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20 सालों से नहीं बेचा घर का एक भी अखबार, अब लॉकडाउन में तैयार कर ली कोरोना लाइब्रेरी

अखबार का कतरन काटते कोरोना लाइब्रेरी बनाने वाले  मुजफ्फरपुर के मुक्तेश्वर सिंह

अखबार का कतरन काटते कोरोना लाइब्रेरी बनाने वाले मुजफ्फरपुर के मुक्तेश्वर सिंह

बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले के मुसहरी प्रखंड के नवादा मानशाही निवासी मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह पूर्व में मुखिया (Mukhia) और जिला पार्षद रह चुके हैं और फिलहाल कोरोना लाइब्रेरी (Library) को बनाने में जुटे हैं.

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मुजफ्फरपुर. कोरोना वायरस (Corona Epidemic) के संक्रमण को लेकर देशभर में किया गया लॉकडाउन (Lockdown) कुछ लोगों को नजरबंदी जैसा लगता है. लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इस बंदी में कुछ ऐसा कर गुजरने पर आमादा जो वक़्त के पन्ने पर पर इतिहास बनकर हमेशा मौजूद रहेगा. ऐसे ही एक जुनूनी इंसान हैं बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह. जिले के मुसहरी प्रखंड के नवादा मानशाही निवासी मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह पूर्व में मुखिया और जिला पार्षद रह चुके हैं और फिलहाल कोरोना लाइब्रेरी को बनाने में जुटे हैं.

समाज सेवा के लिए नहीं की शादी

तीन भाइयों में मंझले मुक्तेश्वर के सिर पर समाज सेवा का ऐसा भूत चढ़ा कि उन्होंने शादी नहीं की. एकाकी जीवन में पुस्तक और अखबार मुक्तेश्वर की सहगामिनी हैं और इसीलिए उनके पास पिछले 20 वर्षों के अखबार का खजाना मौजूद है. मुक्तेश्वर सिंह के पास करीब एक हजार के लगभग बड़े और छोटे लेखकों की किताबें भी हैं. कोरोना बंदी के वक्त का उपयोग मुक्तेश्वर सिंह अपने पुस्तकालय को नई ऊंचाई की ओर ले जाने में कर रहे हैं. मुक्तेश्वर सिंह इन दिनों अखबारों से महत्वपूर्ण आलेख, महापुरुषों से संबंधित खबरें और कोरोन की सभी खबरों की लाइब्रेरी तैयार कर रहे हैं.

एक-एक अखबार पर रहती है नजर

एक-एक अखबार को पढ़कर उनसे सभी आवश्यक आलेख और खबरों को काटकर निकालना और फिर उन्हें अलग गार्ड फाइल में चिपका कर नए दस्तावेज की शक्ल देना. मुक्तेश्वर सिंह का कोरोना बंदी का वक्त इसी काम में गुजर रहा है. बंदी के इन दिनों में मुक्तेश्वर सिंह ने अखबारों से करीब 3000 कतरन निकाले हैं जिन्हें पुरानी डायरी के पन्नों पर चिपका कर सजाया जा रहा है. इसके अलावा जिस दिन से कोरोना से संबंधित खबरें अखबारों में आने लगी है उन तमाम खबरों की भी फाइल तैयार की जा रही है. मुक्तेश्वर का कहना है कि महापुरुषों की जयंती या पुण्यतिथि के वक्त उनसे संबंधित बहुत सारी सामग्रियां और लोगों के अनुभव अखबारों में छपते हैं. अक्सर यह जानकारियां किसी किताब या गूगल पर एक साथ नहीं होती जितनी अखबारों में होती हैं.

मुजफ्फरपुर की कोरोना लाइब्रेरी
कोरोना लाइब्रेरी में काम करते युवक.


20 सालों से नहीं बेचा है अखबार

इसके अलावे समसामयिक घटनाओं पर विद्वानों के महत्वपूर्ण आलेख भी आते रहते हैं. एक बार पढ़ने से उनका जी नहीं भरता है इसीलिए बीते 20 सालों से उन्होंने अखबार को रद्दी में नहीं बेचा. उन्हीं आलेखों को एकत्रित कर पुस्तक का रूप देने के लिए कोरोना बंदी में उनके पास पर्याप्त समय है और इसका उपयोग कर रहे हैं. मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह का यह भी मानना है उनका संकलन छात्रों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है जिन्हें एक डायरी में बहुत प्रकार की जानकारियां हासिल हो जाएंगी. वो स्थानीय खबरों को भी डायरी-बद्ध कर रहे हैं जो आसपास के युवाओं के लिए कौतूहल का विषय है.

गांव के युवा भी बंटा रहे हैं हाथ

मुक्तेश्वर सिंह की पहल से आसपास के युवा भी उत्साहित हैं और इस काम में उनका हाथ बंटा रहे हैं. प्रह्लादपुर गांव निवासी विनय प्रशांत मुक्तेश्वर के पहल के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. विनय प्रशांत ने कोरोना समाचारों का संकलन कर उसे एकीकृत करने की जिम्मेदारी ली है. मुक्तेश्वर सिंह के इस लाइब्रेरी में आसपास के युवा भी जुटने लगे हैं. गांव के लड़के त्रिपुरारी और ऋषभ बताते हैं कि कोरोना की वजह से उनके कालेज बंद हैं,  ऐसे में मुक्तेश्वर जी की लाइब्रेरी में उनका वक्त आसानी से कट जाता है और पढ़ने के लिए भी बहुत कुछ मिलता है.

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