लोकसभा चुनाव 2019: नीतीश ही तय करते हैं नालंदा की राजनीतिक दिशा, हैट्रिक लगाने की कोशिश में JDU

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद नालंदा से 2004 में सांसद चुने गए थे. 2009 और 2014 में यहां के मतदाताओं की कृपा JDU सांसद कौशलेंद्र कुमार पर बरस रही है.

News18 Bihar
Updated: May 18, 2019, 12:34 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019: नीतीश ही तय करते हैं नालंदा की राजनीतिक दिशा, हैट्रिक लगाने की कोशिश में JDU
महागठबंधन प्रत्याशी गले में माला डाले हुए जनसंपर्क करते.
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Updated: May 18, 2019, 12:34 PM IST
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला नालंदा बौद्ध, जैन, सनातन, सिख और इस्लाम सहित सभी धर्मों की आस्था की भूमि रही है. इसकी ऐतिहासिक और पौराणिक पहचान है. नालंदा को ज्ञान की भूमि कहा जाता है. यहां विश्व की सबसे प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष आज भी मौज़ूद हैं. जहां दूसरे देशों से छात्र पढ़ने के लिए आते थे. भगवान बुद्ध और महावीर नालन्दा में ठहरे थे. माना जाता है कि भगवान महावीर ने मोक्ष की प्राप्ति पावापुरी में की थी.

धर्म और आस्था की नगरी है नालंदा
प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग 7वीं शताब्दी में नालंदा आए थे और करीब एक साल तक यहां ठहरे थे. भगवान बुद्ध ने यहां उपदेश दिया था. प्रसिद्ध बौद्ध सारिपुत्र का जन्म यहीं पर हुआ था. नालंदा जिले के राजगीर में कई गर्म पानी के झरने हैं, बैद्ध स्तूप है. ये एक ऐसा जिला है जहां सभी धर्मों की आस्था जुड़ी हुई है. ये वही जगह है जहां से दुनिया भर में शिक्षा का अलख जगा.

कौन है प्रत्याशी नालंदा लोकसभा चुनाव 2019 के प्रत्याशी

इस बार नालंदा में बीजेपी व जनता दल यूनाइटेड के गठबंधन से जेडीयू के कौशलेंद्र और महागठबंधन से विकासशील पार्टी के अशोक कुमार आजाद चंद्रवंशी के बीच टक्कर है. यहां लोकसभा चुनाव के सातवें चरण में 19 मई को चुनाव होंगे.

नीतीश के इर्द-गिर्द घूमती नालंदा की राजनीति
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नालंदा के गौरव को वापस लौटाने की पूरी कोशिश की है. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते हुए नालंदा में कई विकास के काम हुए हैं, यही कारण है आज की तारीख में नालंदा की सियासत का मतलब नीतीश कुमार हैं. उन्होंने जिस पर हाथ रख दिया, जीत उसी की हुई. मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में 1996 से एक ही धुरी पर राजनीति का पहिया घूम रहा है, यहां किसी और की पैठ नहीं है.
भगवान महावीर की जन्मभूमि कुण्डलग्राम


1971 के बाद कमजोर होती गई कांग्रेस
भगवान बुद्ध की भूमि पर कांग्रेस की कहानी तो 1971 तक ही सुनी गई. उसके बाद भाकपा ने कुछ जोर जरूर लगाया लेकिन राजनीति में नीतीश के आने और छाने के बाद किसी की चाल काम नहीं आयी. नीतीश कुमार खुद भी यहां से 2004 में सांसद चुने गए थे. 2009 और 2014 में नालंदा के मतदाताओं की कृपा JDU सांसद कौशलेंद्र कुमार पर बरस रही है. दरअसल नालंदा के मतदाता सीधे मुख्यमंत्री को देखते हैं, प्रत्याशी को नहीं. तीन दशक का इतिहास बता रहा है कि JDU की ओर से मैदान में जो भी होगा, नालंदा के लोगों की पहली पसंद होगा.

एनडीए प्रत्याशी कौशलेंद्र (दाये) के प्रचार में चिराग पासवान बायें


इसबार कौशलेन्द्र की राह में रोड़े
नालंदा से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद एक बार लोकसभा पहुंच चुके हैं. यहां से सिद्धेश्वर प्रसाद, विजय कुमार यादव और जॉर्ज फर्नांडीज तीन-तीन बार चुने गए. JDU के वर्तमान सांसद कौशलेंद्र कुमार की दूसरी पारी है. और इस बार कैशलेन्द्र हैट्रिक लगाने की फिराक में हैं. लेकिन इस बार कौशलेन्द्र की राह में कई रोड़े हैं. एक तो महागठबंधन इस बार यहां से पूरी ताकत लगाकर लड़ने की फिराक में है तो वहीं सांसद के 10 साल के कार्यकाल को लेकर कुछ वोटर्स नाराज़ भी नज़र आ रहे हैं. उनकी शिकायत है कि सांसद जीतने के बाद कभी आए ही नहीं.

