जेल का फाटक टूटेगा... इस नारे को सुषमा ने बनाया था 'परिवर्तन' का औजार

सुषमा स्वराज उस समय जॉर्ज के चुनाव प्रचार के लिए मुजफ्फरपुर पहुंची थीं. वे अपनी सभाओं में नारा लगाती थीं, 'जेल का फाटक टूटेगा, जॉर्ज हमारा छूटेगा'. यह नारा आम लोगों की जुबान पर छा गया था.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: August 7, 2019, 11:35 AM IST
जेल का फाटक टूटेगा... इस नारे को सुषमा ने बनाया था 'परिवर्तन' का औजार
सुषमा स्वराज ने 1977 के चुनाव में जॉर्ज फर्नांडिस के लिए चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी.
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: August 7, 2019, 11:35 AM IST
भारतीय जनता पार्टी की प्रखर नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन से पूरा देश गमगीन है तो बिहार का मुजफ्फरपुर उनकी यादों को स्मरण कर रहा है. उस दौर की राजनीति से जुड़े कई जानकार बताते हैं कि जॉर्ज फर्नांडिस के साथ उनकी निकटता थी और वह विचारों से समाजवादी थीं. वह 1977 से लेकर 1980 तक कई बार बिहार दौरे पर आई थीं. विशेषकर जॉर्ज फर्नांडिस के चुनाव लड़ने के दौरान एक तरह से उन्होंने पूरा कैम्पेन ही संभाल रखा था.

सुषमा ने असरदार प्रचार किया
दरअसल यह वह दौर था जब इमरजेंसी के दौरान और बाद में मुजफ्फरपुर के लोगों ने परिवर्तन की लहर देखी थी. जॉर्ज फर्नांडिस के करीबी रहे हरेंद्र कुमार बताते हैं कि 1977 के लोकसभा चुनाव में जॉर्ज ने जेल से ही नामांकन किया. उनका यहां कोई परिवार या रिश्तेदार नहीं था. सुषमा स्वराज उस समय जॉर्ज के चुनाव प्रचार के लिए मुजफ्फरपुर पहुंची थीं. वे अपनी सभाओं में नारा लगाती थीं, 'जेल का फाटक टूटेगा, जॉर्ज हमारा छूटेगा'. यह नारा आम लोगों की जुबान पर छा गया था.

हर सभा में करतीं परिवर्तन की अपील

डॉ हरेंद्र कहते हैं, हाथ उठाए हथकड़ी वाला जॉर्ज का कटआउट चुनाव प्रचार का बैनर-पोस्टर था और सुषमा स्वराज स्टार प्रचारक थीं. सिर्फ नाश्ता कर सुबह ही कार्यकर्ताओं की टीम के साथ निकल पड़तीं. आपातकाल व देश के विकास पर केंद्रित उनका भाषण होता था और परिवर्तन हो, यही अपील वह करतीं.

बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने भी सुषमा स्वराज के बिहार आने के उस दौर को याद किया है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है मैंने उन्हें पहली बार तब सुना था जब वह 22 वर्ष की थीं. उस दौरान 1977-80 के बीच जॉर्ज फर्नांडीस के साथ बिहार के मुजफ्फरपुर आई थीं.



मीनापुर स्कूल से भी जुड़ी हैं यादें
उस दौर के नेता बताते हैं कि एक अलग ही दौर था. हर उम्र के लोग उनके लिए प्रचार करते. चंदा जुटाते. सुषमा स्वराज एक बार लगातार 10 दिनों तक रुकी थीं. मीनापुर स्कूल में उन्होंने रात्रि विश्राम भी किया था.

ये भी पढ़ें-


वह दौर...जब 12 बजे रात तक हजारों की भीड़ सुषमा को सुनती रही




सुषमा स्वराज का निधन: CM नीतीश बोले- देश हमेशा उन्हें याद रखेगा, राज्यपाल, राबड़ी और मांझी ने भी जताया शोक

First published: August 7, 2019, 11:27 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...