बिहार के इस गांव का सरकार को अल्टीमेटम, पुल और सड़क नहीं बनाया तो.....
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बिहार के इस गांव का सरकार को अल्टीमेटम, पुल और सड़क नहीं बनाया तो.....
ग्रामीणों ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया है.

ग्रामीणों ने सरकार पर अनदेखी करने का आरोप लगाया है. उनका साफ कहना है कि इस बार भी अगर सरकार समय रहते यहां पुल और सड़क नहीं बनाते तो हम वोट का बहिष्कार करेंगे.

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नालंदा. आजादी (Independence) के सालों बीत जाने के बाद भी बिहार का एक गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से कोसो दूर है. 15 सालों के विकास कार्यों की पोल खोलने के लिए बस इस गांव की एक तस्वीर ही काफी है. सीएम नीतीश कुमार ने अपने 15 सालों के शासनकाल के दौरान पूरे बिहार (Bihar) में विकास करने के कई दावे जरूर किए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखाई देती है. वहीं, उनके पैतृक गांव कल्याण बीघा से महज ढाई किलोमीटर दूरी पर स्थित चंडी प्रखंड के घोरहरी गांव में आज भी सहूलियतों की दरकार है.

दरअसल, यह गांव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैतृक गांव कल्याण विगहा से महज ढाई किलोमीटर दूर पर बसा हुआ है. यहां की आबादी आठ सौ से अधिक है. फिर भी इस गांव के ग्रामीण चार फीट के पगडंडियों और चंदा कर बास से बनाए गए चचरी पुल के सहारे जीवन व्यतीत कर रहे हैं. यह गांव हरनौत विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है और इस क्षेत्र के विधायक पूर्व शिक्षा मंत्री हरिनारायण सिंह हैं.

एंबुलेंस तक नहीं आ सकती



विकास कुमार, अभिमन्यु कुमार, सालो देवी समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव में आज भी किसी की तबियत खराब हुई तो इलाज के लिए यहां एम्बुलेंस नहीं आ सकती है. इतना ही नहीं इसी मुहाने नदी में मौत की खौफनाक मंजर के सहारे ही खाट पर टांग कर मौत की चचरी पुल और पगडंडियों के सहारे मुख्यालय तक इलाज के लिए जाना पड़ता है. इसके साथ ही इस गांव के छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए दूसरी जगह जाना पड़ता है. सुविधा नहीं होने के बाद कुछ बच्चे बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देते हैं.
सरकार पर अनदेखी का आरोप

ग्रामीणों विकास कुमार और अभिमन्यु कुमार ने सरकार और स्थानीय विधायक हरिनारायण सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कहा कि हम लोग बार-बार कभी मुख्यमंत्री से तो कभी स्थानीय विधायक से यहां पुल और सड़क की मांग कर चुके हैं, लेकिन 50 वर्ष से अधिक बीत गये फिर भी पूर्व की सरकार हो या फिर वर्तमान सरकार हो यहां पुल व सड़क नहीं दे पाया. इसका नतीजा है कि हम लोग ने अंत में थक हार कर पिछले कई चुनावों में वोट बहिष्कार करने का काम कर रहे हैं. इसके साथ ही इस बार भी अगर सरकार समय रहते यहां पुल और सड़क नहीं देते हैं तो हम लोग वोट का बहिष्कार करेंगे. इतना ही नहीं ग्रामीणों ने कहा कि यहां राजनीतिक कारणों से इस गांव के साथ सरकार भेदभाव कर रही है.

 

 
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