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मां के इस दरबार में वर्ष 2038 तक वेटिंग में हैं भक्त, प्रतिमा निर्माण को लगाना होता है नंबर

बिहार के नवादा जिले के रेवार गांव में बन रही मां की प्रतिमा.

बिहार के नवादा जिले के रेवार गांव में बन रही मां की प्रतिमा.

बिहार के नवादा (Navada) स्थित मां दुर्गा के इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है. इस बार मां की प्रतिमा का निर्माण वर्ष 2010 में नंबर लगाने वाले एक भक्त करवा रहे हैं.

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    नवादा. बिहार समेत पूरे देश में इस समय नवरात्र (Navrarta) और दुर्गा पूजा (Durga Puja) की धूम है. लोग पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ माता रानी की पूजा कर रहे हैं. बिहार के सभी जिलों में दुर्गा पूजा का आयोजन धूमधाम से किया जा रहा है, लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं माता रानी के एक ऐसे दरबार की कहानी जहां प्रतिमा बनवाने के लिए भक्तों की लंबी लाइन लगती है. माता के भक्त को औसतन दस से पंद्रह साल के इंतजार के बाद मां की प्रतिमा बनवाने का सौभाग्य प्राप्त होता है.

    पूरी होती है भक्तों की मन्नतें

    हम बात कर रहे हैं नवादा के पकरीबरावां की. यहां एक ऐसा देवी स्थान है जहां भक्तों की मन्नतें पूरी होने पर भक्त शारदीय नवरात्र में माता की प्रतिमा बनवाने का काम करते है. मगर मूर्ति बनाने की वेटिंग लिस्ट की सूची काफी लंबी होती है. इस साल इसकी प्रतीक्षा सूची साल 2038 तक है. दरअसल, पकरीबरावां प्रखंड के रेवार गांव की मां दुर्गा से जुड़ीं काफी मान्‍यताएं हैं. कहा जाता है कि यहां सच्‍चे दिल से मन्‍नत मांगने पर मां दुर्गा उसे पूरा करती हैं. यही कारण है कि यहां माता की प्रतिमा निर्माण कराने वालों की लंबी कतार लगी है. लोग दूर-दूर से यहां आकर माता से मन्नतें मांगते हैं. जिन भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं, वे माता की प्रतिमा निर्माण से लेकर पूजा तक का सभी खर्च वहन करते हैं. मगर प्रतिमा निर्माण कराने वाले भक्तों की बड़ी लंबी कतार है.

    एकादशी के दिन होता है निर्णय

    शारदीय नवरात्र में ही यहां माता की प्रतिमा निर्माण कर पूजा की जाती है. इस अवसर माता दुर्गा की प्रतिमा निर्माण के लिए भक्तों की होड़ लगी रहती है. नंबर लगाने के बाद प्रतिमा निर्माण कराने के लिए एक-दो वर्ष नहीं, बल्कि उन्हें कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है. ग्रामीण बताते हैं कि मनोकामना पूरी होने के बाद लोग प्रतिमा का निर्माण कराते हैं. मां की प्रतिमा बनाने के लिए प्रत्येक वर्ष नवरात्र की एकादशी को गांव की पूजा समिति की बैठक होती है, जिनकी भी मनोकामना पूरी होती है वो उस दिन अपना नाम दर्ज कराते हैं. उसी दिन उन्हें वर्ष बता दिया जाता है, जब उन्हें प्रतिमा का निर्माण कराना होता है. वर्ष 2019 में नंबर लगाने वाले श्रद्धालु को वर्ष 2039 तक इंतजार करना पड़ेगा.

    नवादा रेवार मां दुर्गा
    नवादा के रेवार स्थित मां दुर्गा का मंदिर


    वर्ष 2010 में लगाया था नंबर 2019 में मिला मौका

    इस बार रेवार गांव के ही ज्ञानचंद कुमार उर्फ पिंटू सिन्हा का नंबर है. वह फिलहाल जयपुर के स्टेट बैंक में शाखा प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने बताया कि उनकी मन्‍नत पूरी हुई है. वह खुद सरकारी नौकरी में हैं और घर में सभी सुखी हैं. पिंटू ने कहा कि मन्नत पूरी हुई तो प्रतिमा का निर्माण करवा रहा हूं. उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में प्रतिमा निर्माण के लिए नंबर लगाया था और नौ वर्ष बाद बारी आई तो बहुत खुशी हो रही है. मैं तन-मन-धन से माता की भक्ति में लगा हूं. उन्होंने बताया कि वर्ष 2032 में भी वह प्रतिमा का निर्माण कराएंगे. श्री महाशक्ति दुर्गा पूजा समिति रेवार के सदस्य मुकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2020 में धमौल बाजार के तारो विश्वकर्मा प्रतिमा निर्माण कराएंगे.

    अलग-अलग इलाकों से आते हैं श्रद्धालु

    श्रद्धालुओं का मानना है यह शक्तिपीठ है. श्रद्धालु बताते हैं कि सच्चे मन से पूजा करने पर मां मुरादें पूरी करती हैं, जिसके चलते यहां दुर्गा पूजा में भक्तों की काफी भीड़ होती है. मां की कृपा से ही गांव के लोग सुखी-संपन्न हैं. नवादा के अलावा जमुई, शेखपुरा, लखीसराय के भी भक्त यहां आकर माता का दर्शन करते हैं. देश-प्रदेश में रहने वाले रेवार के लगभग ग्रामीण नवरात्र में मां के दर्शन के लिए अवश्य पहुंचते हैं. सभी ग्रामीणों को शारदीय नवरात्र का इंतजार बहुत ही बेसब्री से रहता है.

    रिपोर्ट- अनिल विशाल

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