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दागी नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इधर बिहार में नेताओं के चेहरे पर दिखने लगा तनाव
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Updated: February 14, 2020, 8:39 PM IST
दागी नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इधर बिहार में नेताओं के चेहरे पर दिखने लगा तनाव
BJP में कुल 53 विधायक हैं जिनमें से 34 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. वहीं जेडीयू की बात की जाए तो 71 विधायकों में से 37, आरजेडी में 80 में से 46 और कांग्रेस के 27 में से 16 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)

बिहार की चारों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों पर नजर डाली जाए तो हर दल में आपराधिक मामले के लिप्ट विधायकों की संख्या आधे से भी अधिक है. अब सभी दल कोर्ट का फैसला आने के बाद से इससे बचने का रास्ता ढूंढ रहे हैं.

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  • Last Updated: February 14, 2020, 8:39 PM IST
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पटना. सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों में में बढ़ती दागियों की संख्या पर चिंता जताते हुए राजनीतिक पार्टियों को निर्देश दिया है कि अब वे अपने आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों का पूरा विवरण पार्टी की वेबसाइट सहित हर तरह के प्लेटफॉर्म पर जारी करें. अब इसका असर सबसे पहले बिहार में दिखने की उम्मीद है. कारण है इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं. उल्लेखनीय है कि बिहार में दागी नेताओं की पैठ हमेशा से राजनीती में अच्छी रही है.

किस दल में कितने दागी
BJP में कुल 53 विधायक हैं जिनमें से 34 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. वहीं जेडीयू की बात की जाए तो 71 विधायकों में से 37, आरजेडी में 80 में से 46 और कांग्रेस के 27 में से 16 विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

क्या कहते हैं राजनीतिक दल



बिहार की चारों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों पर नजर डाली जाए तो हर दल में आपराधिक मामले के लिप्ट विधायकों की संख्या आधे से भी अधिक है. अब सभी दल कोर्ट का फैसला आने के बाद से इससे बचने का रास्ता ढूंढ रहे हैं. बीजेपी नेता और बिहार सरकार में मंत्री राम नारायण मंडल कहते हैं कि बीजेपी इस आदेश का पालन करेगी लेकिन साथ ही वे ये भी कहते हैं कि इसमें आपराधिक मामले की गंभीरता को देखना होगा. यही बात राजद के शक्ति सिंह यादव भी दोहराते हैं, उनका कहना है कि यदि उम्मीदवार पर गंभीर आरोप न हो तो फिर क्या हर्ज है.



तो क्या मिलेगा पत्नियों को टिकट
अलग अलग दलों के नेताओं की ये बेचैनी देखकर ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि ये सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कोई न कोई रास्ता निकाल हीं लेंगे. वैसे भी राजनीति में इसका चलन पहले से है कि अगर किसी नेता पर गंभीर आरोप लगे हैं तो उस नेता की पत्नी को पार्टीयां उम्मीदवार बना देती हैं. बिहार में शहाबुद्दीन, अनंत सिंह, सुरजभान सिंह, मुन्ना शुक्ला जैसे दर्जनों ऐसे उदाहरण भी है जिन पर आरोप लगने या जेल जाने के बाद उनकी पत्नी को उम्मीदवार बनाया गया. इनमें से लगभग सभी ने जीत भी दर्ज की.

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First published: February 14, 2020, 8:39 PM IST
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