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एक तालाब ने सिखाया गरीबी से उबरने का गुर तो मिसाल बन गई नालंदा की रिंकू

News18 Bihar
Updated: November 18, 2019, 9:02 PM IST
एक तालाब ने सिखाया गरीबी से उबरने का गुर तो मिसाल बन गई नालंदा की रिंकू
नालंदा की रिंकू देवी ने आत्मनिर्भर होकर महिलाओं के लिए पेश की मिसाल.

बिहार (Bihar) के नालंदा (Nalanda) जिले की एक महिला ने मछली पालन (Fisheries Industry) और पशुपालन व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनने का तरीका ढूंढा तो अपने आसपास के लोगों के लिए मिसाल (Success Icon) बन गई.

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अभिषेक कुमार

नालंदा. गरीबी (Poverty) और आर्थिक तंगी लोगों को मजबूर भले कर देती हो, लेकिन उन्हें जीने की राह भी दिखाती है. कुछ ऐसी ही कहानी है नालंदा (Nalanda) जिले के मिर्जापुर गांव की रहने वाली रिंकू देवी की. सामान्य रूप से पढ़ी-लिखी रिंकू देवी ने आत्मनिर्भर (Self Dependent) होने का ऐसा तरीका ढूंढा कि अब वह दूसरे लोगों के लिए मिसाल बन गई हैं. जी हां, रिंकू देवी के घर की हालत ऐसी नहीं थी कि उसके पति और वह दोनों मिलकर परिवार का भरण-पोषण कर सकें. इसलिए रिंकू देवी ने अपनी जमीन पड़ोसियों को देकर उनसे एक जगह पर ऐसी भूमि ले ली, जिस पर तालाब (Pond) बन सके. इस तालाब के बनने के बाद रिंकू देवी ने पहले मछली पालन (Fisheries) फिर मुर्गी पालन, मधुमक्खी और बकरी पालन जैसा व्यवसाय शुरू कर आज खुद को आत्मनिर्भर बना लिया है. अब उनकी सालाना (Annual Income) कमाई ढाई से तीन लाख रुपए हो गई है.

ससुरालवालों से जमीन बदलने से हुई शुरुआत
नालंदा जिले के परवलपुर प्रखंड के मिर्जापुर गांव की रिंकू देवी ने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे थे. घर की आमदनी इतनी भी नहीं थी कि परिवार सुखीपूर्वक रह सके. ऐसे में करीब 10 साल पहले वह नेहरू युवा केंद्र से जुड़ीं. यहां से उन्होंने आत्मनिर्भर होने का गुर सीखा. इसके बाद घर की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए उन्होंने ससुराल में अपने पड़ोसियों के सामने जमीन बदलने का प्रस्ताव रखा. इसके तहत रिंकू देवी ने अपनी जमीन अलग-अलग लोगों को देकर उनसे एक जगह पर इकट्ठी डेढ़ एकड़ जमीन ले ली. यहां उन्होंने एक तालाब खुदवाया और उसमें मछली पालन शुरू कर दिया. तालाब के पानी में जहां मछलियां पलती थीं, वहीं उसकी मेड़ पर पपीता के पौधे लगे थे और मधुमक्खी पालन का व्यवसाय भी शुरू कर दिया गया था.

मछली पालन से यूं आगे बढ़ी जिंदगी
मछली पालन व्यवसाय से रिंकू के घर की आमदनी में सुधार आया, लेकिन अभी वह खुश नहीं थी. वर्ष 2009 से 2012 के बीच उन्होंने पूरी तरह प्रशिक्षित होकर कई और व्यवसाय करने की योजना बनाई. पति और बच्चों ने साथ दिया तो नागपुर से गव्य विकास, आंध्रप्रदेश से मछली पालन, पटना में कुक्कुट-बकरी पालन और नालंदा के हरनौत में मधुमक्खी पालन का बाकायदा प्रशिक्षण लिया. इसके बाद रिंकू देवी को फिर पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी. बाद के दिनों में उन्हें बैंक से लोन भी मिला और व्यवसाय आगे बढ़ा तो घर की माली हालत भी सुधर गई. आज वह सालाना ढाई से तीन लाख रुपए अर्जित करने वाली सफल व्यवसायी बन चुकी हैं. तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रही हैं. साथ ही मिर्जापुर और आसपास के इलाके में आत्मनिर्भर महिला के तौर पर जानी जाती हैं.

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First published: November 18, 2019, 9:02 PM IST
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