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दिल्ली चुनाव के बाद अब बढ़ेगा बिहार का राजनीतिक तापमान, जानें समीकरण और चुनौतियां
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News18 Bihar
Updated: February 9, 2020, 12:42 PM IST
दिल्ली चुनाव के बाद अब बढ़ेगा बिहार का राजनीतिक तापमान, जानें समीकरण और चुनौतियां
तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

एक तरफ बीजेपी-जेडीयू और एलजेपी (BJP-JDU-LJP) की तिकड़ी है तो दूसरी ओर पांच प्रमुख दलों के गठजोड़ से बना महागठबंधन. जाहिर है दोनों ही धड़ों की ओर से सियासी समीकरण बनाने-बिगाड़ने का खेल शुरू होने वाला है.

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पटना. दिल्ली विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल (Exit Poll of Delhi Assembly Election) बता रहे हैं कि आम आदमी पार्टी (AAP) दोबारा सरकार बनाने जा रही है. हालांकि, अभी नतीजों का इंतजार है. इसके साथ इंतजार इस बात का भी है कि दिल्ली की सियासी हवा अब बिहार की ओर मुड़ने वाली है. यहां का राजनीतिक तापमान बढ़ने वाला है.

एक तरफ बीजेपी-जेडीयू और एलजेपी की तिकड़ी है तो दूसरी ओर पांच प्रमुख दलों के गठजोड़ से बना महागठबंधन. जाहिर है कि दोनों ही धड़ों की ओर से सियासी समीकरण बनाने-बिगाड़ने का भी खेल शुरू होने वाला है.

एकजुट एनडीए की राह सुगम
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि बिहार की राजनीति में कोई अकेले दल बाजी मारने की स्थिति में दशकों से नहीं है, ऐसे में बिहार का चुनावी समीकरण गठबंधन की मजबूती पर निर्भर रहेगा. मतलब यह कि जो गठबंधन जमीन पर जितना मजबूत दिखेगा, उसके लिए परिणाम उतने ही सकारात्मक रहेंगे.

खुद को मजबूत करने में जुटी बीजेपी
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय बताते हैं कि इस चुनाव में बीजेपी-जेडीयू की एकजुटता अहम कड़ी साबित होने वाली है. करीब 72 हजार बूथों पर जेडीयू के बूथ अध्यक्षों की तैनाती भी कर दी गई है. वहीं, सांगठनिक तौर पर पहले से मजबूत बीजेपी अपने संगठन को धार देने की कवायद में जुट गई है.

पीके-पवन पर एक्शन ले जेडीयू ने दिया संकेतअशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि जेडीयू ने जहां प्रशांत किशोर और पवन वर्मा जैसे बीजेपी विरोधी नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाकर संकेत दे दिया है कि वह बिहार में एनडीए की मजबूती के लिए डटा हुआ है. वहीं, बीजेपी की ओर से अमित शाह ने सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में पूरा भरोसा जताते हुए यह बता दिया है कि कहीं कोई गतिरोध नहीं है. जाहिर है इस एका का असर चुनाव नतीजों पर जरूर असर डालेगा.

आरजेडी के सामने बड़ी चुनौती
रवि उपाध्याय कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद आरजेडी ने भी संगठनात्कम तौर पर खुद में काफी बदलाव किए हैं. संगठन में जहां जगदानंद सिंह को प्रदेश की कमान देकर सवर्णों से दूरी पाटने की कवायद शुरू की गई, वहीं जिलाध्यक्षों के पदों पर अतिपिछड़ों, दलितों और अन्य वर्गों की भागीदारी बढ़ाकर सर्वसमाज में पैठ बनाने की कोशिश की गई है. ऐसे में आरजेडी भी आने वाले समय में बड़ी चुनौती देने की तैयारी में है.

महागठबंधन में अब भी फंसा है पेंच
बकौल अशोक कुमार शर्मा, आरजेडी के सामने महागठबंधन में शामिल चार अन्य दलों को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती है. दरअसल, महागठबंधन की ओर से कोई संयुक्त बैठक नहीं हो पाई है. वहीं, जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी जैसे नेताओं की अधिक से अधिक सीटों की चाहत तेजस्वी के लिए मुश्किल स्थिति जरूर लेकर आएगी.

कांग्रेस-आरजेडी एक पिच पर खेलेगी
रवि उपाध्याय भी मानते हैं कि 150 से अधिक सीटों पर अपनी दावेदारी के साथ आरजेडी के लिए कांग्रेस को साधना एक टफ टास्क होगा. दरअसल, कांग्रेस भी फ्रंट फुट पर खेलने की बात कई बार कह चुकी है. हालांकि, इतना तय माना जा रहा है कि कांग्रेस और आरजेडी एक पिच पर ही है.

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First published: February 9, 2020, 10:53 AM IST
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