कोरोना के साथ-साथ कैंसर को मात दे रहे 88 साल के रिटायर्ड प्रोफेसर, अस्पताल के बेड पर काटा बर्थडे केक

पटना के एक अस्पताल में केक काटते 88 वर्षीय कोरोना मरीज

पटना के एक अस्पताल में केक काटते 88 वर्षीय कोरोना मरीज

Corona Warrior Story: पटना के एक अस्पताल में इलाजरत देवी प्रसाद कहते हैं जाना तो एक दिन सबको है ही लेकिन जब तक ज़िंदगी है, सांस चल रही है तो हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. मै भी ज़िंदगी जीना चाहता हूँ तो इसके लिए मुझे ही हिम्मत दिखानी होगी

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पटना. कोरोना संक्रमण से पूरा देश जूझ रहा है. इस बीमारी से जूझ रहे लोगों में निराशा के भाव के बीच कुछ ऐसे भी योद्धा हैं जो कोरोना (Corona Warrior) जैसी बीमारी को मात देने की कोशिश में लगे हुए हैं. ऐसे ही एक 88 साल के बुजुर्ग हैं देवी प्रसाद, जो ना सिर्फ कैंसर (Cancer Patient) बल्कि कोरोना जैसी बीमारी सेे जूझ रहे हैं, बावजूद उन्होंने अपनी हिम्मत और धैर्य नहीं खोया है. 88 साल के होने पर इस रिटायर्ड प्रोफेसर ने अपना जन्मदिन धूमधाम से मनाया. उन्होंने ना सिर्फ केक (Birthday Cake) काटा बल्कि उनकी इच्छा के अनुसार कमरे को भी बैलून से सजा कर बच्चों जैसा अहसास कराने की पूरी कोशिश अस्पताल प्रबंधन ने कराई.

देवी प्रसाद पटना के उदयन हॉस्पिटल में पिछले 20 दिनों से ज़्यादा समय से भर्ती हैं. जब इनकी तबियत ख़राब थी और जांच हुई तो वो कोरोंना पॉज़िटिव निकले. जब ये ख़बर देवी प्रसाद को मिली तो वो घबराए नहीं बल्कि अस्पताल में उन्होंने अपना इलाज करवाना शुरू करवाया. अस्पताल में इलाज चल ही रहा था कि इसी बीच पता चला कि देवी प्रसाद को कैंसर भी है. इस ख़बर के बाद भी देवी प्रसाद ने हिम्मत नहीं हारी और अपने आपको इस उम्र में भी पूरी तरह से मजबूत बनाए रखा और इलाज करवा रहे हैं.

जब अस्पताल प्रबंधन को देवी प्रसाद के जन्मदिन की जानकारी मिली तो अस्पताल प्रबंधन ने देवी प्रसाद के जन्म दिन को मनाने का फैसला किया, जिसकी सहमति देवी प्रसाद ने दे दी, फिर क्या था अस्पताल के इस कमरे को सजाया गया, ठीक वैसे ही जैसे किसी बच्चे के जन्म दिन के मौक़े पर कमरे को सजाया जाता है. एक बड़ा सा केक मंगाया गया जिसे देवी प्रसाद ने बहुत ही प्यार से केक काटा और ना सिर्फ़ खुद खाया बल्कि उनके जन्मदिन को यादगार बनाने वाले अस्पताल के नर्स और स्टाफ़ को भी केक खिलाया गया.

पटना के एक अस्पताल में बर्थ डे केक काटते 88 साल के बुजुर्ग

देवी प्रसाद कहते हैं जाना तो एक दिन सबको है ही लेकिन जब तक ज़िंदगी है, सांस चल रही है तो हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. मै भी ज़िंदगी जीना चाहता हूँ तो इसके लिए मुझे ही हिम्मत दिखानी होगी और मैं पूरी हिम्मत से कोरोना और कैंसर जैसी बीमारी से लड़ाई लड़ रहा हूं, साथ ही लोगों से भी अपील की हिम्मत रखिए हम इस दौर से भी निकल जाएंगे. देवी प्रसाद मगध यूनिवर्सिटी गया में जूलॉजी के प्रोफ़ेसर थे और 1990 में रिटायर हुए थे.
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