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father sold land for son to prepare for upsc civil services 2021 in nawada son got 364th rank nodaa

नवादा : जमीन बेचकर सुनी जमीर की बात, बेटे आलोक रंजन ने यूपीएससी में पाई 346वीं रैंक

आलोक रंजन के घर पर खुशियों के पल.

आलोक रंजन के घर पर खुशियों के पल.

Rank Holder of UPSC: नवादा के आलोक रंजन ने अपने 7वें अटेंप्ट में यूपीएससी क्लियर कर लिया. उसे 346वीं रैंक मिली है. मूल रूप से नवादा के रोह प्रखंड के गोरिहारी गांव के रहने वाले नरेश प्रसाद यादव और सुशीला देवी का बेटा है आलोक रंजन. माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई जारी रखने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन तक बेच डाली. पढ़िए, आलोक रंजन और उसके परिवार के संघर्ष की कहानी.

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नवादा. यूपीएससी निकालना जरा भी आसान बात नहीं है और तब तो और भी नहीं जब हालात आपके खिलाफ हों. लेकिन कहते हैं कि अगर ठान लिया जाए तो फिर रास्ते के पहाड़ राई हो जाते हैं और आप राई से पहाड़ बन जाते हैं. आज नवादा के एक ऐसे ही एक शख्स की कहानी आपके लिए लेकर आए हैं, जिसने खुद को राई से पहाड़ बनाया और रास्ते की पहाड़ जैसी बाधाओं को लांघ गया. नवादा के इस शख्स का नाम है आलोक रंजन. उसने यूपीएससी की परीक्षा में 346वीं रैंक पाई है.

मूल रूप से नवादा के रोह प्रखंड के गोरिहारी गांव के रहने वाले नरेश प्रसाद यादव और सुशीला देवी का बेटा है आलोक रंजन. अपने बेटे की उपलब्धि पर मां-बाप खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं. उनकी आंखें छलक रही हैं. बस, थरथराते होठ से वे इतना ही कह पा रहे हैं कि बेटे की मेहनत का नतीजा है सब, हम बहुत खुश हैं.

सही तालीम से कुछ भी मुमकिन : पिता

इन छलकती आंखों और थरथराते होठों के पीछे दुख, अवसाद, हताशा, निराशा और परिश्रम, धैर्य की एक लंबी कहानी है. स्थिर होने के बाद आलोक के पिता नरेश प्रसाद यादव ने कहा कि हमने शुरू में ही ठान लिया था. माली हालत कमजोर होने के बाद भी सोच लिया था कि अपनी किसी भी एक संतान को यूपीएससी की तैयारी जरूर करवाएंगे. बगल में बैठी पत्नी सुशीला देवी की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि इसने भी खूब तकलीफें उठाईं. हम दोनों शिक्षक हैं. जानते हैं कि सही तालीम से कुछ भी मुमकिन है. इसलिए इस पढ़ाई के रास्ते में पैसे की बाधा को हर हाल में लांघते गए. जितना बन पड़ा सब करते चले गए.

तंगी में बेची जमीन, जारी रखी बेटे की पढ़ाई : मां

आलोक की मां सुशीला देवी कहती हैं कि हम किराए के घर में आज भी हैं, चाहते तो अपना घर बनवाया जा सकता था. हमने अपनी पुश्तैनी जमीन का एक बड़ा हिस्सा बेच दिया. लेकिन उससे आए पैसे का इस्तेमाल घर बनवाने में नहीं किया, बल्कि बेटे के करियर में लगा दिया. बाद में पैसे की फिर तंगी हुई तो नवादा की एक कीमती जमीन बेची. उससे आए पैसे भी बेटे की पढ़ाई में खर्चे. आप समझ सकते हैं कि यह पूरे परिवार का त्याग है और इसी का नतीजा है कि आज पूरा गांव खुश है. भगवान ने हम सबकी आरजू सुन ली. देखिए न, गांव में ढोल बज रहे हैं.

माता-पिता ने खुद पढ़ाया : बेटा

इसी ढोल-नगाड़ों की उल्लास भरी आवाज के बीच भीगे गले से आलोक कहते हैं कि मेरे माता-पिता दोनों शिक्षक हैं. पांचवी तक उन्होंने ही हमें गांव में रखकर पढ़ाया. फिर हमें पढ़ाने के लिए नवादा ले आए. नवादा के जेडीपीएस से 10वीं की परीक्षा पास की. फिर उन्होंने हमें दिल्ली भेज दिया, यहां के इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग करने के बाद यूपीएससी की तैयारी में जुट गया. 2015 से मैं यूपीएससी की तैयारी में जुटा रहा. अपनी 7वीं कोशिश में 346वीं रैंक हासिल कर पाया. लेकिन यह सच है कि पहले की छह कोशिशों में नाकाम होने के बाद भी कभी मां-पिताजी ने उलाहना नहीं दिया, बल्कि हमेशा उत्साह बढ़ाया. आज उसी उत्साह का नतीजा है कि घर-परिवार और मेरे गांव के लोग पूरे उत्साह में हैं.

Tags: Bihar News, Nawada news, UPSC results

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