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क्या है मुजफ्फरपुर सेल्टर रेप केस, आखिर इतने लोग कैसे बन गए आरोपी

News18Hindi
Updated: December 12, 2019, 5:21 AM IST
क्या है मुजफ्फरपुर सेल्टर रेप केस, आखिर इतने लोग कैसे बन गए आरोपी
मुजफ्फरपुर सेल्टर रेप केस मामले में दिल्ली का कोर्ट आज सुना सकती है फैसला. (डिजाइन फोटो)

मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में शेल्टर होम में कई लड़कियों से रेप के मामले में दिल्ली (Delhi) की कोर्ट गुरुवार को फैसला सुना सकती है.

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  • Last Updated: December 12, 2019, 5:21 AM IST
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नई दिल्ली. बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में शेल्टर होम में कई लड़कियों से रेप के मामले में दिल्ली (Delhi) की कोर्ट गुरुवार को फैसला सुना सकती है. यह पूरा मामला बिहार के शेल्टर होम में 40 नाबालिग बच्चियों और लड़कियों से रेप (Rape) से जुड़ा है. क्या है यह मामला और कौन से लोग हैं इस मामले में आरोप बताते हैं केस जुड़ी हर जानकारी

क्या है पूरा मामला
• टाटा इंस्‍टरच्‍यूट ऑफ सोशल साइंस (टिस) की सोशल ऑडिट रिपोर्ट में बिहार के विभिन्‍न शेल्‍टर होम में लड़कियों व बच्‍चों के उत्‍पीड़न व उनके साथ यौन हिंसा की बातें उजागर हुईं थीं. पहले तो सरकार ने इसपर ध्‍यान नहीं दिया, लेकिन बाद में कार्रवाई की गई.
• 31 मई 2018 को बाल संरक्षण इकाई के तत्कालीन सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा ने शेल्‍टर होम के पदाधिकारियों पर पॉक्सो व आइपीसी की धाराओं में महिला थाने में मुकदमा दर्ज कराया. इसके बाद 28 जुलाई 2018 को सीबीआइ ने मामले की जांच शुरू की.

• कोर्ट ने ब्रजेश ठाकुर समेत 21 आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो, रेप, आपराधिक साजिश और अन्य धाराओं में आरोप तय किए.
• सीबीआई ने इस मामले में ब्रजेश ठाकुर को मुख्य आरोपी बनाया है.
• सीबीआई का आरोप है कि जिस शेल्टर होम में बच्चियों के साथ रेप हुआ है, वो ब्रजेश ठाकुर का है.• इस पूरे मामले में ब्रजेश ठाकुर के अलावा शेल्टर होम के कर्मचारी और बिहार सरकार के समाज कल्याण के अधिकारी भी मामले में आरोपी हैं.
• सीबीआइ ने पॉस्को की जिन धाराओं के तहत आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है, उनमें कम-से-कम 10 वर्ष और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है.

23 फरवरी से हो रही थी सुनवाई
• सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 23 फरवरी से इस मामले की साकेत कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही थी. सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया था.
• मामले की मॉनीटरिंग सुप्रीम कोर्ट कर रहा है. साकेत कोर्ट में सात महीने सुनवाई चली.
• सुप्रीम कोर्ट ने बीते सात फरवरी को मामले को सुनवाई के लिए बिहार से दिल्ली के साकेत कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया.
• सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को पीड़ित लड़कियों को मुजावजा देने तथा उनकी चिकित्सा व शिक्षा तथा आर्थिक मदद करने का आदेश दिया.
• सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस मामले की सुनवाई साकेत कोर्ट में 23 फरवरी 2019 से चल रही थी.
• कोर्ट में पीड़ितों ने अपनी रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्‍तान बताई थी
• सुनवाई के बाद 30 सितंबर 2019 को कोर्ट ने सुनवाई करके अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

