Warisaliganj Election Result Live: वारिसलीगंज से भाजपा की अरुणा देवी ने कांग्रेस के सतीश कुमार को 9,030 वोट से हराया

Warisaliganj Chunav Result: वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र में कुल 345219 मतदाता हैं.
Warisaliganj Chunav Result: वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र में कुल 345219 मतदाता हैं.

Warisaliganj Bihar Vidhan Sabha Chunav Result 2020 Live: भाजपा की अरुणा देवी (Aruna Devi) ने कांग्रेस के सतीश कुमार (Satish Kumar) को 9,030 वोट से हराया. अरुणा देवी को 61,906 वोट मिले तो सतीश कुमार को 52,833 वोट मिले.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: November 11, 2020, 12:26 AM IST
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नवादा. वारिसलीगंज विधानसभा सीट (Warisaliganj Vidhan Sabha constituency) पर भाजपा की अरुणा देवी (Aruna Devi) ने कांग्रेस के सतीश कुमार (Satish Kumar) को 9,030 वोट से हराया. अरुणा देवी को 61,906 वोट मिले तो सतीश कुमार को 52,833 वोट मिले. नवादा (Nawada) ज़िले के वारिसलीगंज के चुनावी समर में कास्ट फैक्टर अहम है. इस विधानसभा क्षेत्र को भूमिहार बहुल माना जाता है. दूसरे नंबर पर यादव और तीसरे नंबर पर कुर्मियों की संख्या है. अन्य पिछड़ी जातियों और मुस्लिम वोटरों (Muslim Voters) की संख्या भी अच्छी खासी है. यही कारण है कि इस सीट पर कई दिग्गजों की नजर टिकी थी. एनडीए और महागठबंधन के संभावित उम्मीदवार टिकट के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते रहे. कई उम्मीदवारों ने तो पटना से लेकर दिल्ली दरबार तक में अपनी दस्तक दी. चुनावी अखाड़े में विरोधियों की हर चाल को नाकाम करने के लिए सभी ने अपनी तैयारी बहुत पहले शुरू कर दी थी.

इनमें हैं मुकाबला
वारिसलीगंज से भाजपा ने निवर्तमान विधायिका अरुणा देवी को टिकट दिया था वहीं कांग्रेस ने नवादा कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश कुमार उर्फ मंटन सिंह को इस बार टिकट दिया था. इन दोनों का खेल बिगाड़ने के लिए वारिसलीगंज के पूर्व विधायक प्रदीप महतो की पत्नी आरती सिन्हा निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरी थीं. मुख्य रूप से इन्हीं तीनों के बीच मुकाबला है.

अरुणा देवी





सियासी ज़मीन
नवादा जिले के वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र की सियासी जमीन राजद को छोड़ सभी पार्टियों के लिए अच्छी साबित हुई है. आजादी के बाद इस विधानसभा क्षेत्र से सबसे अधिक कांग्रेस ने छह बार चुनाव जीता है. सीपीआई के खिलाड़ी चुनाव मैदान में तीन बार विरोधियों को हरा चुके हैं.कांग्रेस और सीपीआई का गढ़ रही इस सीट पर पहली बार चुनाव होने के छह दशक बाद जदयू और भाजपा ने जीत का स्वाद चखा. 2010 में जदयू और 2015 में भाजपा के उम्मीदवार ने विपक्ष के पहलवानों को पटखनी दी. लोजपा ने भी यहां से एक बार जीत का स्वाद चखा है.

