नालंदा: किशोर न्याय बोर्ड ने 3 दिन में सुना दिया ये नजीरभरा फैसला, जानिए पूरा मामला

जेजेवी के प्रधान न्यायायिक दण्डाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा ने एक साथ तीन जिंदगियों को तबाह होने बचाने के लिए एक मामले में महज तीन दिनों में ही फैसला दे दिया.

जेजेवी के प्रधान न्यायायिक दण्डाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा ने एक साथ तीन जिंदगियों को तबाह होने बचाने के लिए एक मामले में महज तीन दिनों में ही फैसला दे दिया.

जेजेवी के प्रधान न्यायायिक दण्डाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा ने एक साथ तीन जिंदगियों को तबाह होने बचाने के लिए एक मामले में महज तीन दिनों में ही फैसला दे दिया. फैसले में नाबालिग किशोर को किशोरी को भगाकर शादी करने के मामले में राहत देते हुए रिहा कर दिया गया. दोनों नाबालिग की शादी के बाद एक बच्चा भी है.

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नालंदा. नालंदा (Nalanda) जिले के बिहारशरीफ कोर्ट (Bihar Sharif Court) से बड़ी खबर आई है. यहां जेजेबी के प्रधान न्यायायिक दण्डाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा (Manvendra Mishra) ने एक साथ तीन जिंदगियों को तबाह होने बचाने के लिए एक मामले में महज तीन दिनों में ही फैसला दे दिया. फैसले में नाबालिग किशोर को किशोरी को भगाकर शादी करने के मामले में राहत देते हुए रिहा कर दिया गया. दोनों नाबालिग की शादी के बाद एक बच्चा भी है, जिसे देखे न्यायायिक दंडाधिकारी ने सिर्फ तीन दिन में ही सुनवाई पूरी कर किशोर को इस मामले में रिहा किया है. फैसले में न्यायाधीश ने कहा कि सजा देने से तीन जिंदगियां बर्बाद हो सकती थीं.

दरअसल बिहारशरीफ में किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्रा के सामने 19 मार्च 2021 को यह मामला आया था. इस पर उन्होंने देरी करना उचित नहीं समझा. उन्होंने सोमवार को ही इस पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. बताया जा रहा है कि नाबालिग लडक़ी को भगा कर शादी करने और शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी किशोर के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य थे. बावजूद इसके उन्होंने नाबालिग होने के बाद भगाकर शादी करने और फिर एक छह माह के बच्चे के पिता बने किशोर को दोष मुक्त कर दिया. इसके साथ ही नाबालिग पति -पत्नी को साथ रहने का फैसला सुनाया, ताकि उनके छह माह के नवजात शिशु का पालन पोषण प्रभावित न हो. न्यायाधीश मानवेन्द्र मिश्रा ने कहा कि सजा देने से तीन नाबालिग जिंदगी प्रभावित हो सकती थीं.

हिलसा थाना क्षेत्र से भाग गए थे दोनों नाबालिग

यह पूरी घटना हिलसा थाना इलाके के एक गांव की है. जहां सरस्वती पूजा में शामिल होने गई किशोरी अपने प्रेमी के साथ फरार हो गयी थी. इसके बाद  किशोरी के पिता ने 11 फरवरी 2019 को गांव के ही एक किशोर पर अपहरण का मामला हिलसा थाने में दर्ज कराया था. गांव से भागकर दोनों दिल्ली चल गए थे. जहां आरोपी किशोर अपनी मौसी के यहां रह रहा था. इसी बीच उसे पता चला कि किशोरी के पिता ने थाने में मामला दर्ज कराया है . इसके बाद वह गांव लौट आया. गांव लौटने की सूचना मिलते ही पुलिस आरोपी किशोर को न्यायालय के सुपुर्द किया.
देश में पहली बार सुनाया गया महज तीन दिन में फैसला

जहां से उसे सेफ्टी होम शेखपुरा भेज दिया गया. अभी वह सेफ्टी होम में ही रह रहा है. पास्को कोर्ट से यह मामला 19 मार्च 21 को किशोर न्याय परिषद पहुंचा था. जहां तीन जिंदगियों को देखते हुए  महज तीन दिनों में ही जज मानवेंद्र मिश्र ने यह ऐतिहासिक फैसला सुना दिया. जबकि लडक़ी को भगाकर ले जाने और शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में किशोर को सजा हो सकती थी. किशोर न्याय परिषद के सदस्य अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि स्पीडी ट्रायल का यह सबसे कम दिनों में सुनाया गया फैसला है. बताया गया है कि अब तक भारत के किसी भी न्यायालय में तीन दिनों के भीतर फैसला नहीं सुनाया गया है.

सुना चुके हैं कई ऐतिहासिक फैसला



जज मानवेंद्र मिश्र अब तक कई ऐतिहासिक फैसले सुना चुके हैं. इसके पूर्व उन्होंने 26 फरवरी 21 को नूरसराय थाना इलाके के एक गांव का इसी तरह का फैसला सुनाया था. जबकि दारोगा और पुलिस में नौकरी लगने वाले आरोपी किशोर को आरोप से बरी कर दिए थे.
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