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Lockdown में छीन गई रोजी रोटी तो ठेला चलाकर दिल्ली से बेगूसराय पहुंच गए तीन दोस्त
Begusarai News in Hindi

Praveen Thakur | News18 Bihar
Updated: April 5, 2020, 4:01 PM IST
Lockdown में छीन गई रोजी रोटी तो ठेला चलाकर दिल्ली से बेगूसराय पहुंच गए तीन दोस्त
दिल्ली से ठेला चलाकर बिहार पहुंचने वाले मजदूर

दिल्ली (Delhi) में लॉकडाउन (Lockdown) की स्थिति में फंसे बेगूसराय (Begusarai) के भगवानपुर थाना क्षेत्र के गांव के रहने वाले राजेश महतो, विकास नरसिंह और संभव ने बताया कि कभी सोचा नहीं था कि जो ठेला उसे रोजी-रोटी देता था ,वही घर वापसी का सहारा भी होगा

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मुजफ्फरपुर /बेगूसराय. देश में कोरोना (Corona Pandemic) संकट के बाद हुए लॉकडाउन (Lockdown) ने कई मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या पैदा कर दी और मजबूरन लोग अपने-अपने साधनों से दिल्ली को छोड़ घरों का रूख करने लगे. कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के तीन मजदूर वर्ग के दोस्तों की जो ठेला चलाकर दिल्ली से अपने घर बिहार के बेगूसराय आ गए.

तय कर ली 1200 किमी की दूरी

दिल्ली से घर वापसी के लिए मजदूरों का जत्था एनएच पर रोजाना 120 किलोमीटर ठेला चलाता रहा ताकि किसी तरह समय रहते घर पहुंचा जा सके. ठेले पर ही कुछ आवश्यक सामान रखकर 12 सौ किलोमीटर की दूरी तय करने की इन दोस्तों ने ठान ली. ठेला चला कर घर वापस आ रहे मजदूरों ने आपस में बारी बारी से ठेला चलाया. कभी किसी ने ठेले पर ही सोकर आराम किया तो कभी कहीं सड़क किनारे रूक कर.



ठेला चलाकर ही दिल्ली में होता था गुजारा



लॉकडाउन के बाद दिल्ली से बेगूसराय आने वाले मजदूरों ने बताया कि दिल्ली में वो सभी ठेले चला कर ही अपना गुजारा करते हैं साथ ही घर और परिवार के लिए बचत कर पैसे भी भेजते हैं. सभी मजदूर दिल्ली के आजादपुर मंडी में सब्जी ठेले पर लेकर घर-घर बेचने का काम नई दिल्ली और एनसीआर के क्षेत्र में करते रहे हैं जिनसे उन्हें हरेक माह दस हजार रुपए की बचत हो जाती थी लेकिन लॉकडाउन के बाद अगले 2 से 3 दिनों तक कोई काम नहीं मिलने के बाद सभी मजदूरों ने घर वापस आने का फैसला लिया.

रोजाना चलाते थे 100 किलोमीटर ठेला

घर से भी परिजनों के लगातार फोन कॉल्स आ रहे थे. रोजगार छीनने, रोजी-रोटी की तत्काल व्यवस्था नहीं होने और घर की चिंता ने उन्हें रोजी रोटी देने वाले ठेले से ही घर वापसी का फैसला लिया. सफर लंबा जरूर था लेकिन रोजाना 100 से 120 किलोमीटर की दूरी तय कर ये सभी मजदूर मुजफ्फरपुर के रास्ते अपने घर को पहुंचने को हैं.

रास्ते में मिलती रही मदद

नई दिल्ली से ठेला लेकर निकलने के बाद रास्ते में मजदूरों को खाने-पीने से लेकर आने जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. जगह-जगह पुलिस एनएच पर ठेले चलाने से भी मना करती रही लेकिन मजदूर आरजू मिन्नत कर आगे बढ़ते रहे. हालांकि ठेले पर खाने-पीने का कुछ आवश्यक सामान मजदूरों रख लिया था लेकिन लखनऊ आते आते सभी सामान खत्म हो गया. इसके बाद रास्ते में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा चलाए जाने वाले राहत शिविरों में खाने का सामान मजदूरों को मिलता रहा और फिर मजदूरों का कारवां आगे बढ़ता गया.

साल में दो बार आते थे घर

बेगूसराय के भगवानपुर थाना क्षेत्र के गांव के रहने वाले राजेश महतो, विकास नरसिंह और संभव ने बताया कि कभी सोचा नहीं था कि जो ठेला उसे रोजी-रोटी देता था ,वही घर वापसी का सहारा भी होगा. इससे पहले ठेले को किराए के घर के पास या फिर मंडी के पास ही छोड़ कर साल में दो बार घर वापस आते थे लेकिन कोरोना वायरस के डर ने इस बार मीलों का सफर करने को मजबूर कर दिया.

दिल्ली में नहीं मिली मजदूरों को मदद

ठेले से घर वापसी के लिए जद्दोजहद कर रहे मजदूरों ने बताया कि रात दिन कठिन मेहनत कर सभी लोग
ठेले से घर वापस आ रहे हैं. यदि उन्हें दिल्ली में खाने-पीने का आश्वासन स्थानीय प्रशासन और सरकार देती तो वे कभी इतनी मेहनत कर वापस नहीं आते. घरवालों से उनकी मोबाइल पर लगातार बात हो रही थी लेकिन 3 दिनों तक काफी दिक्कतों का सामना करने के बाद ठेले से ही वापस घर आने का निर्णय लेना पड़ा.

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First published: April 5, 2020, 3:55 PM IST
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