Exclusive: जब आधार कार्ड ने इन छह मासूम बच्चों को 'अनाथ' बनने से बचाया

ये कहानी सिर्फ गोलू की नहीं बल्कि उसके जैसे छह बच्चों की है जिनके लिये आधार कार्ड उनके 'जीवन का आधार' बना. दरअसल ये सभी बच्चे आधार कार्ड से मिली जानकारी से ही वापस अपना घर और परिवार पा सके

Amrendra Kumar | News18India
Updated: August 29, 2018, 2:46 PM IST
Exclusive: जब आधार कार्ड ने इन छह मासूम बच्चों को 'अनाथ' बनने से बचाया
अपने बेटे का आधार कार्ड दिखाते सुनिल के पिता
Amrendra Kumar
Amrendra Kumar | News18India
Updated: August 29, 2018, 2:46 PM IST
तीन साल पहले बिहार के मधुबनी का रहने वाला गोलू जब शौच जाने के दौरान गायब हुआ तो घरवालों ने ये उम्मीद छोड़ दी थी कि उसकी कभी घर वापसी भी होगी. लेकिन ऐसा हुआ और गोलू बुधवार को तीन साल के लंबे अंतराल के बाद अपने मां-बाप और परिवार से मिला. ये कहानी सिर्फ गोलू की नहीं बल्कि उसके जैसे छह बच्चों की है जिनके लिये आधार कार्ड उनके 'जीवन का आधार' बना.

दरअसल ये सभी बच्चे आधार कार्ड से मिली जानकारी से ही वापस अपना घर और परिवार पा सके. न्यूज 18 ने पटना के शेल्टर होम अपना घर से वापस अपने परिवार के साथ जा रहे इन बच्चों के परिवार से बात की तो काफी मार्मिक किस्से सामने आये. जिन बच्चों को आधार ने अपने परिवार से मिलाया उनमें कुछ दिव्यांग और मानसिक रूप से नि:शक्त बच्चे भी शामिल थे. न्यूज 18 आपको बता रहा है उन छह बच्चों की कहानी जो

विशेष केसरवानी उर्फ मानव

लगभग 12 साल का बच्चा विशेष केसरवानी मानसिक रूप से नि:शक्त है. वो पटना के अपना होम शेल्टर 24 जनवरी 2017 को आया तो न कुछ बोल सकता था और न ही कुछ समझ सकता था लिहाजा उसे शेल्टर होम में मानव नाम मिला. उसे समझने में शेल्टर होम के कर्मियों को काफी परेशानी हो रही थी लेकिन उसके परिवार को ढूंढना भी चुनौती थी लिहाजा आधार कार्ड की मदद ली गई. जब बच्चे का आधार कार्ड बनाने की प्रकिया शुरू हुई तो पता चला कि उसका आधार कार्ड पहले ही बन चुका है. आधार से मिली जानकारी के बाद उसके परिवार से संपर्क किया गया जो कि मध्यप्रदेश के सागर का रहने वाला था. बुधवार को पटना पहुंचे विशेष के परिजन उसे पाकर बेहद खुश और भावुक थे. परिवारवालों ने बताया कि वो लगभग डेढ़ साल पहले बनारस से गायब हुआ था जबकि पटना के शेल्टर होम में उसकी एंट्री पटना रेलवे स्टेशन के जरिये हुई थी. वहां के लोगों ने प्रयास किया.

अपने बच्चे को लेने शेल्टर होम पहुंचे अभिभावक


गोलू चौधरी

बिहार के मधुबनी का रहने वाला गोलू तीन साल पहले अपने ननिहाल से अचानक गायब हो गया. उसकी खोजबीन की गई पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई लेकिन कोई पता नहीं लग सका. इस बीच तीन साल बाद घरवालों को पता चला कि वो पटना के शेल्टर होम में है. बुधवार को तीन साल बाद अपने बेटे को लेने पटना पहुंचे गोलू के पिता जीवछ और मां सुनीता की आंखो से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. गोलू को भी आधार ने उसके परिवार से मिलाया और तीन साल बाद उसकी घर वापसी हुई. गोलू की मां ने बताया कि हमने ये उम्मीद छोड़ दी थी कि मेरा बेटा वापस आयेगा लेकिन भगवान की कृपा से आज मुझे मेरा बेटा वापस मिला है.सुनील कुमार उर्फ मुनिराज

सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर का रहने वाले सुनील कुमार शेल्टर होम पहुंचा तो उसे मुनिराज का नाम मिला. वो 28 जून 2017 को गायब हुआ था. मजदूर वर्ग से आने वाले सुनील के परिवार ने बेटे की बरामदगी के लिये प्रयास किया लेकिन नाकामी हाथ लगी. इसके बाद उन्हें शेल्टर होम के लोगों का फोन गया कि सुनील सुरक्षित है और पटना में है. सुनील के पिता रामचंद्र शर्मा और मां सोनी ने बताया कि आज मुझे मेरा बच्चा आधार कार्ड की वजह से मिला है.

अपने भाई को लेने शेल्टर होम पहुंचा झारखंड का युवक


कुन्नी चंपिया

झारखंड के कुने चंपिया 14 नवंबर को चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद से शेल्टर होम पहुंचा था. उसे इस शेल्टर होम में स्पेशल किड (दिव्यांगता की एक श्रेणी) में रखा गया. जब कुन्नी के परिवारवालों को कोई ठिकाना नहीं पता लग सका तो आधार कार्ड की मदद ली गई जिसके बाद सुदूर आदिवासी इलाके के इस दिव्यांग को उसका परिवार मिल सका. कुन्नी को लेने उसका भाई पहुंचा था.

रामू उर्फ शिवशंकर

14 जून 2017 को अपना घर पहुंचे रामू को भी आधार कार्ड ने वापस उसका घर और परिवार दिलाया. रामकिसुन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का रहने वाला है. वो मानसिक रूप से दिव्यांग है जो न तो सही ढंग से बोल पाता था और न ही कुछ बता पाता था ऐसे में उसके परिवार को खोजने में परेशानियां सामने आ रही लेकिन जब उसके आधार कार्ड का पता चला तो परिवार से संपर्क साधा गया और घर भेजने की कवायद शुरू हुई.

मोहम्मद इकबाल

कुछ ऐसी ही कहानी मोहम्मद इकबाल की है. लगभग 10 साल का ये बच्चा मुंबई से कब और कैसे पटना पहुंचा उसे भी नहीं पता चला. हालांकि इकबाल की स्थिति नार्मल है और वो सामान्य बच्चा है लेकिन वो सही तौर पर पता नहीं बता पा रहा था. जब इकबाल का आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो उसका पता और ठिकाना मिला. इकबाल के परिजनों से संपर्क साधा गया जो उसे वापस ले जाने के लिये पटना आ रहे थे.
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