नालंदा जिले का प्रसिद्ध पांडु पोखर


22 लाख वोटर तय करेंगे जीत-हार
नालंदा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत अस्थावां, बिहारशरीफ, राजगीर, इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा और हरनौत समेत 7 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. यहां करीब 22 लाख वोटर हैं. 2014 के लोकसभा चुवाव में JDU के कौशलेन्द्र कुमार को 3 लाख 21 हजार 982 वोट मिले थे. जबकि NDA से LJP उम्मीदवार सत्यानंद शर्मा को 3 लाख 12 हजार 355 वोट मिले थे. कांटे की लड़ाई में कौशलेन्द्र कुमार 9,627 वोट से जीते थे.

जाति नहीं विकास देख रहे मतदाता
नालंदा जिले में कुर्मी जाति के वोटर की संख्या ज्यादा है. यादव, पासवान, कोईरी और मुस्लिम यहां के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. हालांकि इस बार यहां के युवा वोटर जात-पात नहीं विकास के नाम पर वोट करने की बात कह रहे हैं.

महागठबंधन प्रत्याशी अशोक कुमार आजाद


खेती अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार
नालंदा कृषि प्रधान जिला है. यहां के लोगों की आय का सबसे बड़ा स्रोत खेती है. नालंदा जिले के किसान आलू, सब्जी, धान, गेहूं और दलहन की खेती करते हैं. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद नालंदा जिले में कृषि क्रांति आयी. यहां के किसानों ने फसल उत्पादन को लेकर कई रिकॉर्ड बनाए. लेकिन कई इलाके अभी ऐसे हैं जहां किसानों को सरकारी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं.

सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर किसान
नालंदा जिले में अब तक सिंचाई की शत-प्रतिशत व्यवस्था नहीं हो पाई है. यही कारण है यहां के किसान खेती के लिए बारिश पर निर्भर हैं. साथ ही किसानों के सामने अपने उत्पाद को बेचने की भी बड़ी समस्या है. क्योंकि किसान बाज़ार गांव और कस्बों तक नहीं खुले हैं. किसान बिचौलियों के हाथों अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं.

नालंदा के प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेष


विकास की रफ्तार के बीच बढ़े अपराध
नालंदा जिले में विकास के तो कई काम हुए हैं. नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की सौगात मिली. इंजीनियरिंग कॉलेज खुला. सड़कों का जाल बिछा, लेकिन लोगों की शिकायत है कि राजगीर में डिग्री कॉलेज नहीं खुला. शहर में पीने के पानी की समस्या बरकरार है. जिले में सात निश्चय योजना रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है. जिले में हाल के दिनों में कई आपराधिक वारदातें हुईं हैं. जिले के महिलाओं की माने तो अब भी अफसरशाही हावी है.
पर्यटकों की पहली पसंद बना नालंदा
नालंदा का राजगीर अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल है. राजगीर और आस-पास के इलाके में काफी विकास भी हुआ है. सीएम के कई ड्रीम प्रोजेक्ट धरातल पर उतरे हैं. पर्यटन के लिहाज से नालंदा की देश ही नहीं दुनिया में अपनी पहचान है. राजगीर बिहार का महशूर पर्यटक स्थल है. यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ विकास को रफ्तार देने के लिए आयुध फैक्ट्री, रेल कोच फैक्ट्री, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर समेत कई ड्रीम प्रोजेक्ट धरातल पर उतारे गए.

सांसद से थोड़े नाराज हैं लोग
नालंदा लोकसभा क्षेत्र के सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने नांदन गांव को गोद लिया है. हालांकि यहां के लोग सांसद के काम से थोड़े नाराज़ हैं. लोगों की शिकायत थी कि गोद लेने के बाद सांसद गांव नहीं आए. कोई वादा पूरा नहीं किया. ग्रामीण, महिलाओं और हर आयु वर्ग के लोग बताते हैं कि नालंदा में इस बार विकास ही मुख्य मुद्दा है. यहां के लोग जात-पात से ऊपर उठकर इस बार वोट करने का मन बना चुके हैं.

पावापुरी का प्रसिद्ध जल मंदिर


सांसद ने किया विकास का दावा
हालांकि सांसद कौशलेन्द्र दावा कर रहे हैं कि उन्होंने अपने 5 साल के कार्यकाल के दौरान इलाके में रोजगार सृजन की कोशिश की. 7 से 8 हजार लोगों को रोजगार मिला. संसद निधि से जो राशि मिली उसे खर्च किया, लेकिन वो इस बात को भी स्वीकार कर रहे हैं कि नौकरशाही और पंचायत प्रतिनिधियों की आपसी लड़ाई से कुछ जगहों पर विकास के काम प्रभावित हुए हैं.

क्या हैट्रिक लगा पाएंगे कौशलन्द्र कुमार?
सांसद कौशलेन्द्र कुमार की कोशिशों से नालंदा में सिंचाई के क्षेत्र में सुधार हुआ है. सांसद ने अपने कोष से विकास कार्यों पर राशि खर्च की है. हालांकि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण नहीं हो पाया है. कुछ जगहों पर विकास योजनाओं की रफ्तार धीमी है. अब देखना है इस बार कौशलेन्द्र कुमार विकास के वादे के साथ क्या जीत की हैट्रिक लगा पाते हैं.

रिपोर्ट- आनंद अमृतराज/अभिषेक कुमार

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