धाम का जिक्र होगा यानि जैविक खाद मंदिर पर चढ़ाये गये फूल और बेलपत्र से बना है इसका जिक्र होगा जाहिर है उत्तर बिहार के उन लोगों के हाथ ही जैविक खाद पहले आयेगी जिनमें से अधिकांश लोग सालों से बाबा गरीबनाथ धाम में पूजा-अर्चना के लिए आते रहे होंगे.

बूढ़ी गंडक के बाद जमीन के नीचे डम्प किया जा रहा था मंदिर का फूल और बेलपत्र

5 साल पहले तक मंदिर में चढ़ाया गया फूल और बेलपत्र बूढ़ी गंडक नदी में विसर्जित होता था. इसको देखते हुए शहर के लोग भी धार्मिक अनुष्ठान वाली घर की सामग्री नदी में ही फेंकने लगे थे लेकिन जब मंदिर न्यास समिति का नदी के प्रदूषित होने का एहसास हुआ थो बैठक कर इस पर रोक लगाई गई उसके बाद दादर में मिट्टी खोदकर डम्पिंग किया जा रहा था जिसेमें खर्च भी अधिक हो रहा था और जगह की भी समस्या आने लगी थी.

पहले से पूसा में तैयार हो रहा जैविक खाद

पूसा स्थित केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय में पहले से जैविक खाद तैयार होता रहा है. कर्मियों और वैज्ञानिकों के साथ ही विश्वविद्यालय परिवार से जुड़े घरों से कूड़े जुटाकर पिट में जैविक खाद मशीन के द्वारा तैयार की जा रही है लेकिन फूल और बेलपत्रों से जैविक खाद बनाने का काम पहली बार होगा.

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First published: November 6, 2019, 9:50 AM IST
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