ये हैं शेल्‍टर होम मामले के प्रमुख आरोपी
ब्रजेश ठाकुर: बालिका गृह का वास्तविक मालिक था और वही इसका संचालन करता था. वह एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति का कार्यपालक निदेशक था. इसी एनजीओ के माध्यम से बालिका गृह का संचालन होता था. उस पर बालिका गृह की लड़कियों के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया है.
शाइस्ता परवीन उर्फ मधु: यह ब्रजेश ठाकुर की खास राजदार थी और एनजीओ सेवा संकल्प और विकास समिति के प्रबंधन से जुड़ी थी. आरोप है कि वह लड़कियों को सेक्स की शिक्षा देती थी और गंदे गाने पर डांस करने को विवश करती थी. इससे मना करने वाली लड़कियों को सजा के तौर पर नमक रोटी खाने को दिया जाता था.
रवि कुमार रोशन: यह बाल संरक्षण पदाधिकारी (सीपीओ) था. ब्रजेश के साथ-साथ इस पर भी अधिकतर लड़कियों ने रेप का आरोप लगाया गया है. वह छोटे कपड़े में वल्गर गाने पर डांस करने के लिए लड़कियों को विवश करता था.

विकास कुमार: यह बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) का सदस्य था. उस पर भी लड़कियों ने रेप का आरोप लगाया. यह अन्य आरोपितों के साथ मिलकर लड़कियों को स्लीपिंग पिल्स देता था.

दिलीप कुमार वर्मा: यह बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) का अध्यक्ष था. लड़कियों ने उसकी पहचान फोटो से की. इसने उसे सबसे गंदा आदमी बताया. उस पर भी रेप का आरोप लगा है. यह ब्रजेश ठाकुर का खास था.

रोजी रानी: यह बाल संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक थी. आरोप है कि लड़कियों ने उसे सारी घटनाओं की जानकारी दी, लेकिन उसने कोई एक्शन नहीं लिया. उस पर आरोपितों को सहयोग करने का आरोप लगाया गया है.

डॉ. प्रमीला: यह बालिका गृह की लड़कियों की स्वास्थ्य जांच करती थी. लड़कियों ने उसे बताया कि ब्रजेश, रवि रोशन, विजय व विकास ने उसके साथ रेप किया है. इस पर उसने बस इतना कहा कि कोई बात नहीं तुम लोगों को दवा दे दूंगी. इसने पीड़िता की कोई मदद नहीं की.

रामाशंकर सिंह उर्फ मास्टर साहेब उर्फ मास्टर जी: यह ब्रजेश के पारिवारिक प्रेस का मैनेजर था. लड़कियों ने इसे गंदा आदमी बताया है. उसपर लड़कियों को गंदी नजर से देखने का आरोप है. रामाशंकर पर लड़कियों से साथ रेप और पिटाई करने का आरोप है.

डॉ. अश्वनी उर्फ आसमनी: बालिका गृह की लड़कियां इस डॉक्टर से काफी भयभीत रहती थीं. यह लड़कियों को ट्रैंक्यूलाइज्ड कर बेहोश करता था. यह अपने आला से लड़कियों को बिना कपड़े के जांच करता था.

विजय कुमार तिवारी, गुड्डू और कृष्णा राम: सभी ब्रजेश ठाकुर का नौकर था. सभी पर लड़कियों से रेप करने और पिटाई करने का आरोप लगाया गया है.

विक्की: मधु का भतीजा है. यह भी रात में बालिका गृह पहुंचता था. किशोरियों से यौन हिंसा करता था.

इंदू कुमारी, मीनू देवी, मंजू देवी, चंदा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, किरण कुमारी: सभी बालिका गृह की कर्मचारी थीं. इन सभी पर लड़कियों को नशे की दवाई देने, मारपीट करने के आरोप हैं. इनपर बालिका गृह की लड़कियों के साथ रेप करने वाले ब्रजेश, विकास, दिलीप, रवि रोशन और अन्य का सहयोग करने का भी आरोप है. एक महिला कर्मचारी पर लड़कियों से साथ आपत्तिजनक स्थिति में सोने का भी आरोप है. यह अन्य महिला कर्मचारियों के साथ मिलकर लड़कियों की पिटाई करती थी.

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First published: December 12, 2019, 5:16 AM IST
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