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जेल में बंद कैदियों के नाम पर बनाया 150 से अधिक राशन कार्ड फिर 6 साल तक सरकारी अनाज का किया उठाव

जेल में बंद कैदियों के नाम पर बनाया 150 से अधिक राशन कार्ड फिर 6 साल तक सरकारी अनाज का किया उठाव

मुजफ्फरपुर का सेंट्रल जेल

मुजफ्फरपुर का सेंट्रल जेल

न्यूज 18 से बातचीत में मुजफ्फरपुर पूर्वी के एसडीओ कुंदन कुमार ने जांच के बाद दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और 6 साल से जितने फर्जी राशन कार्ड पर अनाज का उठाव किया है उसकी वसूली करने की बात की है.

मुजफ्फरपुर. बिहार की जेल में बंद कैदियों और कर्मियों के नाम से राशन कार्ड बनाकर 6 सालों से खाद्य आपूर्ति योजना के अनाज को गबन करने का मामला सामने आया है. फर्जी तरीके से राशन कार्ड बनाकर किए गए इस कारनामे में डीलरों और आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की भी घालमेल दिख रही है. लाभुकों की ऑनलाईन सूची जारी होने के बाद इस मामले का खुलासा हो रहा है जिसमें लंबे समय से फर्जीवाड़ा किया जाता रहा है. इस तरह के 171 फर्जी राशन कार्ड से अनाज का उठाव 6 सालों तक किया जाता रहा है.

फर्जी राशन कार्ड लौटाने के बाद भी हुआ अनाज का उठाव

मुजफ्फरपुर के वार्ड 42 में पड़ता है शहीद खुदीराम बोस केन्द्रीय कारा. इस जेल में बंद कैदियों और काम कर रहे सिपाहियों और कर्मियों के नाम से राशन कार्ड बनाकर सरकार के अनाज का उठाव किया जाता रहा. साल 2014 में इस तरह के 170 से अधिक राशन कार्ड बनाये गये थे जो सीधे तौर पर जेल में बंद कैदियों और कर्मियों के नाम से था. 6 साल पहले जब निगम के जमादार घर-घर राशन कार्ड बांटने आये थे जो जेल अधीक्षक ने जेल के भीतर राशन कार्ड वितरण का आदेश नहीं दिया था, इसके बाद स्थानीय वार्ड पार्षद और निगम के जमादार ने करीब 180 फर्जी राशन कार्ड को निगम में वापस कर दिया था लेकिन लौटाये गये इस तरह के 171 राशन कार्ड से राशन का उठाव पिछले 6 सालों से होता रहा.  ऑनलाईन व्यवस्था होने के बाद इस तरह के राशन कार्ड की सूची मिली है जिसमें पॉश मशीन से अनाज उठाव की व्यवस्था लागू होने के बाद भी अनाज का उठाव बिना लाभुकों के अंगूठा लगाये ही उठाया जाता रहा है. इस मामले में वार्ड 42 की सतर्कता समिति की सदस्य प्रतिभा देवी ने डीएम से कार्रवाई की मांग की है.

ये है फर्जी राशन कार्ड का नम्बर

फर्जी पाये गये राशन कार्ड का नंबर इस प्रकार है. 101470804205100036, से लेकर 10114704804206100001- से लेकर अंत के 64 डिजीट वाले राशन कार्ड नंबर सीधे फर्जीवाड़े से जुड़े हैं. इसी तरह और भी ऑनलाईन लाभुकों के सर्च में इस तरह की सूची मिली है जिसके नाम पर फर्जी तरीके से अनाज का उठाव पिछले 6 सालों से किया जाता रहा. ये सभी राशन कार्ड केन्द्रीय कारा के कैदियों और सिपाहियों के नाम से बनाये गये लेकिन अधिकारियों और डीलरों की मिलीभगत से अनाज का उठाव किया जाता रहा. साल 2014 में फर्जी तरीके से बनाये गये राशन कार्ड को निगम में लौटाने वाली वार्ड पार्षद हैरान है कि आखिर यह सब इतने सालों तक कैसे होते रहा.

डीलर बोले

दरअसल वार्ड पार्षदों के बार-बार मांग के बावजूद डीलरों के पास मौजूद लाभुकों की सूची सालों से उपलब्ध नहीं कराई गई जिसके कारण भ्रष्टाचार फलता-फूलता रहा. वार्ड 42 की पार्षद अर्चना पंडित ने निगम के जमादार अमर कुमार द्वारा करीब 180 कार्ड जेल से संबंधित होने पर जेल अधीक्षक से मुलाकात के बाद निगम को लौटवा दिया था लेकिन कुछ ही दिन बाद कार्ड से राशन उठाया जाता रहा. डीलर वीरेन्द्र चौधरी और राजदेव राम से न्यूज 18 की टीम ने इस मामले में बात की. वीरेन्द्र राय ने मामले में खुद की संलिप्तता से इंकार किया जबकि डीलर राजदेव राम ने स्वीकार किया कि जेल के कुछ सिपाही अनाज लेने उनके यहां आते हैं. डीलरों ने ये नहीं माना कि उनके पास जेल में बंद कैदियों और सिपाहियों के राशनकार्ड सालों से रखे हैं  लेकिन बड़ा सवाल है कि आखिर फर्जी राशन कार्ड बना कैसे.

प्रशासन जांच के बाद करेगा कार्रवाई

इस मामले में दो दिन तक अनशन किये जाने के बाद डीएम ने एक सप्ताह में जांच की कारवाई शुरू करने का आश्वासन अनशनकारियों को दिया है. न्यूज 18 से बातचीत में मुजफ्फरपुर पूर्वी के एसडीओ कुंदन कुमार ने जांच के बाद दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और 6 साल से जितने फर्जी राशन कार्ड पर अनाज का उठाव किया है उसकी वसूली करने की बात की है.

Tags: Bihar News, Muzaffarpur news, Ration card, Ration coupons

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