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CM नीतीश कुमार के पैतृक प्रखंड में ही गिरी जल नल योजना की टंकी, 8 महीने पहले हुआ था निर्माण

बिहार के नालंदा में जमीन पर गिरी पानी की टंकी
बिहार के नालंदा में जमीन पर गिरी पानी की टंकी

Nalanda News: बिहार के नालंदा में पानी की टंकी गिरने की खबर से अधिकारियों के हाथ-पैर फुल गए. इस मामले की जानकारी मिलते ही जूनियर इंजीनियर घटनास्थल पर जांच के लिए पहुंचे.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: February 22, 2021, 12:14 PM IST
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नालंदा. एक तरफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) नल जल योजना को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर रहे हैं तो दूसरी ओर उनके ही पैतृक प्रखंड में नल जल योजना (Nal Jal Scheme) निर्माण के कुछ ही दिन बाद ही पानी की टंकी धराशाई होकर जमीन पर आ गिरी. यह पूरा मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जिले नालन्दा (Nalanda) के हरनौत प्रखंड क्षेत्र के बस्ती गांव के वार्ड नंबर 3 का है.

स्थानीय ठेकेदार ने कराया था निर्माण

यहां स्थानीय निवासी और संवेदक राजू कुमार सिंह द्वारा पीएचईडी विभाग से नल जल योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण कराया गया था जो आठ महीने में ही धराशाई होकर नीचे गिर गया. ग्रामीणों का कहना है कि घटिया निर्माण कार्य के कारण यह टंकी ज्यादा दिन तक नहीं टिक सका है.



पानी के लिए लोगों को करना होगा इंतजार
पानी टंकी गिरने की घटना के बाद लोगों को पीने के पानी के लिए लंबे दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है. पानी टंकी धराशायी होने की सूचना मिलते ही प्रशासन भी मामले की जांच में जुट गया है साथ ही पीएचईडी विभाग की टीम घटनास्थल के लिए रवाना हो गई है. पीएचइडी के जेई अभय कुमार सिंह ने बताया कि इस पानी टंकी का निर्माण कार्य आठ महीने पहले कराया गया था, जहां बीती रात कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा टंकी का नट बोल्ट के साथ छेड़छाड़ किया होगा तभी यह नीचे आकर गिरा है.

जांच के लिए पहुंचे जेई

उन्होंने साफ कहा कि संवेदक भी उसी गांव का रहने वाला है और कहीं ना कहीं आपसी मामले को लेकर इस तरह की करतूतों को अंजाम दिया गया है. जेई ने कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है उसके बाद ही मामले पर कार्रवाई की जाएगी.

नालन्दा में कई पानी टंकी हो चुके हैं ध्वस्त

सबसे बड़ी बात यह है कि जिले के हरनौत प्रखंड के ही मूढाड़ी, सिलाव के दो पंचायत के अलावा कई ऐसे गावो में पानी टंकी है जो पूर्व में भी धराशाई हो चुके हैं लेकिन सिर्फ जांच के नाम पर जिला प्रशासन खानापूर्ति कर मामले को टालमटोल कर देता है, इसके कारण इनलोगों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है.
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