नीतीश कुमार: कल्याण बिगहा के मुन्ना से बिहार के CM तक कुछ ऐसा रहा है सफर

फिल्म 3 इडियट्स की तरह कॉलेज में नीतीश कुमार, नरेन्द्र कुमार और अरुण सिन्हा का एक ग्रुप था. ये ग्रुप अपनी अटूट दोस्ती के लिए जाना जाता था.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: May 9, 2019, 2:43 PM IST
नीतीश कुमार: कल्याण बिगहा के मुन्ना से बिहार के CM तक कुछ ऐसा रहा है सफर
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: May 9, 2019, 2:43 PM IST
बहुत कम लोग जानते हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बचपन का नाम मुन्ना है. गांव-समाज के लोग उन्हें इसी नाम से जानते हैं. उनके गांव के बुजुर्ग लोगों में आज भी वे संस्मरण जीवित हैं, जब मुन्ना (नीतीश कुमार) के दोस्तों में आपस में बहस हो जाती थी तो वे एक पेड़ के नीचे बैठकर सारे मसले सुलझाते. दरअसल ये उनके भीतर पनप रहे नेतृत्व कौशल की पहली निशानी थी.

मैट्रिक की गणित परीक्षा की बात है, जब मुन्ना (नीतीश कुमार) अपना पेपर लिख ही रहा था कि परीक्षा समाप्ति की घंटी बज गई. टीचर ने उसके हाथों से पेपर छीन लिया. इस कारण वह गणित में 100 नहीं ला सके.



उनके साथी बताते हैं कि इस बात को उन्होंने कितनी गंभीरता से ली यह इस बात का सबूत है कि मुख्यमंत्री बनते ही नीतीश कुमार ने एक नियम लागू करवाया, जिसके तहत हर छात्र को परीक्षा के अंत में 15 मिनट अधिक विश्लेषण हेतु दिए जाएंगे.

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एक बार नीतीश अपने दोस्त सरोज के साथ स्टेशन पार करने के दौरान एक रुकी हुई ट्रेन के नीचे से ट्रैक क्रॉस कर रहे थे. तभी ट्रेन ने चलने का हॉर्न बजा दिया. वे दोस्त के साथ बच तो गए, लेकिन सीएम बनते ही उन्होंने रेलवे ट्रैक के ऊपर कई ओवरब्रिज बनवा दिए.

फिल्म 3 इडियट्स की तरह कॉलेज में नीतीश कुमार, नरेन्द्र कुमार और अरुण सिन्हा का एक ग्रुप था. ये ग्रुप अपनी अटूट दोस्ती के लिए जाना जाता था. दिलचस्प ये है कि इंजीनियर होने के बावजूद ये तीनों मित्र आज इंजीनियरिंग से परे कार्य कर रहे हैं.

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नीतीश कुमार बेहद सादगी से जीवन जीते हैं. जब वे नौजवान थे तब पटना में एक छोटे से कमरे में अपने एक मित्र के साथ रहते थे. वहां भी अपनी सारी ताकत समाज सेवा में लगा देते थे.

नीतीश कुमार शुरू से ही दहेज लेने-देने के विरोधी रहे हैं. अपनी शादी में भी उन्होंने 22,000 रुपयों को लेने से साफ़ इनकार कर दिया था और बगैर किसी ताम-झाम के कोर्ट मैरिज करने का फैसला लिया.

बिहार के पटना इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले नीतीश कुमार का जन्म साल 1951 में बिहार के एक सामान्य परिवार में हुआ था. उनके पिता एक स्वतंत्रता सेनानी थे.

नीतीश ने 22 फरवरी 1973 को पेमंजू कुमारी सिन्हा से शादी की थी. हालांकि अब वह इस दुनिया में नहीं हैं. उनका एक बेटा है जो बीआईटी से ग्रेजुएट है.

नीतीश कुमार अपनी पत्नी मंजू सिन्हा (दिवंगत) के साथ


नीतीश ने राजनीति के गुण जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर और जॉर्ज फर्नाडीज से सीखे थे.

उनका राजनीतिक जीवन भी कई दुरुह परिस्थितियों को साधते हुए आगे बढ़ा है. बिहार की बिगड़ी कानून-व्यवस्था को उन्होंने जिस काबिलियत के साथ कंट्रोल किया इससे उनके नाम के साथ 'सुशासन बाबू' का उपनाम जुड़ गया.

वर्ष 2000 से अब तक उन्होंने सात बार सीएम पद की शपथ ली है. तीन मार्च 2000 से 10 मार्च 2000 तक, 24 नवंबर 2005 से 24 नवंबर 2010 तक, 26 नवंबर 2010 से 19 मई 2014 तक, 22 फरवरी 2015 से 19 नवंबर 2015 और 20 नवंबर 2015 से 26 जुलाई 2017 और 27 जुलाई 2017 से अब तक.

नीतीश के राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 1977 में हुई थी. इस साल नीतीश ने जनता पार्टी के टिकट पर पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। साल 1985 को नीतीश बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए.

वर्ष 1987 में नीतीश कुमार बिहार के युवा लोकदल के अध्यक्ष बने और 1989 जनता दल के महासचिव. इसी वर्ष नीतीश 9वीं लोकसभा के लिए चुने गए. 1990 में नीतीश अप्रैल से नवंबर तक कृषि एवं सहकारी विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री रहे.

चौधरी देवीलाल के साथ लालू यादव और नीतीश कुमार (फाइल फोटो)


वर्ष 1991 में 10वीं लोकसभा में नीतीश एक बार फिर से संसद पहुंचे. इसी साल जनता दल के महासचिव बने और संसद में जनता दल के उपनेता भी बने. करीब दो साल बाद 1993 को नीतीश को कृषि समिति का चेयरमैन बनाया गया.

साल 1996 में नीतीश कुमार 11वीं लोकसभा के लिए चुने गए. 1996-98 तक रक्षा समिति के सदस्य भी रहे. 1998 में नीतीश फिर से 12वीं लोकसभा के लिए चुने गए. 1998-99 तक नीतीश कुमार केंद्रीय रेलवे मंत्री भी रहे.

वर्ष 1999 में वे 13वीं लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्रीय कृषि मंत्री बने. साल 2000 वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने. उनका कार्यकाल 3 मार्च 2000 से 10 मार्च 2000 तक ही चला पाया. हालांकि वे एक बार फिर से केंद्रीय कृषि मंत्री बन गए. साल 2001 में उन्हें रेलवे का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया.

शरद यादव, नीतीश कुमार और लालू यादव (पुरानी तस्वीर)


साल 2001 से 2004 तक नीतीश केंद्रीय रेलमंत्री रहे. 2004 में वे 14वीं लोकसभा के लिए चुने गए. साल 2005 में एक बार फिर से मुख्यमंत्री बने. उनका कार्यकाल 24 नवंबर 2005 से 24 नवंबर 2010 तक चला.

2010 में भी उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन कार्यकाल के पूरा होने के पहले ही 2014 के लोकसभा चुनाव में हुई करारी हार का जिम्मा लेते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया था.

इसके बाद जीतन राम मांझी को मुख्‍यमंत्री पद का कार्यभार दिया था. 22 फरवरी 2015 को उन्होंने एक बार फिर बिहार की कमान संभाली. फिर उन्होंने आरजेडी-कांग्रेस की सहायता से दो बार सरकार बनाई. अब वे 27 जुलाई 2017 से बीजेपी के साथ सरकार में हैं.

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