Bihar Assembly Election 2020: Corona की लड़ाई के बाद अब चुनावी जंग के लिए तैयार होगा बिहार?
Patna News in Hindi

Bihar Assembly Election 2020: Corona की लड़ाई के बाद अब चुनावी जंग के लिए तैयार होगा बिहार?
पूर्वी दिल्ली नगर निगम में खाली पड़े सदस्यों के चार पदों के लिए भी चुनाव होंगे. (सांकेतिक फोटो)

सब कुछ तय समय पर हुआ तो बिहार में चुनाव (Bihar Elections) प्रक्रिया नवंबर के आखिर तक पूरी कर ली जाएगी. उल्लेखनीय है कि 2015 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद नीतीश कुमार ने 20 नवम्बर 2015 को शपथ ग्रहण किया था ऐसे में बिहार में चुनाव प्रक्रिया के सितंबर अंत या अक्टूबर को शुरू में होने की उम्मीद है.

  • Share this:
नई दिल्ली. देशभर में चल रही कोरोना (Corona) की इस लड़ाई से जब बाहर निकलेंगे तो सबसे पहले बिहार में चुनावी जंग छिड़ेगी. सब कुछ तय समय पर हुआ तो बिहार में चुनाव प्रक्रिया नवंबर के आखिर तक पूरी कर ली जाएगी. उल्लेखनीय है कि 2015 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद नीतीश कुमार ने 20 नवम्बर 2015 को शपथ ग्रहण किया था ऐसे में बिहार में चुनाव प्रक्रिया के सितंबर अंत या अक्टूबर को शुरू में होने की उम्मीद है. फिलहाल देश में कोरोना का संक्रमण फैला है लेकिन सरकार की तैयारियों और कामों को देखते हुए उम्मीद है कि मई के अंत तक इस संकट से देश पूरी तरह से बाहर आ जाए. हालांकि एक सवाल सभी के मन है कि क्या कोराना के मुश्किल हालात से निकलने के बाद बिहार चुनाव के लिए तुरंत तैयार होगा या कुछ इंतजार करना होगा.

कोरान के बाद कितना बदलेगा चुनावी मुद्दा
बिहार के चुनाव जब भी हों लेकिन देश ही नहीं पूरी दुनिया की नजर इन चुनावों पर जरुर होगी क्योंकि सब ये जानने चाहेंगें कि कोरोना के बाद राजनीति का स्वरूप क्या होगा, चुनाव कितनी सकारात्मक्ता के साथ लड़ा जाएगा और चुनाव में मुद्दे क्या होंगे. क्या बिहार में चुनाव धर्म, जाति, अगड़ा-पिछड़ा के मुद्दे पर ही लड़ा जाएगा या इस बार बात बिहार में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की होगी. क्योंकि कोरोना के इस संकट में देश के लोगों ने अपने-अपने इलाके की स्वास्थ्य सेवाओं का हाल देख लिया है, बिहार में अब तक हुए चुनावों को देखे तो वहां जाति-धर्म, अगड़ा-पिछड़ा जैसे मुद्दे ही चुनावों में उभरते रहे हैं.

कोरोना से लड़ाई में भी दिख रहा असर
कोरोना के बाद चुनाव आयोग चुनाव के लिए कितना तैयार होगा इसके लिए फिलहाल इंतजार करना पड़ेगा लेकिन बिहार में कोरोना से लड़ाई के दौरान भी राजनीति की बिसात बिछी हुई है. विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे तेजस्वी यादव कभी मुम्बई और दिल्ली में बिहार के मजदूरों को मदद करने जाने की बात, तो कभी उन्हें फ्लाइट से बिहार लाने का मुद्दा उठा कर सरकार को घेरने की कोशिश में लगे रहते हैं. वहीं सरकार में बैठे नेता तेजस्वी यादव को लगातार कोराना के इस दौर में राजनीति न करने की सलाह देते रहते हैं. मतलब चुनाव भले ही दूर हो लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष लगातार एक दूसरे पर शब्दबाण चलाकर बिहार को लोगों को ये याद दिलाते रहते हैं कि कोरोना के बाद चुनाव होना है.



5 साल में कितने बदले राजनीतिक समीकरण
बात करें बिहार चुनाव की तो 2015 से 2020 आते-आते बिहार की राजनीतिक बिसात पूरी तरह बदल चुकी है. जिस आरजेडी के सहारे नीतिश कुमार ने 2015 में बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कब्जा किया था वो विपक्ष में है, जबकि जिस बीजेपी के खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा था वो सरकार में है. कुछ यही हाल उनकी राजनीतिक टीम का भी है कभी उनके सबसे खास सलाहकार रहे प्रशांत किशोर और पवन वर्मा अब पार्टी से बाहर जा चुके हैं और आर सी पी सिंह और लल्लन सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है, साफ है चुनाव जब भी हो लेकिन इस बार सब कुछ नया होने वाला है.

ये भी पढ़ेंः 'कृषि कार्यों पर रोक नहीं, गेहूं खरीदें पैक्स और शुरू हो बाढ़ रोकथाम का काम'
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज