Bihar Election : नवादा : सूबे की इस VIP सीट पर रहता है दो परिवारों का कब्ज़ा

यहां से राजवल्लभ के परिवार के किसी सदस्य और कौशल यादव को छोड़ अन्य को टिकट मिलने की संभावना नगण्य है.
यहां से राजवल्लभ के परिवार के किसी सदस्य और कौशल यादव को छोड़ अन्य को टिकट मिलने की संभावना नगण्य है.

अगर राजद (RJD) और जदयू (JDU) को यह सीट मिलती है तो उनके प्रत्याशी तय हैं, लेकिन महागठबंधन में रहने वाली अन्य पार्टियों को यह सीट जाती है तो चुनाव रोचक होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 29, 2020, 1:06 PM IST
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नवादा.सूबे की वीआईपी सीटों में शुमार नवादा विधानसभा सीट (Assembly Seat) पर तीन दशक से पूर्व विधायक राजवल्लभ यादव और वर्तमान विधायक कौशल यादव के परिवारों का ही कब्जा है.अगर हम कहें कि दो परिवारों का नवादा (nawada) सीट पर कब्जा तो गलत नहीं होगा. आंकड़े बताते हैं कि इन्हीं दो परिवार के सदस्यों का नवादा विधानसभा क्षेत्र पर कब्जा रहा है. लेकिन अबकी बार इनके विजय रथ को रोकने के लिए कई सियासी पार्टियों की नजर इस सीट पर टिकी है. कई निर्दलीय भी अपनी किस्मत आजमाने के लिए आगे आ रहे हैं.

अगर राजद और जदयू को यह सीट मिलती है तो उनके प्रत्याशी तय हैं, लेकिन महागठबंधन में रहने वाली अन्य पार्टियों को यह सीट जाती है तो चुनाव रोचक होगा. हालांकि यहां से राजवल्लभ के परिवार के किसी सदस्य और कौशल यादव को छोड़ अन्य को टिकट मिलने की संभावना नगण्य है.

निवर्तमान विधायक कौशल यादव




सीट का राजनीतिक इतिहास
नवादा विधानसभा क्षेत्र से सन् 1990 में कृष्णा प्रसाद ने भाजपा से चुनाव जीता था. बाद में वह राजद में शामिल हो गए. 1992 में सड़क हादसे में उनकी मौत के बाद छोटे भाई राजवल्लभ यादव ने उनकी विरासत को संभाला. 1995 में निर्दलीय और 2000 में राजद से उन्होंने चुनाव जीता.लालू सरकार में वह श्रम राज्य मंत्री भी बने. इसके बावजूद अगले तीन चुनाव में उन्हें पूर्णिमा यादव से शिकस्त मिली. 2015 में जदयू-राजद और कांग्रेस के महागठबंधन में राजवल्लभ फिर चुनाव जीते. उन्होंने एनडीए उम्मीदवार आरएलएसपी के इंद्रदेव कुशवाहा को मात दी. लेकिन 2016 में नाबालिग रेपकांड में राजवल्लभ के फंसने के बाद सूबे सहित देशभर में चर्चा में आ गए. 2018 में उम्रकैद की सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता रद्द हो गई.

क्या परिवार से बाहर निकलेगी राजनीति
सदस्यता रद्द होते ही वर्ष 2019 में नवादा लोकसभा चुनाव के साथ नवादा विधानसभा का उपचुनाव भी हुआ. एनडीए उम्मीदवार जदयू से कौशल यादव 53546 वोट पाकर निर्दलीय प्रत्याशी श्रवण कुशवाहा से दस हजार वोट से जीते. दूसरे नंबर पर रहने वाले कुशवाहा को 42593 मत प्राप्त हुए, जबकि महागठबंधन से हम पार्टी के उम्मीदवार रहे धीरेंद्र कुमार मुन्ना तीसरे स्थान पर रहे. उन्हें 36143 वोट मिले. जिला परिषद उपाध्यक्ष और निर्दलीय प्रत्याशी गीता देवी 16650 मत प्राप्त कर चौथे स्थान पर रहीं. इससे पहले कौशल यादव तीन बार गोविंदपुर विधानसभा से भी विधायक रह चुके हैं.

सबकी नज़र है
नवादा विधानसभा क्षेत्र से 2015 में 12 और 2019 में हुए उपचुनाव में 8 प्रत्याशी मैदान में थे. इस चुनाव में बड़ी बात यह थी कि तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार थे, जबकि चौथे नंबर पर नोटा.नवादा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में एक ही जाति के दो क्षत्रप राजवल्लभ और कौशल यादव आमने-सामने रहे हैं. यही नहीं ये दोनों ही एक-दूसरे की हार-जीत का कारण भी बनते हैं. इन सबके बीच इस बार अन्य पार्टियों की नजर भी इस सीट पर टिकी है. नवादा लोकसभा क्षेत्र से चंदन सिंह के सांसद बनने के बाद लोजपा भी अपनी दावेदारी मजबूत बना रही है. वहीं भाजपा, हम, कांग्रेस सहित कुछ छोटी पार्टियां भी अपनी चाल चलने में पीछे नहीं हैं. इनके अलावा कई निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी समर में कूदने के लिए तैयार हैं.

मतदाताओं का आंकड़ा
नवादा विधानसभा सीट पर कुल 3,45,010 मतदाता हैं. इनमें पुरुषों की संख्या 1,78, 564 और महिला मतदाता 16,64,37 हैं.
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