लाइव टीवी

बिहार हिंसा: रामनवमी की रथ-यात्रा पर आखिर भीड़ कैसे भटक गई रास्ता?

News18.com
Updated: April 2, 2018, 7:48 PM IST
बिहार हिंसा: रामनवमी की रथ-यात्रा पर आखिर भीड़ कैसे भटक गई रास्ता?
नालंदा के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमें शक है कि हो सकता है इस मामले में पहले से प्लानिंग या प्री-प्लॉटिंग की गई हो.

नालंदा के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमें शक है कि हो सकता है इस मामले में पहले से प्लानिंग या प्री-प्लॉटिंग की गई हो.

  • News18.com
  • Last Updated: April 2, 2018, 7:48 PM IST
  • Share this:
28 मार्च को 12.30 बजे का समय था. पांच हिन्दू और पांच मुस्लिम राम नवमी के रथ को बिहार शरीफ से 20 किलोमीटर दूर सिलाऊ शहर में घुमाने के लिए तैयार थे. ये यात्रा कराडिह से शुरू होकर ब्लॉक ऑफिस में खत्म होने वाली थी. 10 लोगों के साथ इंस्पेक्टर जनरल राजेश कुमार, जिला अधिकारी और जिला प्रशासन के कुछ अन्य लोग शामिल थे.

समस्या तब खड़ी हुई जब इस यात्रा में 10 लोगों के ही शामिल होने के नियम को तोड़ा गया. कराडिह गांव के लोग भीड़ के साथ यात्रा में शामिल होने लगे और देखते ही देखते 10 लोगों की यात्रा में 3000 की भीड़ इकट्ठी हो गई और तो और भीड़ में सबके हाथ में हथियार नज़र आए. पुलिस कांस्टेबल ने बताया कि किसी के हाथ में तलवार, किसी के हाथ में लाठी और चाकू नज़र आए. जैसे ही भीड़ "जय श्रीराम" का नारा लगाती थी सारे लोग अपने हथियारों को प्रणाम करते थे.

कुछ हथियार विक्रेताओं ने न्यूज़18 को बताया कि रामनवमी के समय अचानक से तलवार, लाठी, चाकू और दूसरे हथियारों की डिमांड बढ़ जाती है इससे पहले पूरे साल कभी भी इस तरह थोक में ऑर्डर नहीं मिलते हैं.

नालंदा के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया, "गुनहगारों को पकड़ने के उद्देश्य से हम इस मामले की तहकीकात कर रहे हैं. इन 5 दिनों की तहकीकात में हमें शक है कि हो सकता है इस मामले में पहले से प्लानिंग या प्री-प्लॉटिंग की गई हो. लेकिन अभी हम आपको को कुछ नहीं बता सकते."

लगभग दो घंटो तक यात्रा चलने के बाद हथियारों से लैस भीड़ मुस्लिम बहुल इलाके हैदरगंज में प्रवेश करती है. सांप्रदायिक तनाव होने के शक में पुलिस ने पहले से ही पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर रखी थी. लेकिन ये नाकाफी साबित हुआ. एक पुलिस कांस्टेबल ने बताया "भीड़ के वहां पहुंचते ही कुछ असामाजिक तत्व इस मुस्लिम इलाके में घुसने के लिए पुलिस की घेराबंदी को तोड़ने की कोशिश करने लगे. हमने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की. लेकिन वो लोग दूसरी कम्युनिटी के लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने लगे. लेकिन भीड़ तब तक काबू में थी जब तक बजरंग दल के नेताओं ने वहां कदम नहीं नहीं रखा था."

लोकल रिपोर्टर्स ने न्यूज़18 को बताया कि असामाजिक तत्वों को रोकने के चक्कर में एक सीनियर अधिकारी ने बजरंग दल के नेता को थप्पड़ मार दिया जिसके बाद पथराव शुरू हो गया. इसमें मुस्लिम कम्युनिटी के कुछ लोगों को भी चोट आई. उसके बाद दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला करना शुरू कर दिया और हालात बेकाबू हो गए. भीड़ ने श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन को भी जबरदस्ती रोक दिया और पत्थरबाजी करके ट्रेन के शीशे भी तोड़ने की कोशिश की. पुलिस ने बताया कि सौभाग्य से ट्रेन में ज्यादा लोग नहीं थे और हम ट्रेन को वहां से निकालने में कामयाब हो गए. पुलिस ने हवा में तकरीबन 10 बार गोलियां चलाई और आंसू गैस के गोले भी छोड़े.

