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13 साल पहले सड़क बनाने में लगे करोड़ों रुपए, अब कोर्ट ने बताया निजी संपत्ति

रास्ता जिसे कोर्ट ने निजी संपत्ति बताया

रास्ता जिसे कोर्ट ने निजी संपत्ति बताया

बिहारशरीफ शहर के रामचंद्रपुर मछली मंडी के समीप आनंद मार्ग को जिला प्रशासन ने बन्द किये जाने का आदेश दिया तो लोग उग्र हो गये और सड़क पर प्रदर्शन करने लगे.

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13 साल पहले उस सड़क को बनाने में करोड़ो रुपये की राशि लगी थी. सड़क बनने से न केवल लोगों को आने जाने में सुविधा होती थी बल्कि जल निकासी की समस्या भी खत्म हो गई थी लेकिन कोर्ट का जो फैसला आया वो सच में चौंकाने वाला था. कोर्ट के एक फैसले ने नेशनल हाईवे से नालंदा के बिहारशरीफ के एक हिस्से को जोड़ने वाले रास्ते को निजी संपति बताया और फिर 13 सालों से लोगों की आवाजाही का रास्ता किसी की निजी संपत्ति बन गया.

मामला बिहार के नालंदा जिले का है जहां बिहारशरीफ की एक सड़क को 13 साल बाद कोर्ट ने निजी संपत्ति करार दिया है. बिहारशरीफ शहर के रामचंद्रपुर मछली मंडी के समीप आनंद मार्ग को जिला प्रशासन ने बन्द किये जाने का आदेश दिया तो लोग उग्र हो गये और सड़क पर प्रदर्शन करने लगे. जानकारी के मुताबिक लगभग 300 मीटर लंबी ये सड़क शहर के एक भाग को पटना-रांची एनएच 31 से जोड़ती है. इस सड़क का निर्माण 13 साल पहले पूर्व डीएम आनंद किशोर के कार्यकाल में शहरवासियों की आवागमन और पानी की निकासी की सुविधा के लिए करोड़ो रूपये से कराया गया था.

सड़क के साथ इसी जमीन पर नाले का भी निर्माण कार्य कराया था जिसके बाद वहां के एक स्थानीय ने पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करते हुए सड़क की जमीन को अपना बताया था. इस केस में याचिकाकर्ता ने कोर्ट से दखल दिलाने का आदेश प्राप्त कर लिया लेकिन लोगों का आरोप है कि ये भू-माफिया की करतूत है. स्थानीय लोग कोर्ट के इस फैसले का लगातार विरोध कर रहे हैं.



इनपुट- अभिषेक कुमार
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