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बिहार: 1500 KM दूर जिंदगी की जंग लड़ रहा बीमार बेटा, याद में तड़प रहे माता-पिता
Nalanda News in Hindi

News18 Bihar
Updated: May 21, 2020, 8:46 PM IST
बिहार: 1500 KM दूर जिंदगी की जंग लड़ रहा बीमार बेटा, याद में तड़प रहे माता-पिता
हैदराबाद में बीमार पड़े बेटे को वापस लाना चाहते हैं नालंदा के ये माता-पिता.

नालंदा (Nalanda) का एक युवक हैदराबाद (Hyderabad) में रहकर मजदूरी कर रहा था. डेढ़ माह पूर्व वह अचानक बीमार पड़ गया. अब माता-पिता हैदराबाद अपने बेटे से मिलने जाना चाहते हैं, या फिर उसे वापस लाना चाहते हैं.

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नालंदा. लॉकडाउन (Lockdown) के कारण जहां लाखों लोगों की जान बची है, वहीं ये कोरोनाबंदी हजारों जिंदगियों पर भारी भी पड़ी है. ऐसी ही एक खबर बिहार के नालंदा से है. यहां राजगीर थाना क्षेत्र (Rajgir Police Station Area) के दांगी टोला में आर्थिक रूप से कमजोर व किराये के एक कमरे में रहनेवाले एक दंपती अपने गम्भीर रूप से बीमार पुत्र की घर वापसी नहीं होने के कारण पुत्रवियोग में दिनरात तड़प रही है. ये दंपती नालन्दा (Nalanda) जिला प्रशासन तो कभी एसडीएम कार्यालय का चक्कर काट काट कर परेशान है पर सुनवाई नहीं हो रही है.

कोरोनाबंदी में फंसकर रह गयी जिंदगी
दरअसल दांगी टोला निवासी मनोज राम का एक मात्र कमाऊ पुत्र सोनू कुमार हैदराबाद में रहकर मजदूरी कर रहा था. डेढ़ माह पूर्व वह अचानक बीमार पड़ गया. अब ये लोग हैदराबाद अपने बेटे से मिलने जाना चाहते हैं, या फिर उसे वापस लाना चाहते हैं. पर कोरोनाबंदी के कारण आवागमन बंद है. वहां इनके बीमार पुत्र का इलाज जैसे-तैसे हो रहा है, ऐसे में ये  सरकार से अपने बीमार बेटे को वापस लाने की गुहार लगा रहे हैं. पीड़ित रीता देवी ने न्यूज़ 18 के माध्यम से सरकार से गुहार लगाते हुए कहा कि उनके पति भी मानसिक रूप से कमजोर हैं ऐसे में उनकी सहायता की जाए.

जिंदगी और मौत की जंग



पीड़ित रीता देवी बताती हैं कि इसी बीमार बेटे की कमाई से बेटी की शादी के लिए पैसे इकट्ठे करने के साथ- साथ घर का सारा राशन चलता था. बीमार पुत्र के इलाज के लिए मैनें अपने पास बची सवा डिसमिल जमीन भी बेच दी. अब मेरे पास न तो इलाज के लिये पैसा है और न ही उसे वापस लाने के लिये कोई साधन.



पीड़ित मां कह रही हैं कि डॉक्टर ने भी जवाब दे दिया है कि अब हैदराबाद में इलाज संभव नहीं है. जिसके बाद मैं अपने बेटे को घर वापस लाना चाह रही हूं. लेकिन लॉकडाउन के चलते मजबूरी है. कहीं से कोई सहायता नहीं मिल रही है.

यह भी बताया जाता है कि मनोज राम का एक और भी पुत्र था. जो कि मानसिक रूप से विक्षिप्त था और दो साल पूर्व ही गुम हो गया. अपनी बहन की शादी के लिए हैदराबाद कमाई के लिए गया दूसरा बेटा भी बीमार है. घर की जमीन भी बिक गई और इधर पुत्र वियोग में मा-बाप की तड़प अब असहनीय हो रही है.  एक बेटे के गुमशुदगी के बाद वह  दूसरे बीमार बेटे खोना नहीं चाहती है.

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First published: May 21, 2020, 8:33 PM IST
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