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Bihar Politics : ललन सिंह के सामने 5 चुनौतियां, जिनसे पार पाकर ही JDU बन सकती है नंबर-1 पार्टी

जानें ललन सिंह के सामने की वे पांच चुनौतियां जिनसे पार पाकर ही जेडीयू हो सकती है नंबर-1.

जानें ललन सिंह के सामने की वे पांच चुनौतियां जिनसे पार पाकर ही जेडीयू हो सकती है नंबर-1.

Bihar Politics : अपनी पार्टी को बिहार में नंबर वन बनाना चाहते हैं जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह. लेकिन इस बीच बिहार की राजनीति में दूसरी पार्टियां जिस तरह से उफान मार रही हैं और खुद जेडीयू की जो दशा है, वह ललन सिंह के लिए बड़ी चुनौती है.

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पटना. JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद ललन सिंह ने तय कर लिया है कि किसी भी कीमत पर JDU को बिहार की नंबर-1 पार्टी बनाना है. इसके लिए वे JDU के नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक का आह्वान कर रहे हैं. उनसे कह रहे हैं कि अपनी पूरी ताकत झोंक दीजिए JDU को बिहार की नंबर-1 राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए लेकिन ललन सिंह के इस सपने के पूरा होने में कुछ ऐसी बाधाएं हैं जिससे पार पाना JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए आसान नही होगा।

JDU को एकजुट करना : ललन सिंह के स्वागत में भले ही बड़ी संख्या में JDU के नेता और कार्यकर्ता सड़क पर उमड़ पड़े थे, बावजूद ललन सिंह के सामने JDU की आतंरिक गुटबाजी खत्म करना बेहद बड़ी चुनौती है. ऊपर से भले ही JDU एकजुट दिख रही हो, लेकिन JDU के अंदर कुछ ऐसे नेता हैं, जिनको एकसाथ लाना ललन सिंह के लिए मुश्किल हो सकता है. साथ ही ललन सिंह को ऐसे नेताओं से बेहतर तालमेल भी बिठाना होगा.

नेताओं-कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना : ललन सिंह पार्टी को नंबर-1 बनाने का सपने JDU के नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिखा तो रहे हैं, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में जो पार्टी को जो झटका लगा है, उससे अभी तक नेता और कार्यकर्ता उबर नहीं पाए हैं. तो ललन सिंह को अपने मकसद की कामयाबी के लिए पार्टी के तमाम लोगों में उत्साह का संचार करना होगा.

संगठन की मजबूती : संगठन के स्तर पर JDU काफी कमजोर दिखी बिहार विधानसभा चुनाव में, जिसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा. कई ऐसे नेताओं को संगठन में पद दे दिया गया था, जो चुनाव के वक्त भी एक्टिव नहीं थे. अभी भी संगठन में कुछ ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी गई है और पार्टी के कई पुराने लोगों को दरकिनार कर दिया गया है, जिसकी नाराजगी JDU के अंदर खाने दिख रही है. इस समस्या से भी ललन सिंह को निबटना होगा.

सहयोगियों से बेहतर तालमेल : ललन सिंह से लेकर नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह से लेकर उपेंद्र कुशवाहा तक सबका यही मानना है कि JDU को बिहार की नंबर-1 राजनीतिक पार्टी बनाना है. लेकिन इस वक्त बिहार की सियासत में JDU की सहयोगी भाजपा बहुत आगे निकल गई है और अब भाजपा पहले वाली पार्टी भी नहीं रही. अब भाजपा बिहार में बड़े भाई की भूमिका में आ गई है. तो जब JDU को नंबर-1 बनाने की कोशिश शुरू होगी तो भाजपा से टकराव की पूरी संभावना है और ललन सिंह के सामने बड़ी चुनौती हो सकती है.

महागठबंधन की तगड़ी चुनौती : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विधानसभा चुनाव में NDA को तगड़ी टक्कर दे कर साफ कर दिया है कि बिहार की सियासत में अब तेजस्वी यादव बड़े नेता के तौर पर उभर चुके हैं. वहीं लालू यादव भी राजनीति में सक्रिय हो गए हैं. ऐसे में ललन सिंह के सामने बड़ी चुनौती आ सकती है जब JDU को बिहार की नंबर-1 पार्टी बनाने की कवायद शुरू करेंगे. क्योंकि तेजस्वी यादव राजद को MY समीकरण से बाहर निकाल कर A to Z वाली पार्टी बनाने की ओर बढ़ चुके हैं.

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