बिहार में कोरोना के बाद अब इंसेफेलाइटिस का प्रकोप, SKMCH में भर्ती कराये गए 6 बीमार बच्चे

बिहार में कोरोना के बाद अब इंसेफेलाइटिस का प्रकोप, SKMCH में भर्ती कराये गए 6 बीमार बच्चे (फाइल फोटो)

बिहार में कोरोना के बाद अब इंसेफेलाइटिस का प्रकोप, SKMCH में भर्ती कराये गए 6 बीमार बच्चे (फाइल फोटो)

Bihar Encephalitis Update: बिहार के उत्तरी इलाके में हर साल दस्तक देने वाली इस बीमारी से इस साल अभी तक कुल 8 बच्चों को एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया है, जिनमें दो बच्चों में इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.

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मुजफ्फरपुर. कोविड-19 के कहर के बीच मुजफ्फरपुर में बच्चों की जानलेवा बीमारी एईएस (Encephalitis) भी सिर उठाने लगा है. रविवार शाम से सोमवार की शाम तक एसकेएमसीएच (SKMCH Muzaffarpur) के हॉस्पिटल में चार बीमार बच्चों को भर्ती कराया गया, जिसमें से तीन में एईएस (AES) की पुष्टि हो गई है जबकि एक बच्चे का जांच रिपोर्ट आना बाकी है. इन सभी बच्चों को एसकेएमसीएच के पेडिया आईसीयू में भर्ती कराया गया है जहां उनकी गहन चिकित्सा की जा रही है.

जो नए बच्चे एईएस की चपेट में आए हैं उनमें वैशाली की 3 साल की सोनाक्षी कुमारी, सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर की 4 साल की रिया और मोतिहारी जिले के पताही गांव के 3 साल के पीयूष राज शामिल हैं.  पीयूष राज में हीट स्ट्रोक के लक्षण भी देखे गए हैं, इसके अलावा इन सभी बच्चों में सोडियम और ग्लूकोज की काफी कमी है. एसकेएमसीएच के पेडिया आईसीयू में फिलहाल एईएस से पीड़ित 6 बच्चों का इलाज चल रहा है.

इस वर्ष बीमार होने पर एईएस के संदेह में अब तक कुल 8 बच्चों को एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया है, जिनमें दो बच्चों में इसकी पुष्टि नहीं हो पाई. एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ बीएस झा ने बताया है कि स्वास्थ्य मुख्यालय को इससे संबंधित तमाम जानकारी रिपोर्ट बनाकर दे दी गई है. एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर गोपाल शंकर साहनी ने कहा है कि धूप का एक्सपोजर और पोषण में कमी की वजह से बच्चे इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं.

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उन्होंने बच्चों के अभिभावकों से अपील की है कि बच्चे को थोड़ा-थोड़ा करके बार-बार खाना खिलाते रहें और पानी अवश्य पिलाएं. बच्चे धूप में नहीं जाए इसका ध्यान गार्जियन को रखना पड़ेगा. इसके बाद भी अगर बुखार के साथ चमकी या उल्टी के लक्षण आते हैं तो उन्हें तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं. इधर जिला प्रशासन का दावा है कि इसको लेकर जागरूकता अभियान लगातार चल रहा है इसमें एएनएम आशा कार्यकर्ता और जीविका दीदियों के माध्यम से लोगों को पंपलेट देखकर एईएस के लक्षणों और उससे बचाव की जानकारी दी जा रही है.

जिले की सभी पंचायतों को अधिकारियों ने गोद ले रखा है और प्रत्येक शनिवार को पदाधिकारी अपने पंचायत के एक गांव का बड़ा करके जागरूकता अभियान का जायजा ले रहे हैं, हालांकि इसका असर अभी पर्याप्त नहीं दिख रहा है खासकर दलित और पिछड़े मुहल्लों में अभी भी जीवन में बहुत सुधार की आवश्यकता है. पिछले दिनों कांटी के रामनाथ धमौली पूर्वी के इलाके में एक बच्चे की मौत संदिग्ध एआईएस से हो गई. परिजन बच्चे में चमकी और बुखार के लक्षण बता रहे थे जबकि स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की. फिलहाल गर्मी तापमान में बढ़ोतरी के कारण इस बीमारी का खतरा बढ़ गया है.
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