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शराबबंदी को चूना लगा रही सरकार की नीति, कहीं पैसे तो कहीं डीजल के अभाव में बंद हुई पेट्रोलिंग

शराबबंदी को चूना लगा रही सरकार की नीति, कहीं पैसे तो कहीं डीजल के अभाव में बंद हुई पेट्रोलिंग

डीजल के अभाव में खड़ी गाड़ी

डीजल के अभाव में खड़ी गाड़ी

इस मामले में जब उत्पाद अधीक्षक से सवाल किए गए तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इंकार किया.

    बिहार में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नए प्रावधान लाए जा रहे हैं. सीमावर्ती इलाके में शराब के धंधेबाजों को पकड़ने के लिए उत्पाद विभाग एवं पुलिस को संसाधनों से सुसज्जित करने की कवायद भी जारी है लेकिन नवादा में सरकार की ये कोशिशें दम तोड़ रही है.

    विभाग द्वारा राशि आवंटन नहीं किये जाने के अभाव में इस अभियान को बड़ा झटका पहुंच रहा है. जिले में उत्पाद विभाग द्वारा छापेमारी अभियान इन दिनों बंद हैं क्योंकि उन्हें इसके लिए राशि मुहैया नहीं कराई जा रही है नतीजन विभाग की गाड़ियां यूं ही खड़ी हैं. यह हाल विगत कुछ दिनों से लगातार जारी है.

    झारखंड राज्य से सटे होने के कारण नवादा जिला और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है बावजूद चेक पोस्ट ज्यादा समय तक खुले ही रह जाते हैं. आमतौर पर विभाग के कर्मी शिफ्ट के अनुसार वहां अपनी ड्यूटी करते हैं मगर गाड़ी में डीजल नहीं रहने के कारण छापेमारी दल वहां नही पहुंच पा रहा है. विभाग को भाड़े पर अपनी गाड़ी देने वाले मालिक का कहना है कि सरकार की अनदेखी के कारण उन्हें आर्थिक रूप से घाटा सहना पड़ रहा है.

    निजी गाड़ी के मालिक राजेश कुमार ने बताया कि उनका अंतिम भुगतान सितंबर 2017 में हुआ था एवं अक्टूबर 2017 से उन्हें विभाग के द्वारा एक भी पैसा नहीं दिया गया जिसके कारण उत्पाद विभाग के द्वारा उन्हें दस लाख रुपए किराया देना है. दूसरी ओर गाड़ी मालिक पिंटू का कहना है कि पैसा बकाया होने के कारण जब अधिकारी से पैसे की मांग की गई तो उनकी गाड़ी को ही विभाग से निकाल दिया गया. आज भी उनका विभाग के ऊपर साढ़े चार लाख रुपए का कर्ज है ऐसे में कुछ गाड़ी मालिक लाखों रुपए का नुकसान सह रहे हैं.

    उन्होंने बताया कि कर्ज राशि को लेकर कई बार विभाग के अधिकारी को बोला गया मगर कई वर्षों से उन्हें आज तक पैसा नहीं मिल पाया है. इस मामले में जब उत्पाद अधीक्षक से सवाल किए गए तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इंकार किया. कैमरे के पीछे उन्होंने केवल इतना बताया कि विभाग को इस स्थिति की जानकारी दे दी गई है मगर अभी तक विभाग की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है.

    जिला अधिकारी को भी इस बात से अवगत करा दिया गया है अब ऐसे में सवाल उठता है कि विभाग आखिर किस कारणवश राशि का आवंटन नहीं कर पा रहा है. गाड़ियों का किराया बकाया होने के साथ ही कुछ होमगार्ड के जवानों का भी कई माह का वेतन बकाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकार ऐसी स्थिति में शराबबन्दी कानून को कैसे लागू करेगी जब इस पर रोक लगाने के लिए जरूरी तंत्र ही पैसे के अभाव में खड़े हैं.

    रिपोर्ट- अनिल विशाल

    Tags: Bihar News, Nawada news

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