Rajauli Election Result Live: राजद के प्रकाश वीर ने बीजेपी के कन्हैया कुमार को 12593 वोट से हराया

Rajauli Chunav Result: 25 सितंबर तक रजौली विधानसभा क्षेत्र में सर्विस मतदाताओं की संख्या सहित कुल 3 लाख 29 हजार 785 है
Rajauli Chunav Result: 25 सितंबर तक रजौली विधानसभा क्षेत्र में सर्विस मतदाताओं की संख्या सहित कुल 3 लाख 29 हजार 785 है

Rajauli Bihar Vidhan Sabha Chunav Result 2020 Live: राजद के प्रकाश वीर (Prakash Veer) और भाजपा के कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) के बीच नज़दीकी मुकाबला देखने को मिला. राजद के प्रकाश वीर ने बीजेपी के कन्हैया कुमार को 12593 वोट से हरा दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 2:08 AM IST
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नवादा. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Vidhan Sabha election) के मतगणना में रजौली विधानसभा सीट (Rajauli Vidhan Sabha constituency) पर राजद के प्रकाश वीर (Prakash Veer) और भाजपा के कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) के बीच नज़दीकी मुकाबला देखने को मिला. राजद के प्रकाश वीर ने बीजेपी के कन्हैया कुमार को 12593 वोट से हरा दिया. नवादा (Nawada) ज़िले के रजौली विधानसभा क्षेत्र का अपना एक पौराणिक धार्मिक महत्व है. रजौली की दक्षिणी पहाड़ियों को सप्तऋषियों का स्थान कहा जाता है.यहां पहाड़ियों का नाम प्रचीन ऋषियों के नाम पर है जैसे, श्रृंग ऋषि पहाड़, दुर्वासा पहाड़ी, लोमस पहाड़ी, गौतम पहाड़ी आदि. यहां की पहाड़ियों का संबंध रामायण काल से जुड़ा हुआ है. इसी विधानसभा क्षेत्र में माता सीता की निर्वासन स्थली भी है जिसे सीतामढ़ी के नाम से जाना जाता है. यहां गुरुनानक देवजी (Gurunanak dev) के पुत्र श्रीचंद्र ने एक उदासीन सम्प्रदाय की स्थापना की थी जिसे रजौली संगत के नाम से जाना जाता है.

ये है इसका राजनीतिक इतिहास
इस धार्मिक स्थली के नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण इसका विकास ठीक से नहीं हो पाया है. 2011 की जनगणना के अनुसार रजौली विधानसभा क्षेत्र की कुल आबादी 4 लाख 39 हजार 056 है. आजादी के बाद पहली बार 1952-57 में विधानसभा चुनाव हुए थे उस वक्त नवादा गया जिला के अधीन हुआ करता था. उस वक्त रजोली सह वजीरगंज से 1952-57 में राधाकृष्ण प्रसाद सिंह और रजौली सह वजीरगंज (अ.जा) महावीर चौधरी विधानसभा चुनाव जीते थे. दोनों ही सीट पर कांग्रेस पार्टी का कब्जा रहा. इस सीट पर सर्वाधिक बार कांग्रेस का कब्जा रहा है. लेकिन 1952 में इस सीट पर कांग्रेस की जीत का जो सिलसिला शुरू हुआ वो 1969-72 के विधानसभा चुनाव में आकर थम गया. इस चुनाव में जनसंघ के प्रत्याशी बाबूलाल ने जीत हासिल की थी. 1977-1980 में बाबूलाल निर्दलीय चुनाव लड़कर विजय हुए. लेकिन उसके बाद से एकबार फिर कांग्रेस इस सीट पर 1980-85 में जीत करने में कामयाब रही बस उसके बाद फिर कभी कांग्रेस यहां नहीं लौटी.

लालू का विजय रथ
1990-95 में लालू यादव की सरकार तो बनी लेकिन इस सीट पर बीजेपी को आने से नहीं रोक सकी और यह सीट पर पहलीबार बीजेपी ने जीत ली.लेकिन बीजेपी इस सीट को बरकरार नहीं रख पाई. 1995-2005 में लालू यादव की तत्कालीन पार्टी जनता दल और उसके बाद राष्ट्रीय जनता दल ने इस सीट पर कब्जा जमाए रखा. 10 साल बाद एकबार फिर जेडीयू-बीजेपी गठबंधन ने इस सीट पर कब्जा जमाने में कामयाबी हासिल की. 2015 के चुनाव में एकबार फिर बीजेपी को यह सीट गंवानी पड़ी और राजद के प्रकाशवीर 2015 में विजयी हुए. इस बार भी उन्हें राजद से टिकट मिला है. 70 साल में इस सीट से कई दलों से विधायक बने पर किसी को मंत्री पद प्राप्त करने का सौभाग्य नहीं मिला.



कब किस दल का रहा कब्जा
रजौली विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 7 बार कांग्रेस पार्टी के विधायक रहे हैं. रजौली विधानसभा में 17 विधायक हुए हैं. इसमें,सबसे ज्यादा 4-4 बार बनवारी राम और बाबूलाल ने यहां का प्रतिनिधित्व किया. 2 बार लगातार कांग्रेस के रामस्वरूप प्रसाद सिंह यादव और 1-1 बार महावीर चौधरी, राधाकृष्ण प्रसाद सिंह यादव, शांति देवी, राजाराम पासवान, नन्दकिशोर चौधरी, कन्हैया कुमार, प्रकाशवीर ने प्रतिनिधित्व किया.

