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मुजफ्फरपुर में इंसेफेलाइटिस का कहर, चार साल की जुड़वां बहनों ने तोड़ा दम

मुजफ्फरपुर का एसकेएमसीएच अस्पताल (फाइल फोटो)

मुजफ्फरपुर का एसकेएमसीएच अस्पताल (फाइल फोटो)

मुजफ्फरपुर के डीपीआरओ के मुताबिक दोनों बच्चियां मुसहरी के रोशनपुर चक्की गांव की रहने वाली थीं और उनका इलाज एसकेएमसीएच में चल रहा था.

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    मुजफ्फरपुर. बिहार में इंसेफलाइटिस ने एक बार फिर से अपना कहर बरपा ना शुरू कर दिया है. ताजा मामला मुजफ्फरपुर का है जहां एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) से पीड़ित दो जुड़वां बहनों की मौत हो गई है. इस मामले की पुष्टि मुजफ्फरपुर के डीपीआरओ कमल सिंह ने भी की है. आपको बता दें कि बिहार के उत्तरी इलाके में हर साल AES बीमारी की चपेट में आकर बच्चों की मौत हो जाती है. पिछले वर्ष इस बीमारी की वजह से 200 से अधिक बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

    जानकारी के मुताबिक 24 घंटे के दौरान दोनों बच्चियों ने दम तोड़ दिया. दोनों के नाम मौसमी और सुक्की बताए जा रहे हैं, जिनकी उम्र महज 4 साल थी. डीपीआरओ के मुताबिक दोनों बच्चियां मुसहरी के रोशनपुर चक्की गांव की रहने वाली थीं. उनका इलाज एसकेएमसीएच (SKMCH) में चल रहा था.

    तीसरी मौत

    मुजफ्फरपुर में एईएस से मौत का यह तीसरा मामला है, जबकि अभी भी 4 बीमार बच्चे एसकेएमसीएच में इलाजरत हैं. मुजफ्फरपुर जिले की बात करें तो जिले में अब तक 15 बच्चे चमकी बुखार से बीमार हुए हैं, जिनमें से 10 में एईएस की पुष्टि हुई है. वहीं 8 अन्य बच्चों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है. बिहार में ये बीमारी हर साल प्रदेश के उत्तरी इलाकों में अपना कहर बरपाती है. पिछले साल इस बीमारी ने डेढ़ सौ से भी अधिक बच्चों की जान ले ली थी.

    आंकड़ों में एईएस

    एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस जिसे स्थानीय भाषा मे चमकी बुखार वाली बीमारी कहते हैं, मुजफ्फरपुर समेत आस पास के जिलों में इस बीमारी का खौफ हर साल गर्मी में रहता है. मुजफ्फरपुर के बाद सबसे अधिक मामले मोतिहारी और सीतामढ़ी जिले से आते हैं. 1995 से बीमारी की दस्तक इलाके में हुई लेकिन 2010 से मामले तेजी से हरेक साल आने लगे.
    पिछले कई वर्षों से एईएस पीडि़त मुजफ्फरपुर जिले के बच्चों के आंकड़े.

    वर्ष बीमार मृत फीसदी

    2010 59 24 40.67

    2011 121 45 37.19

    2012 336 120 35.71

    2013 124 39 31.42

    2014 342 86 25.14

    2015 75 11 14.66

    2016 30 04 13.33

    2017 09 04 44.44

    2018 35 11 31.42

    2019 450 116 25.77

    2019* 440 103 23.40
    ये आंकड़े मुजफ्फरपुर जिले का है जबकि दूसरे जिलों में खासकर मोतिहारी में मुजफ्फरपुर के बाद सबसे अधिक बच्चों की मौत एईएस से होती रही है. पिछले साल मुजफ्फरपुर में 153 बच्चों की मौत का सरकारी आंकड़ा था जिसमें मुजफ्फरपुर के 103 बच्चे थे.

    AES की रोकथाम के लिए मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में बिहार सरकार लगातार अभियान चला रही है. खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों के बच्चों के इस बीमारी की चपेट में आने को लेकर सरकार की ओर से कई कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं.

    इनपुट- सुधीर कुमार

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