Solar Eclipse June 2021: क्या बिहार में भी दिखेगा सूर्यग्रहण? सूतक काल के बारे में जानें

सूर्य ग्रहण को लेकर मान्‍यता यह भी है कि ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए.

सूर्य ग्रहण को लेकर मान्‍यता यह भी है कि ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए.

विज्ञान के अनुसार चंद्रमा (Moon) के पृथ्‍वी (Earth) व सूर्य (Sun) के बीच से गुजरने के दौरान सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) लगता है. सूर्य ग्रहण में पृथ्वी पर पड़ने वाली सूर्य की किरणें अवरुद्ध हो जाती हैं और और कुछ समय के लिए एक विशेष इलाके में अंधेरा छा जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 10, 2021, 11:25 AM IST
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पटना. वर्ष 2021 का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse June 2021) लगने वाला है. सूर्य ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्‍यता भी है. इसके अनुसार जब राहु (Rahu) व केतु (Ketu) सूर्य को खाने या निगलने की असफल कोशिश करते हैं, जब उस दौरान सूर्य ग्रहण लगता है. आज यानी 10 जून को दुनिया भर के लोग सूर्य ग्रहण का नजारा देख सकेंगे. साल का पहला सूर्य ग्रहण आज दोपहर 01 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर शाम के 06 बजकर 41 मिनट तक चलेगा.

हालांकि भारत में इस सूर्य ग्रहण को देखा नहीं जा सकेगा. जिस कारण से इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा. गुरुवार के सूर्यग्रहण का सूतक काल मान्‍य नहीं है. इस कारण आज शनि जयंती व वट सावित्री पूजा हो रही है. बिहार में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा.

ज्योतिषियों की मानें तो यह ग्रहण भारत में नहीं दिख रहा है. इसलिए इसका कोई सूतक नहीं माना  जाएगा. दरअसल सूतक काल वह काल होता है जब मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. ऐसा तब होता है जब ग्रहण उसी देश में पड़ रहा हो और उसे खुली आंखों से देखा जा सके.

सूतक काल में ग्रहण से 9 घंटे पहले से मंदिर बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण के बाद साफ-सफाई के बाद ही मंदिर के कपाट खोले जाते हैं. ज्योतिष के मुताबिक सिर्फ उन्हीं ग्रहणों का धार्मिक महत्व होता है, जिन्हें खुली आंखों से देखा जा सके. इसलिए उत्तराखंड, यूपी, पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली आदि राज्यों पर ग्रहण का कई प्रभाव नहीं है.
यह ग्रहण भारत के राज्य अरुणांचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के उत्तरी भाग में कुछ क्षणों के लिए लगेगा जिसे देख पाना कठिन रहेगा. ग्रहण अमेरिका, यूरोप,उत्तरी कनाडा, एशिया,रूस और ग्रीनलैंड में पूरी तरह से देखा जा सकेगा. पंचांग के अनुसार ग्रहण ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि, वृषभ राशि  और मृगशिरा नक्षत्र में लगेगा. आज के दिन वट सावित्री व्रत और शनि जयंती भी मनाई  जा रही है.

बता दें कि 15 दिनों के अंतराल में यह दूसरा ग्रहण होगा. इसके पहले 26 मई को भी चंद्र ग्रहण लग चुका है. यह खगोलीय घटना आकाश में उस वक्त होती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच में आ जाता है. सूर्य व पृथ्वी के बीच चंद्रमा के आ जाने के कारण कुछ समय के लिए चंद्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब ढकता है. इस खगोलीय घटना को ही सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) कहते हैं.

सूर्य ग्रहण में पृथ्वी पर पड़ने वाली सूर्य की कम से कम कुछ किरणें अवरुद्ध हो जाती हैं और और कुछ समय के लिए एक विशेष इलाके में अंधेरा छा जाता है. हालांकि, चंद्रमा छोटा होने की वजह से सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता है और उसके किनारे आग के छल्ले की तरह नजर आते हैं.

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