इस मामले में दर्ज एफआईआर में प्री-प्लानिंग करने वाले 72 लोगों के नाम हैं. इसमें सिर्फ तीन मुस्लिम नामों के साथ बाकी हिन्दू नाम शामिल हैं साथ ही तीन हिन्दू महिलाओं के नाम भी हैं. नालंदा पुलिस से इन सब पर इंडियन पीनल कोड की 14 धाराएं लगाई हैं.रामनवमी सेलिब्रेशन के एक सप्ताह पहले ही नालंदा के डीएम डॉ त्यागराजन एसएम ने शांति के लिए हिन्दू-मुस्लिम समुदायों के बीच एक मीटिंग बुलाई थी और नियम के मुताबिक पिछले साल की तरह इस साल भी उसी रूट से यात्रा निकालने की योजना बनाई गई थी. डीएम ऑफिस के एक अधिकारी ने बताया कि बीजेपी और बजरंग दल के नेता रोज़ यहां आकर डीएम से यात्रा का रूट बदलने का निवेदन करते थे  उनके मुताबिक नए रूट से यात्रा निकालने पर ज्यादा से ज्यादा लोग यात्रा को देख सकेंगे. डीएम ने इस निवेदन के लिए कमिटी बनाने की बात कही.

अधिकारियों ने न्यूज़ 18 को बताया कि डीएम ने पांच हिन्दू और पांच मुस्लिम लोगों की कमिटी बनाई जिसने रामनवमी सेलिब्रेशन के लिए नए रूट की मांग पर हामी भरी. मीटिंग में एसपी और डीएम भी शामिल हुए और ये भी तय किया गया कि सिर्फ यही दस लोग रामनवमी की यात्रा में शामिल रहेंगे. और दूसरी तरफ बजरंग दल नेताओं ने लोगों के बीच भगवा रंग की बनियान बांट दी.

एफआईआर के मुताबिक लोकल बीजेपी नेता नित्यानंद सिंह, और बजरंग दल के धीरज कुमार और कुंदन कुमार मुख्य आरोपी हैं. यात्रा में हिस्सा लेने वाले एक शख्स ने बताया कि हैदरगंज में घुसते ही उन लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए जिसमें कोई बुराई नहीं है क्योंकि वो हमारा दुश्मन देश है और उसे कोसने में कोई हर्ज़ नहीं है.

इस मामले में अभी तक 37 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. सिलाऊ के दुकानदारों ने पिछले पांच दिनों से अपनी दुकानें बंद कर रखी हैं. एक दुकानदार ने बताया कि कुछ पता नहीं पुलिस कब किसे गिरफ्तार कर ले. बेनाम एफआईआर का फायदा उठाते हुए पुलिस अपनी मर्जी से गिरफ्तारी कर रही है. इसीलिए हम दुकान नहीं खोलेंगे.

किसी वजह से पुलिस सिर्फ हिन्दुओं को गिरफ्तार कर रही है और मुस्लिम खुले में घूम रहे हैं. दुकानदार कह रहे हैं कि हम तब तक दुकानें नहीं खोलेंगे जब तक पुलिस बेगुनाहों को गिरफ्तार करना बंद नहीं करती.

सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार ने कहा कि हम बेगुनाह लोगों को क्यों पकड़ेंगे? किसी को भी डरने की ज़रूरत नहीं है. बिहार में भड़के इन दंगों से बिहार के कई जिले जैसे औरंगाबाद, मुंगेर, सिवान और समस्तीपुर प्रभावित हुए हैं.

ये भी पढ़ेंः
आसनसोल हिंसा: पश्चिम बंगाल सरकार को NHRC का नोटिस, मामले की हो जल्द जांच
हिंदू महिला ने दंगाइयों से बचाई 10 की जान


 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नालंदा से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 2, 2018, 5:20 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर