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जीवित पिता को मृत घोषित कर बेच दी पुश्तैनी संपत्ति, जांच में हुआ खुलासा

SUDHIR KUMAR | News18 Bihar
Updated: November 27, 2019, 12:58 PM IST
जीवित पिता को मृत घोषित कर बेच दी पुश्तैनी संपत्ति, जांच में हुआ खुलासा
मुजफ्फरपुर में हुई जमीन खरीब-बिक्री के मामले की जानकारी देता पीड़ित शख्स.

पूरा मामला मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) से जुड़ा है, जहां जमीन की खरीद-बिक्री (Land Dispute) के नाम पर यह घटना सामने आई है. इस मामले में सरकारी कर्मचारी भी शक के घेरे में हैं.

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  • Last Updated: November 27, 2019, 12:58 PM IST
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मुजफ्फरपुर. बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में एक कलयुगी बेटे की घिनौनी करतूत उजागर हुई है. बेटे ने पारिवारिक संपत्ति (Paternal Property) को हड़पने की नियत से अपने जीवित पिता को मृत (Dead) घोषित कर दिया और परिवार की जमीन बेच दी. इस करतूत में निबंधन पदाधिकारी (Registry Office) से लेकर दाखिल-खारिज करने वाले कर्मचारी और अधिकारी की मिलीभगत उजागर हुई है. इस मामले में दाखिल खारिज करने वाले राजस्व कर्मचारी की दबंगई भी उजागर हो गई है.

सवालों के घेरे में निबंधन पदाधिकारी

कर्मचारी ने यह भी स्वीकार किया है कि बगैर स्थल जांच के ही और दस्तावेजों के मिलान के ही उन्होंने फर्जी रजिस्ट्री से प्राप्त क्रेता के पक्ष में दाखिल खारिज की प्रक्रिया शुरू कर दी है. मामला काटी अंचल के काबिल पुर मौजा का है. मुजफ्फरपुर में सुबोध मिश्रा नामक एक कलयुगी बेटे ने जमीन की लालच में अपने पिता रामेश्वर मिश्रा को मृत घोषित कर दिया. उसके इस कार्य में निबंधन पदाधिकारी से लेकर राज्य कर्मचारी तक का साथ मिला.

14 डिसमिल जमीन का है मामला

कांटी अंचल के काबिल पुर गांव के निवासी कामेश्वर मिश्रा ने अपनी 14 डिसमिल जमीन बहू दीपा मिश्रा को ₹460000 में बेच दिया यह बात रामेश्वर मिश्रा के एक अन्य बेटे सुबोध मिश्रा को हजम नहीं हुई. उसने वही जमीन ₹5,60,000 लेकर अपनी एक रिश्तेदार के नाम रजिस्ट्री कर दी. रजिस्ट्री के दस्तावेज में इस बात का जिक्र है कि सुबोध मिश्रा के दादा और पिता जी दोनों की मृत्यु हो चुकी है. कामेश्वर मिश्रा द्वारा बहू दीपा मिश्रा को किए गए रजिस्ट्री दस्तावेज के मुताबिक, मोतीपुर अवर निबंधन कार्यालय में सेल डीड संख्या 4998 17-7-2019 को यह रजिस्ट्री हुई, लेकिन एक दूसरे सेल डीड संख्या 4995 से कामेश्वर मिश्रा के बेटे सुबोध मिश्रा ने वही जमीन अपनी भाभी उषा देवी को बेच दिया.

एक ही जमीन के दो दस्तावेज से हुआ खुलासा

मोतीपुर रजिस्ट्री ऑफिस में पिता कामेश्वर मिश्रा ने पहले उपस्थित होकर टोकन संख्या 4998/2019 हासिल किया था. उसके बाद बेटे सुबोध मिश्रा ने टोकन संख्या 5079/2019 हासिल किया, लेकिन जीवित पिता को मृत बताने वाले दस्तावेज के अधार पर बेटे की रजिस्ट्री पहले हो गई. पहले पहुंचे पिता का सेल डीड संख्या- 4998/17-07-2019 है तो बाद में हाज़िर बेटे का सेल डीडनम्बर--4995/17-07-2019 है. इसे मोतीपुर अवर निबंधक की लापरवाही कहें या कुछ और मात्र तीन सीरियल अंतर पर उपस्थापित एक ही जमीन के दोनों दस्तावेजों के तथ्यों के अंतर को पकड़ नही सके और दोनों रजिस्ट्री कर दिया. जबकिं दोनों दस्तावेजो में जमीन की पहचान खाता संख्या-09, खेसरा--1168 और थाना नम्बर--373 दर्ज है.
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दाखिल-खारिज में भी हुआ खेल

रजिस्ट्री के बाद दाखिल खारिज में भी जबरदस्त खेल हुआ. पिता कामेश्वर मिश्रा के खरीददार दीपा ने 18 जुलाई को दाखिल खारिज का आवेदन कांटी अंचल आफिस में जमा कर दिया, जबकि सुबोध मिश्रा के खरीददार उषा देवी ने 29 जुलाई को दाखिल खारिज का आवेदन दिया. लेकिन, राजस्व कर्मचारी मंजू कुमारी ने दीपा मिश्रा के पहले के आवेदन को दबा दिया और उषा देवी के बाद में दिए गए आवेदन को इंटरटेन करते हुए स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन सीओ कार्यालय को सौंप दिया. इस मामले में जब न्यूज़ 18 ने राजस्व कर्मचारी मंजू कुमारी से सवाल किया तो वे सिरे से उखड़ गई और कहने लगी कि जिसको जो करना है करें मैं जो चाहूंगी वही करूंगी. इस मामले में भी उन्होंने बगैर प्लॉट पर गए स्थल जांच की बात स्वीकार की है.

अपराध की वजह बन रहे जमीनी मसले

सीओ मंजू कुमारी का कहना है की कांटी सीओ उनके पदाधिकारी हैं और वे सब संभाल लेंगे. फर्जी रजिस्ट्री के इस मामले ने एक और जहां इंसानी रिश्तो को शर्मसार किया है तो दूसरी ओर भूमि सुधार कानून की धज्जी उड़ाने वाले अधिकारियों की करतूत को उजागर किया है. पुलिस आंकड़े बताते हैं कि बिहार में अपराध के 60 से 70% मामले भूमि विवाद की वजह से हैं जाहिर होता है भूमि अपराध ना सिर्फ फर्जी लोगों की वजह से हो रहा है बल्कि अधिकारियों की संलिप्तता भी इसमें समान रूप से शामिल है.

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First published: November 27, 2019, 12:08 PM IST
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