Lockdon 3.0: कोरोना काल में शहनाई रही खामोश, शादी से जुड़े कारोबार ठप
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Lockdon 3.0: कोरोना काल में शहनाई रही खामोश, शादी से जुड़े कारोबार ठप
शादियों से जुड़े कारोबार ठप हो गए

बिहार के नवादा में लॉक डाउन (Lockdown) वन से लेकर लॉक डाउन थ्री तक कई शादियां (Marriage) रद्द कर दी गईं. लिहाजा शादी से जुड़े हर व्यापार के लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा.

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नवादा. कोरोना महामारी के दौरान लग्न से जुड़े व्यापार (Marriage Related Business) पर व्यापक असर पड़ा है. लॉक डाउन-1 से लेकर लॉक डाउन-3 तक कई शादियां रद्द (Mariage) कर दी गई हैं. कुछ लोग सोशल डिस्टें​सिंग (Distancing) का पालन करते हुए इस महामारी के दौरान शादी करने में सफल भी रहे हैं. लिहाजा शादी से जुड़े कारोबार से संबंधित लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इन व्यापारों में एक महत्वपूर्ण काम है शहनाई वादन का है, जो इस इस पूरे कोरोना काल के दौरान खामोश रहा है.

मैरिज हॉल, फूल वाले हैं परेशान

कोरोना महामारी के दौरान हर वर्ग के लोग प्रभावित हुए हैं. हर तरह के छोटे और बड़े व्यापारी व्यापारी वर्ग बहुत परेशान हैं. सभी वर्ग पर कोरोना पर बहुत बुरा असर डाला है. मैरिज हॉल, फूल सजावट, हलवाई, बैंड बाजे का रोजगार करने वालों की स्थिति बहुत खराब है. लग्न का मौसम होने के बावजूद एक भी शादी समारोह आयोजित नही हो पा रहा है. लिहाजा इसके कारोबार से जुड़े लोग भी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. कुछ लोगों ने शादियां जरूर की मगर नियम और शर्तों के साथ. शादियों में कानों को मधुरता प्रदान करने वाली शहनाई भी कोरोना काल में खामोश है. नवादा के ननौरा गांव में कुछ ऐसे ही इक्के दुक्के शहनाई वादक हैं जो जिले में बजाने के साथ साथ कई अन्य राज्यों में जाकर शादी के मौके पर शहनाई बजाते थे. इस समय वे बेरोजगार हो गए हैं.



एक कार्यक्रम में मिलते हैं पांच हजार रुपये
ननौरा गांव के शहनाई वादक अमीरका दास एवं उनके भाई राजेन्द्र रविदास मुख्य रूप से लग्न पूजा में शहनाई और ढोल बजाते हैं. इस कोरोना के कारण उनकी शहनाई शांत है. पहले से बुक किये गए सभी कार्यक्रम रद्द हो गए. उन्हीं की मंडली में शामिल ननौरा गांव के ही शहनाई वादक विशेश्वर रविदास भी आजकल खाली बैठे हुए हैं.

लग्न की कमाई से चलता है इनका घर

शहनाई वादक बताते हैं कि इसी लग्न में कमाए गए पैसे से उनके साल भर का खर्चा निकलता है, मगर आजकल सभी सट्टे रद्द हो जाने के कारण वे कुछ भी कमा पाने में असमर्थ हैं. एक लग्न में लगभग 10 से 15 कार्यक्रमों का काम उन्हें मिल जाता था. एक शादी में शहनाई बजाने का पांच हज़ार तक मिलता है. इन शहनाई वादकों को कमाई का कोई अन्य जरिया न हो पाने के कारण अपना जीविकोपार्जन करना मुश्किल हो रहा है. ये सभी लोग सरकार से मांग कर रहे है कि उन्हें कुछ आर्थिक मदद मिलनी चाहिए ताकि उनका जीवन आगे बढ़ सके.

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