बिहार SSC का कारनामा, 'रिजेक्टेड' कैंडिडेट को बना दिया दरोगा

पर्चा लीक के बाद बिहार राज्य कर्मचारी आयोग यानि बीएसएससी में एक और घोटाला सामने आया है. ईटीवी/ न्यूज18 के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक दारोगा की परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर धांधली हुई है.

RaviS Narayan
Updated: September 13, 2017, 7:31 PM IST
बिहार SSC का कारनामा, 'रिजेक्टेड' कैंडिडेट को बना दिया दरोगा
प्रदर्शन करते अभ्यर्थी
RaviS Narayan
Updated: September 13, 2017, 7:31 PM IST
पेपर लीक के बाद बिहार राज्य कर्मचारी आयोग यानि BSCC में एक और घोटाला सामने आया है. ईटीवी/ न्यूज18 के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक दारोगा की परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर धांधली हुई है. दस्तावेजों में ये साफ है कि जिस कैंडिडेट को दारोगा परीक्षा में शामिल होने से रिजेक्ट कर दिया गया था, उन्हें फाइनल रिजल्ट में पास कर दिया गया.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में केस के बाद एक से अधिक जगहों से फॉर्म भरने वाले अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी.

दरअसल, 1 सितंबर 2017 को दारोगा परीक्षा का अंतिम रिजल्ट जारी हुआ है जिसमे 97 छात्रो को अंतिम रूप से दारोगा के लिए चयन किया गया है. इस रिजल्ट में दो रॉल नंबर ऐसे है जिसकी उम्मीदवारी पहले ही रद्द कर दी गई थी.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक माला (रॉल नंबर-C02478) और रश्मि (रॉल नंबर-B00019) को पास कर दिया गया जबकि इन दोनों की उम्मीदवारी पहले रद्द कर दी गई थी.

ये हम नहीं बल्कि दारोगा परीक्षा के अभ्यर्थी ही इस बात की तस्दीक कर रहे हैं. दारोगा अभ्यर्थी  विभा का कहना है कि दारोगा भर्ती में लाखों की लेन देन और पैरवी हुई है. आखिर कैसे वैसे उम्मीदवारों को पास कर दिया गया जिन्हें रिजेक्ट कर दिया था. दूसरे अभ्यर्थी  मुकेश का कहना है कि BSCC हर बार किसी न किसी घोटाले में फंस जाता है. कोई भी परीक्षा सफलतापूर्वक करानेे में आयोग असफल रहा है.

इस पूरे मामले में जब हमने बिहार कर्मचारी आयोग से पक्ष जानना चाहा तो आयोग के सचिव योगेंद्र पासवान ने अपना बचाव किया. उन्होंने कहा कि हमें ये पता ही नहीं की कौन रिजेक्ट है और कौन नहीं.

इसके अलावा बीएसएससी का एक और कारनामा सामने आया है. 14 जुलाई 2017 को जारी किये गए विज्ञापन में आयोग साफ तौर पर लिखता है कि यह सीमित प्रतियोगिता परीक्षा विज्ञापन संख्या 704 में भाग ले चुके अभ्यर्थियों के लिए ही सीमित है.

ईटीवी के हाथ लगए दस्तावेजो में साफ पता चलता है कि दारोगा अभ्यर्थी रविंद्र कुमार (रॉल नंबर-s00133) विज्ञापन सं 704 के द्वारा आयोजित परीक्षा में शामिल ही नहीं हुआ था. परीक्षा के रिजल्ट में हर पेपर में एब्सेंट था.

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 14 सितम्बर 2017 को जारी विज्ञप्ति में खुद आयोग कहता है कि इस परीक्षा में वही शामिल हो सकता है जो विज्ञापन सं 704 में भाग ले चुका है फिर रविंद्र कुमार कैसे शामिल होता है और परीक्षा में पास भी कर दिया जाता है.

ईटीवी की खबर पर राज्य पुलिस मुख्यालय ने संज्ञान लिया है. मुख्यालय एडीजी ए के सिंघल ने आयोग को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच करने की बात कही है.

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