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वह दौर...जब 12 बजे रात तक हजारों की भीड़ सुषमा को सुनती रही

1977 में मुजफ्फरपुर में जॉर्ज फर्नांडिस के चुनाव प्रचार की कमान सुषमा स्वराज ने संभाल रखी थी.

1977 में मुजफ्फरपुर में जॉर्ज फर्नांडिस के चुनाव प्रचार की कमान सुषमा स्वराज ने संभाल रखी थी.

जॉर्ज फर्नांडिस ने जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा था और जीत भी हासिल की थी. उनकी चुनावी नैया पार कराने सुषमा स्वराज की अहम भूमिका थी.

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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार देर रात को आकस्मिक निधन हो गया. डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें दिल का दौरा पड़ा था. उनके निधन से देश भर में शोक की लहर है. बिहार में कई ऐसे लोग हैं जो उनसे जुड़ी बातों को स्मरण कर रहे हैं. समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस के करीबी रहे डॉ हरेंद्र कुमार इन्हीं में से एक हैं. हरेंद्र को आज भी वे बातें याद हैं, जो उन्हें झकझोरती हैं.

'जॉर्ज के जीतने में सुषमा की अहम भूमिका'
हरेंद्र कुमार बताते हैं कि जॉर्ज फर्नांडिस और उनके साथियों को जून 1976 में गिरफ्तार कर लिया गया था. जेल में रहते हुए ही जॉर्ज ने चुनाव लड़ा और जीते भी. उनकी चुनावी नैया पार कराने के लिए सुषमा स्वराज पहुंचीं थीं और उनका अहम योगदान रहा था.

'सुषमा ने संभाली थी चुनावी कमान'
बकौल हरेंद्र कुमार, जॉर्ज की चुनावी कमान सुषमा स्वराज ने संभाल रखी थी. उस समय प्रचार का अलग तरीका था. नुक्कड़ सभा का प्रचलन था. सुबह से देर शाम तक बिना किसी ताम-झाम के लगातार नुक्कड़ सभा करती थीं. हजारों की भीड़ को वह कैसे अपने साथ जोड़े रखती थीं, यह उनकी अद्भुत शैली थी.

'ओजस्वी वक्ता होने का दिया परिचय'
उसी दौर को याद करते हुए हरेंद्र कुमार एक वाकया सुनाते हुए कहते हैं,  '1977 में जॉर्ज साहब जेल में थे. उस वक्‍त सुषमा जी की उम्र लगभग 22 साल रही होगी. उसी दौरान पहली बार भाषण देने वह मुजफ्फरपुर के कम्पनी बाग आई थीं. इसी सभा में बाबू जगजीवन राम समेत कई नेताओं को भाषण देना था, लेकिन देरी हो रही थी, तब सुषमा जी ने अपने ओजस्वी वक्ता होने का परिचय दिया था.

12 बजे रात तक सुनते रहे लोग
लगातार तीन घंटे से भी अधिक समय तक उन्होंने भाषण दिया और लोगों की भीड़ को 12 बजे तक बांधे रखा. उनकी भाषण शैली ऐसी थी वहां जमे लोग जो वरिष्ठ नेताओं के आने में हो रही देरी से परेशान थे और वे जाना चाहते थे. लेकिन, सुषमा ने सुषमा ने जैसे ही माइक थामी वे अपनी जगहों पर ऐसे टिके जैसे वे रात भर रहने को आए हों. अंतत: 12 बजे रात को जगजीवन बाबू और अन्य नेता पहुंचे और सुषमा ने भाषण का अंत किया. इस दौरान हजारों की भीड़ को सुषमा स्वराज ने अकेले संभाला.

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