25 सालों से बिहार को रुला रहा है AES, आठ सालों में 344 बच्चों ने गंवाई जान

एईएस से होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. साल 2010 से पहले सरकारी आंकड़े तैयार नहीं किए जाते थे. पिछले 8 सालों में 1134 बच्चे एईएस का शिकार हुए हैं जिनमें से अब तक 344 बच्चों की मौत हो चुकी है.

Amrendra Kumar | News18 Bihar
Updated: June 17, 2019, 4:56 PM IST
25 सालों से बिहार को रुला रहा है AES, आठ सालों में 344 बच्चों ने गंवाई जान
मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में भर्ती एईएस से बीमार बच्चा
Amrendra Kumar
Amrendra Kumar | News18 Bihar
Updated: June 17, 2019, 4:56 PM IST
बिहार में हो रही बच्चों की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. लगातार हो रही मासूमों की मौत सिस्टम के सामने किसी पहेली सरीखी साबित हो रही है जिसे न तो डॉक्टर और न ही कोई सरकार सुलझा पा रही है. अबूझ पहेली का रूप अख्तियार कर चुकी एईएस नाम की इस बीमारी पर काबू पाने के दावे तो हर साल किए जाते हैं लेकिन ये बातें इस बीमारी के आने पर पूरी तरह से बेईमानी साबित हो जाती हैं.

अब तक 97 की मौत

एईएस से होने वाली मौत की बात करें तो अकेले इस साल एईएस से बिहार में अब तक 97 बच्चों की मौत हो चुकी है जबकि कई अभी भी मौत के मुंह में हैं. हर मिनट अस्पताल से किसी मां के चीखने या फिर रोने की आवाज निकल कर आती है. मुजफ्फरपुर शहर के दो अस्पतालों के आईसीयू पूरी तरह से बच्चों से भरे हैं और इन आईसीयू में एक-एक बेड पर तीन-तीन बच्चों का इलाज हो रहा है.

24 सालों से जारी है कहर

बिहार के लिए एईएस ऐसे ही अबूझ पहेली नहीं बना है. इस बीमारी ने 24 साल पहले यानि 1995 में दस्तक दी थी. तब एईएस ने महामारी के रूप में दस्तक दी थी, जिसका कहर आज भी जारी है.

8 सालों में 344 की मौत

एईएस से होने वाली मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले 8 सालों की बात करें तो इस दौरान 1134 बच्चे बीमारी का शिकार हुए हैं जिनमें से 344 बच्चों की मौत हो चुकी है, वहीं कई बच्चे विकलांगता के शिकार हो गए हैं.
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2010 से पहले का रिकॉर्ड नहीं

साल 2010 से पहले सरकारी आंकड़े तैयार नहीं किए जाते थे, लेकिन उसके बाद से हरेक साल बच्चों की मौत का आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग में दर्ज होता रहा है. वर्ष 2010, 2012 और 2015 में बच्चों की मौत का सिलसिला बढ़ता चला गया. यूं तो बिहार के 12 जिले इस जानलेवा रोग से प्रभावित हैं लेकिन मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और वैशाली जिले से सबसे अधिक मामले एईएस के आते रहे हैं. इस साल भी मुजफ्फरपुर समेत आस-पास के जिलों से इस बीमारी की शुरूआत हुई और तापमान में बढ़ोतरी के साथ इसकी संख्या और शरीर से पसीना निकलने वाली उमस भरी गर्मी शुरू होने पर एईएस के मामले बढ़ने की आशंका है.

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First published: June 17, 2019, 10:09 AM IST
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