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बिहार पुलिसः 3.77 करोड़ का होना था निर्माण, मांग ली 11 लाख रिश्वत, अब रंगे हाथों गिरफ्तार

Sanjay Kumar | News18Hindi
Updated: January 24, 2020, 9:37 PM IST
बिहार पुलिसः 3.77 करोड़ का होना था निर्माण, मांग ली 11 लाख रिश्वत, अब रंगे हाथों गिरफ्तार
सारण में राजकीय पॉलिटेक्‍निक पोर्टेबल केबिन और राजकीय पॉलिटेक्निक गया के निर्माण को लेकर ही रिश्वतखोरी का खेल चल रहा था जिसे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पकड़ लिया और रिश्वत मांगने वाले अधिकारी को भी गिरफ्तार कर लिया. (फाइल फोटो)

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कार्रवाई कर पुलिस (Police) निर्माण निगम के सहायक सचिव को किया गिरफ्तार, निर्माण के संबंध में मांग रहा था रिश्वत.

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  • Last Updated: January 24, 2020, 9:37 PM IST
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पटना. बिहार में राज्य सरकार कितना भी भ्रष्टाचार से निपटने के इंतजाम करती रहे, या फिर पुलिस (Police) महकमा भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर अपनी ही पीठ थपथपाती रहे लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ अलग है. इस बात का पता इस खबर से चलता है. सारण में राजकीय पॉलिटेक्‍निक पोर्टेबल केबिन और राजकीय पॉलिटेक्निक गया के निर्माण को लेकर ही रिश्वतखोरी का खेल चल रहा था जिसे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पकड़ लिया और रिश्वत मांगने वाले अधिकारी को भी गिरफ्तार कर लिया.

कुल निविदा राशी का 3 परसेंट रिश्वत में मांगा
पटना के निवासी और शिकायतकर्ता गणेश कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को बताया कि राजकीय पॉलिटेक्निक छपरा में पोर्टेबल केबिन और गया के राजकीय पॉलिटेक्निक के निर्माण की कुल विदा 3.77 करोड़ रुपये थी. इसको लेकर सहायक सचिव कर्मलाल ने उससे 11 लाख 32 हजार रुपये की रिश्वत मांगी. जो कि कुल राशि का 3 परसेंट था. कर्मलाल बिहार पुलिस सेवा से डीएसपी के तौर पर सेवानिवृत्त हुआ है और सरकार ने उसे कॉन्ट्रेक्ट पर बहाल कर रखा है.

1 लाख रुपये मांगे एडवांस

इसके बाद गणेश कुमार ने इतने रुपये देने में असमर्थता जताई. कर्मलाल ने इस पर उससे 1 लाख रुपये एडवांस के तौर पर और बाकि रिश्वत की रकम किश्तों में देने को कहा. इससे परेशान होकर गणेश कुमार ने अन्वेषण ब्यूरो में इसकी शिकायत की. शिकायत का सत्यापान होने के बाद मामला दर्ज किया गया और एएसपी मनोज कुमार के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया. टीम ने पुलिस भवन निर्माण निगम में कर्मलाल को पकड़ने के लिए जाल बिछाया और उसे रंगेहाथों गिरफ्तार किया. बाद में उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. इस दौरान उसके आवास पर भी छापा मारा गया. जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले अधिकारियों की कमी को देखते हुए बिहार सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों को कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर बहाल किया था. कर्मलाल भी उसी योजना के तहत पुलिस निर्माण निगम में सहायक सचिव के तौर पर बहाल हुआ था.

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First published: January 24, 2020, 7:22 PM IST
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