Bihar Election Result 2020 Live: नालंदा विधानसभा क्षेत्र से जेडीयू के श्रवण कुमार की जीत

Bihar Election Result: मंत्री श्रवण कुमार पिछले 25 साल से यहां का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं.
Bihar Election Result: मंत्री श्रवण कुमार पिछले 25 साल से यहां का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं.

Bihar Assembly Election Result 2020 Live Updates: नालंदा विधानसभा क्षेत्र (Nalanda Assembly Seat) से मंत्री श्रवण कुमार साल 1995 से जीतते आ रहे हैं.

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नालंदा. नालंदा विधानसभा सीट से जनता दल यूनाइटेड के श्रवण कुमार ने जनतांत्रिक विकास पार्टी के कौशलेंद्र कुमार को 16,077 मतों से हराया. बिहार का नालंदा विधानसभा क्षेत्र (Nalanda Assembly Seat) साल 1977 में बना, जहां से पहली बार कांग्रेस के श्यामसुंदर प्रसाद विधायक बने. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जनता पार्टी के कृष्णदेव प्रसाद को 1008 मतों से पराजित किया था. श्यामसुन्दर प्रसाद को 25907 वोट मिले थे, जबकि कृष्णदेव प्रसाद को 24899 मत प्राप्त हुए. 1980 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार रामनरेश सिंह ने कांग्रेस के सिटिंग विधयाक श्याम सुंदर प्रसाद को 12503 वोट से पराजित कर दिया. रामनरेश सिंह को 45547 वोट जबकि श्यामसुंदर प्रसाद को 33044 वोट मिले. लेकिन साल 1985 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी श्यामसुंदर प्रसाद ने निर्दलीय प्रत्याशी रामनरेश सिंह को 5066 वोटों से पराजित कर अपनी सीट वापस पा ली. तब श्यामसुंदर प्रसाद को 38818 जबकि रामनरेश सिंह को 33712 वोट प्राप्त हुए. साल 1990 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर रामनरेश सिंह ने जीत दर्ज की.

साल 1995 के चुनाव में नालंदा सीट नीतीश कुमार का जादू चला. समता पार्टी के टिकट पर श्रवण कुमार, जो बिहार सरकार में ग्रामीण विकास सह संसदीय कार्य मंत्री हैं, ने रामनरेश सिंह को मात देकर विजय हासिल की. जिसके बाद से वे लगातार यहां से चुनाव जीतते रहे हैं. हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में श्रवण कुमार को मात्र ढाई हजार वोट से जीत हासिल हुई. क्योंकि पिछले चुनाव में जदयू और भाजपा अलग होकर चुनाव लड़े थे. भाजपा के कौशलेंद्र कुमार ने पहले ही प्रयास में उन्हें जबदस्त टक्कर दिया था.

ये है जातीय समीकरण



नालंदा विधानसभा क्षेत्र कुर्मी बहुल क्षेत्र है. इसके अलावा यहां एससी-एसटी, अति पिछड़ा,अल्पसंख्यक समुदाय का भी अच्छी खासी आबादी है. यहां कुल वोटरों की संख्या 2 लाख 97 हजार के करीब है. जिसमें कोचईसा कुर्मी 90 हजार, घमयला कुर्मी 12 हजार, कुशवाहा 13 हजार,अल्पसंख्यक 22 हजार, भूमिहार 7 हजार, राजपूत 15 हजार एवं यादव 30 हजार के करीब हैं. जबकि अतिपिछड़ा और एससी-एसटी की आबादी एक लाख से अधिक है.
क्या मंत्री श्रवण कुमार फिर से मार पाएंगे बाजी  

नालंदा सीट पर जीत-हार कुशवाहा और घमयला कुर्मी वोटर्स तय करते हैं. जिनके तरफ इन दोनों जातियों के वोटर्स का झुकाव होता है, उसी जीत पक्की मानी जाती है. हालांकि इस बार स्थिति कुछ साफ नहीं दिख रही है. वर्तमान विधायक मंत्री श्रवण कुमार की जीत पर संशय के बादल नजर आ रहे हैं. क्योंकि पिछले चुनाव तक जितनी मजबूत पकड़ नीतीश कुमार का नालंदा के सभी विधानसभा सीटों पर था. वो अब ढीली पड़ती नजर आ रही है. लोगों में नीतीश सरकार के खिलाफ असंतोष देखा जा रहा है.

भौगोलिक स्थिति एवं समस्याएं

नालंदा विधानसभा क्षेत्र में राजगीर, सिलाव, वेन, बिहारशरीफ एवं नूरसराय प्रखंड पड़ते हैं. यहां कुल मतदाता की संख्या 2,97,846 है. बूथों की कुल संख्या 298 है. बिहारशरीफ प्रखंड में कुशवाहा जाति के वोटरों की बहुलता है. नालंदा विधानसभा क्षेत्र में किसानों के सामने भूजल की समस्या सबसे बढ़ी चुनौती है. इस क्षेत्र के अधिकांश गांवों में सिंचाई का मुख्य साधन पैमार और पंचाने नदी है. लेकिन जनप्रतिनिधियों एवं सरकार के द्वारा इस नदी का जीर्णोदार नहीं किये जाने से नदी लगभग सूख चुकी है. दोनों नदियों का गाद निकालने एवं दूसरे नदी से जोड़ने के लिये किसानों के द्वारा बार-बार मांग होती रही है. लेकिन ये अभी तक संभव नहीं हो सका है. हर खेत पानी और बिजली योजना यहां दम तोड़ती नजर आ रही है. शौचालय योजना का भी बुरा हाल है.

मंत्री श्रवण कुमार के लिए आसान नहीं रास्ता 

इस बार वर्तमान विधायक श्रवण कुमार का रास्ता कांटों भरा दिख रहा है. अभी तक नीतीश कुमार के नाम पर उन्हें कुर्मी जाति का वोट मिलता रहा है और उनकी जीत होती रही है. लेकिन इस बार कुर्मी जाति खासकर कोचईसा कुर्मी नीतीश सरकार से नाखुश नजर आ रहे है. सिंचाई की समस्या दूर नहीं होने के चलते किसान भी सरकार से नाराज चल रहे हैं.
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