पिता को कंधे पर ले जाना पड़ा 7 साल के बेटे का शव, डीएम ने पूछा ऐसा क्यों हुआ

मृतक नालंदा जिले के परवलपुर का सागर सीता बिगहा का रहने वाला था. वह अपने गांव में ही साइकिल चलाते हुए अचानक बेहोश हो गया. इसके बाद उसके परिजनों ने निजी क्लिनिक में भर्ती करवाया, लेकिन उसे सदर अस्पताल बिहारशरीफ रेफर कर दिया गया.

News18 Bihar
Updated: June 25, 2019, 6:37 PM IST
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Updated: June 25, 2019, 6:37 PM IST
स्वास्थ्य क्षेत्र में खस्ताहाली के सवालों से जूझ रही बिहार सरकार के लिए एक और शर्मिंदगी की खबर सामने आई है. यहां नालंदा जिले में अस्पताल प्रशासन ने एक पिता को शव वाहन उपलब्ध नहीं करवाया, इस कारण उन्हें मृतक पुत्र का शव कंधे पर रखकर ही वापस घर ले जाना पड़ा.

बताया जा रहा है कि मृतक नालंदा जिले के परवलपुर के सागर सीता बिगहा का रहने वाला था. वह अपने गांव में ही साइकिल चलाते हुए अचानक बेहोश हो गया. इसके बाद उसके परिजनों ने निजी क्लिनिक में भर्ती करवाया, लेकिन उसे सदर अस्पताल बिहारशरीफ रेफर कर दिया गया. अस्पताल पहुंचने पर सदर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

पिता को कंधे पर रखकर ले जाना पड़ा शव
बताया जा रहा है कि इस दौरान बिहारशरीफ सदर अस्पताल प्रशासन ने उन्हें शव वाहन उपलब्ध नहीं करवाया.  इस स्थिति में पिता को अपने सात साल के बेटे का शव कंधे पर रखकर अस्पताल से निकलना पड़ा और पिता को अपने बच्चे का शव कंधे पर रखकर बाइक से घर वापस जाना पड़ा.

जरूरतमंदों को नहीं दिए जाते शव वाहन
गौरतलब है कि जिले के सदर अस्पताल को एक शव वाहन मिला हुआ है, लेकिन ऐसी मुश्किल परिस्थितियों में लोगों को शव वाहन नहीं दिया जाता है जबकि किसी भी मृतक के लिए यह सुविधा  उपलब्ध है.

डीएम ने लिया मामले का संज्ञान
जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने मामले का संज्ञान लिया है और सिविल सर्जन परमानंद चौधरी से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है. डीएम ने यह सवाल उठाया है कि आखिर शव वाहन रहते हुए भी जरुरतमंदों को शव वाहन क्यों नहीं दिए जाते?

रिपोर्ट- अभिषेक कुमार
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