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गर्मी की दस्तक के साथ उत्तर बिहार पर मंडराने लगा इंसेफेलाइटिस का खतरा, पिछले साल 153 बच्चों की हुई थी मौत
Muzaffarpur News in Hindi

Praveen Thakur | News18 Bihar
Updated: March 31, 2020, 6:19 PM IST
गर्मी की दस्तक के साथ उत्तर बिहार पर मंडराने लगा इंसेफेलाइटिस का खतरा, पिछले साल 153 बच्चों की हुई थी मौत
बिहार के उत्तरी भाग में इंसेफेलाइटिस नामक बीमरी का हर साल कहर बरपता है

एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस (AES) का मुख्य केंद्र मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) है और इससे बचाव के लिए मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच (SKMCH) मेडिकल कॉलेज को सरकार ने मुख्य स्वास्थ्य केंद्र माना है. एसकेएमसीएच में वायरोलॉजिकल लैब की स्थापना की गई है जिसे इसी साल केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने उद्घाटन किया है.

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मुजफ्फरपुर. गर्मी के दस्तक देते ही बिहार पर एईएस (AES) यानी इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) बुखार का फिर से खतरा बढ़ गया है. देश- विदेश में शोध के बाद भी बीमारी अब तक अज्ञात है. लक्षण के आधार पर इस बीमारी का अभी तक इलाज हो रहा है. इस साल इस बीमारी ने  काफी पहले ही दस्तक दे दी है. मार्च महीने में ही दो मामले सामने आ चुके हैं जिसमें से मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के सकरा के साढ़े 3 साल के बच्चे की मौत भी हो चुकी है.

आंकड़ों में एईएस

एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस जिसे स्थानीय भाषा मे चमकी बुखार वाली बीमारी कहते हैं, मुजफ्फरपुर समेत आस पास के जिलों में इस बीमारी का खौफ हर साल गर्मी में रहता है. मुजफ्फरपुर के बाद सबसे अधिक मामले मोतिहारी और सीतामढ़ी जिले से आते हैं. 1995 से बीमारी की दस्तक इलाके में हुई लेकिन 2010 से मामले तेजी से हरेक साल आने लगे.



पिछले कई वर्षों से एईएस पीडि़त मुजफ्फरपुर जिले के बच्चों के आंकड़े.



वर्ष    बीमार  मृत    फीसद

2010   59  24     40.67

2011  121   45  37.19

2012  336  120    35.71

2013  124   39  31.42

2014   342  86     25.14

2015    75  11     14.66

2016    30  04   13.33

2017   09  04    44.44

2018   35  11    31.42

2019  450   116  25.77

2019* 440    103  23.40
ये आंकड़े मुजफ्फरपुर जिले का है जबकि दूसरे जिलों में खासकर मोतिहारी में मुजफ्फरपुर के बाद सबसे अधिक बच्चों की मौत एईएस से होती रही है. पिछले साल मुजफ्फरपुर में 153 बच्चों की मौत का सरकारी आंकड़ा था जिसमें मुजफ्फरपुर के 103 बच्चे थे.

प्रशासनिक तैयारी

एईएस से बचाव के लिये जागरूकता को सबसे अहम माना गया है. बच्चों को तेज धूप में नहीं निकलने देने और रात में खाना खिलाकर सुलाने की अपील की जा रही है. बीमार पड़ने पर बिना ओझा गुनी के चक्कर मे पड़े नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में लाने की अपील की जा रही है. आशा और आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिये घर घर जागरूकता के लिये पंपलेट बांटे गये हैं. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा नुक्कड़ नाटकों के जरिये भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया है.

एसकेएमसीएच है मुख्य बचाव सेंटर

एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस का मुख्य केंद्र मुजफ्फरपुर है और इससे बचाव के लिए मुजफ्फरपुर स्थित एसकेएमसीएच मेडिकल कॉलेज को सरकार ने मुख्य स्वास्थ्य केंद्र माना है. एसकेएमसीएच में वायरोलॉजिकल लैब की स्थापना की गई है जिसे इसी साल केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने उद्घाटन किया है. साथ में 100 बेड के सुपर स्पेशलिटी पीआईसीयू की स्थापना एसकेएमसीएच में की गई है. इस केंद्र को अप्रैल तक तैयार कर लिया जाना था, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन के कारण पीआईसीयू निर्माण का काम फिलहाल रुका हुआ है.

70 फीसदी हो चुका है काम

इस भवन के 70 फ़ीसदी हिस्से का काम हो चुका है. एसकेएमसीएच में पिछले साल 5 पीआईसीयू काम कर रहा था जिसमें 68 बेड की क्षमता थी. फिलहाल 20 बेड का पीआईसीयू काम कर रहा है जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकेगा. पीआईसीयू में 10 वेंटिलेटर की व्यवस्था है जिसे क्रिटिकल मरीज को वेंटिलेटर के जरिए बचाने की कोशिश चिकित्सक करते हैं इसके अलावा सभी अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को फोकस किया गया है. ताकि बीमार पड़ने वाले बच्चे जैसे ही जल्द से जल्द सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में आने पर उनके बचने की संभावना बढ़ जाती है. जितना विलंब से प्रोटोकॉल के तहत एईएस के बच्चों का इलाज शुरू होता है उतना ही बच्चों को बचाने में चिकित्सकों को दिक्कत आती है

बचाव के लिये प्रशिक्षण

एईएस से बचाव के लिए चिकित्सक, नर्सेज और मेडिकल कर्मियों को चार स्तरों पर प्रशिक्षित किया गया है. पीएचसी, सदर अस्पताल और राज्य मुख्यालय के अलावा नई दिल्ली के एम्स भेज कर चिकित्सकों और नर्सों को विशेष प्रशिक्षण एईएस से बचाव के लिए दिया गया है. नई दिल्ली के एम्स में तीन चरणों में मुजफ्फरपुर के चिकित्सकों और नर्सों की विशेष ट्रेनिंग इस साल दी गई है. मुजफ्फरपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित कर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने इसके बचाव के लिए किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतने की अपील सभी सिविल सर्जन और चिकित्सकों से की है.

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First published: March 31, 2020, 5:00 PM IST
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