Bihar: Quarantine सेंटर पर मिलने पहुंच रहे परिजन, ब्रेकफास्ट-लंच भी साथ ला रहे
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Bihar: Quarantine सेंटर पर मिलने पहुंच रहे परिजन, ब्रेकफास्ट-लंच भी साथ ला रहे
नवादा जिले के क्वारंटीन सेंटरों पर मिलने पहुंच रहे परिजन

नवादा जिले के तकरीबन सभी क्वारन्टीन सेंटरों (Quarantine Centres) में प्रवासी मजदूरों के परिजन उनसे मिलने के लिए पहुंच रहे हैं. परिजन मुलाकात के दौरान घर से बना खाना भी ला रहे हैं

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नवादा. बिहार के नवादा में इन दिनों क्वारंटीन सेंटरों (Quarantine Centres) के समीप एक अजीब सा दृश्य देखने को मिल रहा है. क्वारन्टीन सेंटरों में रह रहे लोगों से इन दिनों जेल में रह रहे कैदियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है. जिले के तकरीबन सभी क्वारन्टीन सेंटरों में प्रवासी मजदूरों के परिजन उनसे मिलने के लिए पहुंच रहे हैं. परिजन मुलाकात के दौरान घर से बना खाना भी ला रहे हैं और उन्हें खिला रहे हैं. कोरोना महामारी को लेकर लंबे समय से चल रहे लॉक डाउन प्रवासियों के बीच से दो कोरोना पोजेटिव (Corona Positive)  मरीज निकलने के बावजूद भी प्रखंड के लोग अपनी इस आदत से बाज आते हुए नहीं दिख रहे हैं.

सोशल डिस्टेंसिंग तक का नहीं कर रहे पालन

नवादा जिले के सिरदला स्थित क्वारंटाइन सेंटर पर भी ऐसा ही कुछ दृश्य देखने को आसानी से मिल रहा है. यहां पहुंचने पर लगता है कि आप किसी क्वारंटीन सेंटर पर नहीं बल्कि किसी कारागार के बाहर मलाकात के समय पर आकर खड़े हो गए हैं. इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन बिल्कुल भी नही किया जा रहा है.



क्वारन्टीन सेंटर पर सामानों का किया जा रहा आदान प्रदान
लोग बेहिचक और बेधड़क क्वारंटाइन सेंटर पहुच रहे है और प्रवासियों से मिलकर भोजन, नाश्ता सहित अन्य जरूरत का समान पहुंचा रहे हैं और खाली हुए बर्तन और समान भी वापिस घर लेकर जा रहे हैं. ऐसे में अगर कोई प्रवासी संक्रमित पाया जाता है तो ट्रेवल हिस्ट्री के हिसाब से अन्य संक्रमित व्यक्ति को पहचान पाना और फिर उनको ढूंढना बहुत ही मुश्किल होगा. ये हालात किसी बड़े खतरे की आगाज करते हुए मालूम पड़ते हैं. यह सही है कि ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मियों द्वारा रोक टोक की जाती है लेकिन इसके बावजूद ना तो प्रवासी सुनने को तैयार हैं और न ही उनके परिजन.

इसी केंद्र के दो प्रवासी मिल चुके है कोरोना पॉजिटिव

सिरदला स्थित आदर्श इंटर विद्यालय से दो प्रवासी कोरोना पॉजिटिव जांच के दौरान संक्रमित मिले हैं. अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मौके पर मौजूद अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन नही कर रहे हैं? आपको बताते चले कि इसी क्वारंटाइन सेंटर से 9 मई को इस प्रवासी क्वारन्टीन सेंटर की अव्यवस्था को देखकर बड़ी संख्या में प्रवासी भाग गए थे. बाद में अधिकारियों की पहल पर उन्हें केंद्र में वापिस लाया गया था. पत्रकारों के साथ एक वार्ता में जिलाधिकारी को भी घटना से अवगत करा दिया गया था. अब देखने वाली बात होगी कि आगे आने वाले समय में स्थानीय प्रशासन इस तरह की गतिविधि को रोकने में समर्थ हो पाती है अथवा परिजनों का प्रवासियों से मिलना जारी रहता है.

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