प्रत्याशी का नाम
1952-57
महावीरचौधरी(SC)
कांग्रेस

1952-57
राधाकृष्ण प्रा.सिंह यादव
कांग्रेस

1957-62
रामस्वरूप प्रा. सिंह यादव
कांग्रेस

1962-67
रामस्वरूप प्रा.सिंह यादव
कांग्रेस

1967-69
शांति देवी
कांग्रेस

1969-72
बाबूलाल
जनसंघ

1972-77
बनवारी राम
कांग्रेस

1977-80
बाबूलाल
निर्दलीय

1980-85
बनवारी रास
कांग्रेस(आई)

1985-90
बनवारी राम
निर्दलीय

1990-95
बाबूलाल
बीजेपी

1995-2000
बाबूलाल
जनता दल

2000-2005
राजाराम पासवान
राजद

2005-05(मई) नंदकिशोर चौधरी
राजद

2005-10
बनवारी राम
बीजेपी

2010-15
कन्हैया कुमार
बीजेपी

2015-20
प्रकाशवीर
राजद

कौन सा मुद्दा जो पड़ रहा है भारी
-रजौली को नगर पंचायत बनाने की मांग काफी समय से होती रही है. इस बार भी यह मुद्दा हावी रहेगा. डिग्री कॉलेज की मांग का मुद्दा भारी पड़ सकता है.अगर एनडीए प्रत्याशी जीत हासिल करने में कामयाब होते हैं तो उसमें सबसे बड़ा मुद्दा बहुउद्देशीय जलापूर्ति केन्द्र का होगा. रजौली अनुमंडल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा बेहतर करने की मांग भी बरसों से पेंडिंग है. अगर महागठबंधन के प्रत्याशी यह सीट जितते हैं तो जाति समीकरण और रोजगार का मुद्दा अहम होगा.

विकास बनाम जाति की सियासत
रजौली विधानसभा क्षेत्र (अ.जा) क्षेत्र है और नक्सल प्रभावित इलाकों में से एक है. यहां जाति के साथ-साथ विकास का मुद्दा हमेशा अहम रहा. अगर बात नीतीश सरकार के 15 साल की करें तो यहां 2005 से 2015 तक बीजेपी का कब्जा रहा. लेकिन पार्टी ने अचानक अपने सिटिंग विधायक कन्हैया कुमार का टिकट काटकर बाहरी व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया. लेकिन बीजेपी के इस प्रयोग को स्थानीय मतदाताओं ने नकार दिया.दूसरा कारण यह भी रहा कि, जिस जदयू-बीजेपी सरकार को लोग विकास के नाम पर वोट किया करते थे वो वोट नीतीश के महागठबंधन में चले आने से बंट गया. अब जब एकबार फिर पुराने राजनीतिक सहयोगी एक साथ आये हैं. तो फिर नीतीश सरकार द्वारा किए गए कार्य के कारण लोग वोट कर सकते हैं.

15 साल नीतीश सरकार में कितनी बदली तस्वीर
बिजली:- आजादी के बाद से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे जंगल की ओर बसे भानेखाप, चौरडीहा गांव के लोगों तक बिजली,पानी और सड़क पहुंचना नीतीश के 15 साल के कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि है. अगर लालू सरकार के 15 साल और नीतीश कुमार के 15 साल के कार्यकाल की तुलना करें तो नीतीश सरकार के दौरान रजौली विधान सभा में काफी काम हुए हैं.जहां बिजली के लिए लोग तरसते थे वहां घर-घर बिजली 20 घंटे पहुंच रही है. लाखों लोगों तक पानी के लिए बहुउद्देशीय जलापूर्ति योजना की शुरुआत होना, फुलवरिया डैम से भानेखाप, चोरडीहा तक दुर्लभ रास्ते में सड़क, रजौली में अनुमंडल अस्पताल, रजिस्ट्री ऑफिस की शुरुआत, नर्सिंग ट्रेनिंग स्कूल, हेल्थ एन्ड वेलनेस सेंटर, कुछ जगहों पर छोड़कर अधिकतर गांव में नल से जल पहुंचाना, पुरानी रजौली से सिमरकोल तक धनार्जय पर पुल निर्माण, छपनी गांव से धमनी गांव के बीच पुल, खतांगी पंचायत में दो पुल का निर्माण, भव्य अनुमंडल कार्यालय का निर्माण, बुनियाद केंद्र जैसी सुविधाएं मिलने से रजौली की तस्वीर काफी बदली है.

कुल मतदाता
25 सितंबर तक रजौली विधानसभा क्षेत्र में सर्विस मतदाताओं की संख्या सहित कुल 3 लाख 29 हजार 785 है. इसमें, पुरुष मतदाता 1 लाख 69 हजार 848, महिला मतदाता 1 लाख 59 हजार 359, थर्ड जेंडर 22 और सर्विस मतदाता 486 हैं.
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