सीट का सियासी इतिहास
देश की आजादी के बाद पहली बार 1951 में वारिसलीगंज विधानसभा सीट के लिए चुनाव हुआ. उस समय कांग्रेस के चेतू राम यहां से विधायक बने. 1959 और 1962 में कांग्रेस के ही रामकिशुन सिंह ने विजय पताका फहरायी, लेकिन 1967 में यहां वाम दल की एंट्री हुई. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के डी. प्रसाद ने आर के सिंह को सात हजार वोटों से हराकर कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगा दी. डी. प्रसाद को 20006 तो आर के सिंह को 13295 वोट मिले. 1969 में सीपीआई के ही देव नंदन प्रसाद ने बीजेएस के रामरतन सिंह को साढ़े पांच हजार वोटों से हराकर दूसरी बार किले पर फतह पाई. हालांकि 1972 के चुनाव में बाजी पलटी और एनसीओ के श्याम सुंदर प्रसाद सिंह ने सीपीआई के देवनंदन प्रसाद को पांच हजार वोटों से मात दे दी. 1977 में जेएनपी के रामरतन सिंह ने सीपीआई के देवनंदन प्रसाद को छह हजार वोटों से शिकस्त दी.

6 बार कांग्रेस जीती
वारिसलीगंज में 1980 में कांग्रेस की वापसी हुई. बंदीशंकर ने सीपीआई के देवनंदन प्रसाद को 12 हजार वोटों से हराया. 1985 में वह फिर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और निर्दलीय उम्मीदवार चंदेश्वर सिंह को 43 हजार वोटों से करारी शिकस्त दी. हालांकि अगले चुनाव में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा. 1990 में सीपीआई ने वापसी की और देव नंदन प्रसाद ने निर्दलीय उम्मीदवार बंदी शंकर सिंह को चार हजार वोटों से मात दी. 1995 में कांग्रेस के रामआश्रय प्रसाद सिंह ने सीपीआई के केदार प्रसाद को 12 हजार वोट से हराया. हालांकि पिछले 25 साल से यहां कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका है.

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तीन बार विधायक बनीं अरुणा देवी
वारिसलीगंज के सियासी दंगल में 2000 में अरुणा देवी की एंट्री हुई. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार बनकर राजद के मनीलाल प्रसाद को 45 हजार वोटों से करारी शिकस्त देकर राजनीतिक पंडितों के सारे समीकरण ध्वस्त कर दिए. फरवरी 2005 का चुनाव वह लोजपा के टिकट पर लड़ीं और जीतीं भी, लेकिन अक्टूबर 2005 में उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी प्रदीप महतो से मात्र 555 वोटों से हार का सामना करना पड़ा. 2010 के चुनाव में दोनों फिर आमने सामने रहे. अरुणा देवी कांग्रेस तो प्रदीप महतो जदयू के टिकट पर चुनावी अखाड़े में थे. बाजी प्रदीप महतो के हाथ लगी. वही अरुणा देवी को छह हजार वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार विधायक बने. 2015 में एनडीए से भाजपा के टिकट पर अरुणा देवी चुनाव लड़ीं और महागठबंधन से जदयू के प्रदीप महतो को 19 हजार वोटों से हराकर वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र में पहली बार कमल खिलाया.
वारिसलीगंज के अब तक के विधायक
1951 : चेतू राम, कांग्रेस
1959 : रामकिशुन सिंह, कांग्रेस
1962 : राम किशुन सिंह, कांग्रेस
1967 : डी. प्रसाद, सीपीआई
1969 : देव नंदन प्रसाद, सीपीआई
1972 : श्याम सुंदर प्रसाद सिंह, एनसीओ
1977 : राम रतन सिंह, जेएनपी
1980 : बंदी शंकर सिंह, कांग्रेस
1985 : बंदी शंकर सिंह, कांग्रेस
1990 : देव नंदन प्रसाद, सीपीआई
1995 : रामआश्रय प्रसाद सिंह, कांग्रेस
2000 : अरुणा देवी, निर्दलीय
2005 (फरवरी) : अरुणा देवी, लोजपा
2005 (अक्टूबर): प्रदीप कुमार, निर्दलीय
2010 : प्रदीप कुमार, जदयू
2015 : अरुणा देवी, भाजपा

विधानसभा क्षेत्र----- वारिसलीगंज
कुल जनसंख्या : 611856
कुल मतदाता : 345219
पुरुष मतदाता : 179922
महिला मतदाता : 165278
थर्ड जेंडर : 19
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