यह प्राइवेट स्कूल नहीं बल्कि बिहार का सरकारी विद्यालय है, जानें 5 दोस्तों ने मिलकर कैसे बदली इसकी तस्वीर
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यह प्राइवेट स्कूल नहीं बल्कि बिहार का सरकारी विद्यालय है, जानें 5 दोस्तों ने मिलकर कैसे बदली इसकी तस्वीर
जिला प्रसाशन के द्वारा इन दिनों स्कूल को बाला एक्टिविटी के तहत रंग रोगन किया जा रहा है.

ये पांच दोस्त रोशनी टांक (Roshni Tank), श्रेया जैन, राधा कुमारी, खुशबू कुमारी एवं विवेक टांक हैं, जिन्होंने अपने शौक को आजकल अपने जुनून में बदल कर रख दिया है. हालांकि, इस कार्य के लिए इन सभी दोस्तों को विभाग के तरफ से मेहनताना भी दिया गया है.

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नवादा. कहते है इंसान के अंदर किसी चीज को करने की इच्छा हो तो बड़े से बड़े कार्य उनके सामने छोटे पड़ जाते हैं. असाधारण से दिखने वाला कार्य भी उनके सामने छोटा लगने लगता है. बशर्तें उस कार्य को पूरी  ईमानदारी से किया जाए. ऐसा कहना है पेंटिंग में रुचि रखने वाले कुछ छात्रों का. कुल पांच छात्रों ने अपने हुनर के बदौलत कुछ ऐसा कर दिखाया है जो उस क्षेत्र में महारत हासिल रखने वाले ही कर सकते हैं.

अबतक इन पांचों ने मिलकर जिले के तीन स्कूलों का कायाकल्प कर दिया है.
अबतक इन पांचों ने मिलकर जिले के तीन स्कूलों का कायाकल्प कर दिया है.


ये पांच दोस्त रोशनी टांक, श्रेया जैन, राधा कुमारी, खुशबू कुमारी एवं विवेक टांक हैं, जिन्होंने अपने शौक को आजकल अपने जुनून में बदल कर रख दिया है. इन सभी का शौक पेंटिंग करना है. मगर इन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया है जो एक प्रोफेशनल पेंटर ही कर सकता है. इन सभी ने मिलकर पूरे स्कूल को विभिन्न आकृतियों से पाट दिया है. बाला बिल्डिंग एज लर्निंग ऐड के तहत चलाये गए अभियान में इन्होंने अपना योगदान देते हुए कई स्कूल की तस्वीर बदल डाली. अबतक इन पांचों ने मिलकर जिले के तीन स्कूलों का कायाकल्प कर दिया है. और इनका यह अभियान लगातार जारी है. जिले के अन्य प्रखंडों में इनके जैसे और भी पेंटिंग में रुचि रखने वाले छात्र- छात्राओं ने स्कूल की बिल्डिंग एवं क्लास का रूप बदलकर रख दिया है.



रोशनी टांक का कहना है कि इस कार्य को करने में बड़ी मुश्किलें सामने आईं
रोशनी टांक का कहना है कि इस कार्य को करने में बड़ी मुश्किलें सामने आईं.

कई बाधाओं को दूर करते हुए पहुंचे अंजाम तक
रोशनी टांक का कहना है कि इस कार्य को करने में बड़ी मुश्किलें सामने आईं. कम उम्र एवं अनुभव कम होने के कारण उन्हें दिक्कत हुईं. बिना किसी बड़े व्यक्ति की मदद लिए सभी ने जीतोड़ मेहनत कर इस कार्य को अंजाम दिया. आमतौर पर इस कार्य को करने के लिए बहुत प्रकार की सुविधाएं की जरूरत पड़ती हैं, मगर बाहर से कोई मदद लिए बगैर सभी ने बेहतर कार्य किया और रिजल्ट सभी के सामने है. रोशनी की टीम ने स्कूल की दो मंजिला इमारत के साथ- साथ क्लासरूम और गलियारे को विभिन्न आकृतियों से पाट दिया है.

स्कूल को बाला एक्टिविटी के तहत रंग रोगन का कार्य किया जा रहा है.
स्कूल को बाला एक्टिविटी के तहत रंग रोगन का कार्य किया जा रहा है.


बाला एक्टिविटी के तहत किया गया यह कार्य
जिला प्रसाशन के द्वारा इन दिनों स्कूल को बाला एक्टिविटी के तहत रंग रोगन का कार्य किया जा रहा है. जिले के कई स्कूलों में पेंटिंग का कार्य किया जा चुका है. इसके पीछे केवल एक ही मकसद है कि जब कोरोना के बाद स्कूल खुलेंगे तो छोटे बच्चे इन कलाकृतियों को देखकर कुछ सिख सकें. खेल- खेल में वो शिक्षा ग्रहण कर सकें. इसके लिए उन्हें क्लास में शिक्षकों के द्वारा सिखाया जाता है.

इन्होंने अपनी कला के बदौलत स्कूल में पेंटिंग किया है.
इन्होंने अपनी कला के बदौलत स्कूल में पेंटिंग की है.


अपनी कला के बदौलत स्कूल में पेंटिंग की है
इस कार्य के लिए जिला प्रसाशन ने कुशल पेंटर, कला के छात्र एवं शुरू में कोरोना बंदी के दौरान कुछ प्रवासी लोगों से भी काम कराया गया था. मगर अब यह कार्य जिले के सभी प्रखंडों में हो रहा है. इन छात्रों ने बताया कि शिक्षा विभाग के द्वारा इन्हें इस कार्य को करने का आदेश मिला और उसी आदेश के तहत इन्होंने अपनी कला के बदौलत स्कूल में पेंटिंग की है. इनका यह कहना है कि ये प्रोफेशनल लेवल पर पेंटिंग नहीं करते हैं. केवल पेंटिंग के शौक के कारण इस कार्य को किया है.

खेल- खेल में ही कुछ सिख सकें.
खेल- खेल में ही कुछ सिख सकें.


विशेष उद्देश के तहत की स्कूल में पेंटिंग
हालांकि, इस कार्य के लिए इन सभी दोस्तों को विभाग के तरफ से मेहनताना भी दिया गया है. मगर इनका लक्ष्य पैसे कमाना नहीं है. वे सभी इतना चाहते हैं कि लोगों के मन से सरकारी को लेकर अलग भावना हट सके. बच्चे जब स्कूल वापस आयें तो उन्हें अपने स्कूल में एक बदला हुआ सा माहौल मिले, जिसे देखकर वो खेल- खेल में ही कुछ सिख सकें.
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