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महावीर मंदिर के दान पात्र से मिली ऐसी चीज कि देखकर हतप्रभ रह गए लोग

Amit Kumar | News18 Bihar
Updated: February 8, 2020, 11:37 AM IST
महावीर मंदिर के दान पात्र से मिली ऐसी चीज कि देखकर हतप्रभ रह गए लोग
पटना के महावीर मंदिर के दान पात्र से 30 दुर्लभ सिक्के मिले. (फाइल फोटो)

महावीर मंदिर के दान पात्र से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी (East India Company) के दौर के 30 सिक्के मिले हैं. इनपर एक आना (One Aana) और साल 1818 अंकित हैं.

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पटना. बिहार की राजधानी पटना के स्टेशन परिसर से सटे स्थित विश्व प्रसिद्ध महावीर मंदिर (Mahaveer Temple) के दान पात्र में रोजाना श्रद्धालुओं द्वारा यथाशक्ति दान के तौर पर रुपये डाले जाते हैं. एक निश्चित समय के बाद मंदिर प्रशासन इन दान पात्रों को खोल कर दान की गई राशि को गिनकर मंदिर ट्रस्ट के खाते में जमा करवा देता है. यह सिलसिला वर्षों से जारी है, लेकिन शुक्रवार को दान पात्र से मंदिर प्रशासन को कुछ ऐसा मिला, जिसको देखकर सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए. दरअसल, सभी सिक्कों पर राम जानकी और लक्ष्मण के चित्र हैं.

30 सिक्कों ने हैरत में डाल दिया
दरअसल, महावीर मंदिर के दान पात्र से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) के दौर के 30 सिक्के मिले हैं. इन सिक्कों पर एक आना (One ANNA) और साल 1818 अंकित हैं. यानी मिले सिक्कों का मूल्य उस दौर का है, जब रुपये का दशमलवीकरण नहीं हुआ था. उस वक्‍त 11.66 ग्राम के वज़न वाले रुपये के सिक्के को 16 आने या 64 पैसे या फिर 192 पाई में बांटा जाता था. साल 1957 में रुपये का दशमलवीकरण हो गया और एक रुपया 100 पैसे का हो गया.

दान पात्र से जो सिक्के मिले हैं उसपर राम-जानकी और लक्ष्मण की आकृति बनी हुई है.


किसने डाले पुरातन महत्व के सिक्के?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के इतने पुरातन महत्व के 30 सिक्के आखिर में महावीर मंदिर के दानपत्र में किसने, कब, क्यों और किस उद्देश्य के साथ डाले हैं? यह जानकारी किसी के पास नहीं है. ऐसे में इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.

क्या कहता है मंदिर प्रशासन?महावीर मन्दिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने कहा कि दान पात्र से मिले सिक्कों को देखकर वो भी अचंभित हुए. श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के मंदिर में यह सिक्का मिलना बहुत ही प्रसन्नता का विषय है.

महावीर मन्दिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल दुर्लभ सिक्कों के साथ.


किशोर कुणाल ने कहा कि सिक्के मिलने के बाद हमने सबसे पहले इसके इतिहास और भूगोल के बाबत जानकारी ली तो पता चला कि ब्रिटिश हुकूमत के दौर में वर्ष 1784 से 1835 तक के पीरियड में देश के मेट्रोपोलिटन टाउन के तौर पर चिह्नित कलकत्ता (अब कोलकाता), बॉम्बे (अब मुंबई) और मद्रास (अब चेन्नई) में इन सिक्कों को लेनदेन में प्रयोग किये जाने का अधिकार दिया गया था. वहीं, साल 1835 में जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने पूरे देश की सत्ता हासिल कर ली तो मुल्क भर में इसे एक आना के मूल्य पर चलाया गया. सिक्के किस धातु से ढाले गए हैं, इस बाबत जानकारी इकट्ठा की जा रही है.

मंदिर में ही रखे गए सिक्के
किशोर कुणाल ने कहा कि बेहद पुरातन महत्व और धार्मिक महत्व के अमूल्य धरोहर सिक्कों को मंदिर प्रांगण में ही रखने का निर्णय लिया गया है, क्‍योंकि सिक्कों पर भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण जी अलंकृत हैं.

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First published: February 8, 2020, 11:00 AM IST
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