Nalanda : भारत-चीन विवाद के बीच शांति का संदेश दे रहा है यह दंपति
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Nalanda : भारत-चीन विवाद के बीच शांति का संदेश दे रहा है यह दंपति
बीजिंग की रहनेवालीं यिंन ह (दायें) और भारत के अरुण कुमार यादव के साथ बीच में है उनका बेटा मैत्रेय.

यिंन ह कहती हैं कि मैं भगवान बुद्ध को मानती हूं. भारत से ही शांति व अहिंसा का संदेश चीन में गया है. सांस्कृतिक और वैचारिक तौर पर चीन भारत के सबसे करीब है. एशिया की यह दोनों ताकतें अगर एक हो जाएं, तो विश्व का परिदृश्य ही बदल जाएगा.

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बिहारशरीफ. एक ओर गलवान घाटी (Galwan Valley) में चीन-भारत (China-India) के बीच तनाव के हालात हैं, तो दूसरी ओर भगवान बुद्ध की धरती नालंदा (Nalanda) में एक दंपति ऐसा है जो दोनों देशों के बीच मिठास लाने की संदेश दे रहा है. इस जोड़े में महिला चीन के बीजिंग की रहने वाली है जबकि पति उत्तर प्रदेश के वाराणसी का.

चीनी पत्नी और भारतीय पति 2016 से रह रहे हैं नालंदा में

बता दें कि चीन के बीजिंग की रहनेवालीं यिंन ह और भारत के उत्तर प्रदेश के वाराणसी के अरुण कुमार यादव ने वर्ष 2016 में एक-दूसरे से प्रेम विवाह किया था. इसके बाद से ये दोनों पति-पत्नी के रूप में नालंदा में रह रहे हैं. दरअसल, अरुण यादव नव नालन्दा महाविहार में रहकर नौकरी कर रहे हैं. बताया जाता है कि अरुण कुमार यादव नव नालंदा महाविहार में पालि भाषा के असिस्टेंट लेक्चरर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें वर्ष 2011-12 में इंडो-चाइनीज स्कॉलरशिप मिली थी. तब से वह चीन के विश्वविद्यालय में मंदारिन भाषा की पढ़ाई करने गए थे. वही बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई कर रहीं यिंन ह से इनकी मुलाकात हुई और फिर यह दोस्ती हुई. बाद के दिनों में यह दोस्ती प्यार में बदल गई. उसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया. फिर दोनों की रजामंदी से शादी भी हो गई.



इस जोड़े ने बेटे का नाम रखा मैत्रेय
बताया यह भी जाता है कि दोनों देशों के बीच शांति बढ़ाने के लिए अपने तीन साल के बेटे का नाम मैत्रेय रखा. ताकि दोनो देशों के बीच एक अच्छा माहौल बन सके और दोनों देशों के बीच शांति बहाल होकर विश्व में एक पड़ोसी देश होने का संदेश दे सके. यिंन ह ने बताया कि जिस दिन दोनों देशों के बीच बलवान घाटी में खून बहा, उस दिन वह फूट-फूटकर रोईं. उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके माता-पिता और सास-ससुर झगड़ रहे हो. वह कहती हैं कि यह मेरे लिए सदमे की तरह है. मैं भगवान बुद्ध को मानती हूं. भारत से ही शांति व अहिंसा का संदेश चीन में गया है. सांस्कृतिक और वैचारिक तौर पर चीन भारत के सबसे करीब है. एशिया की यह दोनों ताकतें अगर एक हो जाएं, तो विश्व का परिदृश्य ही बदल जाएगा.

बौद्ध लिटरेचर का अनुवाद करेंगी यिंन ह

इधर अरुण कुमार यादव को यह बात चुभ रही है कि प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग नालंदा विश्वविद्यालय से 637 पुस्तकों के रूप में बौद्ध लिटरेचर चीन ले गए थे. यिंन ह ने कहा कि डॉक्टरेट लेने के बाद पति संग मिलकर उन सभी पुस्तकों का हिंदी अनुवाद करूंगी, ताकि भारत का इतिहास पुनः पटरी पर लौट सके. फिलहाल अरुण कुमार यादव की पत्नी यिंन ह नव नालन्दा महाविहार में पालि विभाग में पीएचडी कर रही हैं.
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