Bihar Election: जानें कौन हैं नीतीश कुमार के पंचरत्न, जिन पर JDU की चुनावी नैया पार लगाने की है जिम्मेदारी

नीतीश कुमार के सामने सत्ता में वापसी की बड़ी चुनौती है. (फाइल फोटो)
नीतीश कुमार के सामने सत्ता में वापसी की बड़ी चुनौती है. (फाइल फोटो)

Bihar Assembly Elections: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू की चुनावी नैया को पार लगाने के लिए अपने बेहद करीबी पांच नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 27, 2020, 9:11 PM IST
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पटना. बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) का बिगुल बज चुका है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के सामने सत्ता में वापसी करने की बड़ी चुनौती है. हालांकि उन्होंने चुनावी नैया को पार लगाने के लिए पार्टी के पंचरत्नों को जिम्मेदारी सौंप दी है. अपने पंचरत्नों पर नीतीश कुमार को इस कदर भरोसा है कि जो भी बड़ी रणनीति बनती है, उसमें इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. इन पांच नेताओं से इतर एक नाम और है जो नीतीश कुमार के लिए बेहद खास माने जाते हैं. वो हैं वशिष्ठ नारायण सिंह हैं. फिलहाल वो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं.

वशिष्ठ नारायण सिंह को पार्टी के नेता और कार्यकर्ता दादा के नाम से पुकारते हैं. ऐसा माना जाता है कि जेडीयू के जिन नेताओं की मुलाकात नीतीश कुमार से नहीं हो पाती, वे दादा से मिलकर नीतीश कुमार तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं. पार्टी के छोटे-बड़े नेता-कार्यकर्ता और नीतीश कुमार के बीच वशिष्ठ बाबू सेतु का काम करते हैं. तो आइए जानते हैं नीतीश कुमार के इन पंचरत्न को, जिनके ऊपर कोरोनाकाल में हो रहे चुनाव में JDU की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
आरसीपी सिंह- नौकरशाही से राजनीति में कदम रखने वाले राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह की जेडीयू को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका रही है. चुनावी माहौल में पार्टी के उम्मीदवारों के चयन से लेकर सहयोगी दलों से बातचीत में वो महत्वपूर्ण कड़ी हैं.
ललन सिंह- मुंगेर से सांसद और सीएम नीतीश के आंख-कान माने जाने वाले ललन सिंह को बेहद सधा हुआ और गम्भीर राजनीतिक शख़्सियत माना  जाता है. ललन सिंह ही वो शख्स हैं, जिन्होंने लालू यादव को चारा घोटाला के लपेटे में डालकर बिहार की सियासत से दूर कर दिया और नीतीश कुमार की राह आसान बना दी. चुनावी माहौल में नेताओं के जोड़-तोड़ से लेकर सीट बंटवारे पर सहयोगियों से वार्ता में इनकी मेन भूमिका है.
विजय चौधरी- बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी पर्दे के पीछे रहकर नीतीश के लिए चुनावी रणनीति बनाने में जुटे हैं. मांझी को जेडीयू में शामिल कराने से लेकर उम्मीदवार चयन में उनकी खास भूमिका है. फिलहाल वे नीतीश कुमार के सबसे खास रणनीतिकार बने हुए हैं.
अशोक चौधरी- पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी दलित समुदाय से आते हैं. लेकिन अपने व्यक्तित्व और सांगठनिक क्षमता की वजह से फिलहाल वे नीतीश कुमार के बेहद खास बने हुए हैं. चौधरी तकनीकी के इस्तेमाल में बेहद तेज तर्रार माने जाते हैं. इसलिए उन्हें पार्टी का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. वो युवा होने के साथ-साथ कुशल रणनीतिकार भी माने जाते हैं.
संजय झा- नीतीश कुमार के बेहद करीबी के तौर इनकी पहचान है. दिल्ली की सियासत में मजबूत पकड़ रखने वाले संजय झा ने ही जेडीयू को  महागठबंधन से अलग कराकर दोबारा बीजेपी के साथ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. चुनाव से ठीक पहले पार्टी की वर्चुअल रैली को सफल बनाकर उन्होंने नीतीश कुमार का विश्वास और जीत लिया है. सोशल मीडिया में पार्टी और सरकार की दमदार उपस्थिति की जिम्मेदारी संजय झा पर ही है.
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