लाइव टीवी

दिल्ली से ज्यादा जहरीली है पटना और मुजफ्फरपुर की हवा, जानें क्या है वजह

News18 Bihar
Updated: November 21, 2019, 8:42 AM IST
दिल्ली से ज्यादा जहरीली है पटना और मुजफ्फरपुर की हवा, जानें क्या है वजह
दिल्ली-लखनऊ से भी जहरीली हुई पटना और मुजफ्फरपुर की हवा .( सांकेतिक तस्वीर)

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, AQI के मामले में पटना देशभर में चौथे और मुजफ्फरपुर 7वें स्‍थान पर है. बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (BPCB) के चेयरमैन अशोक घोष ने बताया कि बिहार में प्रदूषण का पहला कारण भोगौलिक और भूवैज्ञानिक है.

  • Share this:


पटना. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central pollution control board) ने बुधवार को जो आंकड़े जारी किए वह बिहार (Bihar) में बदतर होती प्रदूषण की स्थिति को दिखाता है. दिल्ली की तुलना में पटना और मुजफ्फरपुर की हवा अधिक खराब हो गई है. देश के 104 शहरों के एयर क्वालिटी इंडेक्स (Air quality index) में पटना देश में चौथे और मुजफ्फरपुर सातवें स्थान पर है. बिहार के दो शहर प्रदूषित शहरों की टॉप 10 सूची में शामिल हो गए हैं.

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जारी आंकड़ों में पटना का पीएम 2.5 स्तर 313 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और मुजफ्फपुर का पीएम 2.5 का स्तर 327 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जबकि दिल्ली में पीएम 2.5 स्तर 305 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है.
गया का प्रदूषण स्तर भी बढ़ा




राजधानी के अलावा गया की हवा में फिर से प्रदूषण की मात्रा बढ़ गई है. पूर्वोत्‍तर भारत की बात करें तो इनमें सबसे खराब हवा पटना और मुजफ्फरपुर की है. जाहिर है इन दोनों ही शहरों का एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार चेतावनी दे रहा है.
बिहार में प्रदूषण बताने वाले सिर्फ तीन मशीन 

Loading...



बता दें कि पूरे बिहार में बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने महज तीन शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स की मशीनें लगाई हैं. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है आंकड़े सिर्फ इन्‍हीं तीन शहरों से आ रहे हैं. बाकी शहरों में भी प्रदूषण की स्थिति अच्छी नहीं है, लेकिन उसकी मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही.
प्रदूषण के हैं तीन अहम कारण



बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन अशोक घोष ने बताया कि बिहार में प्रदूषण का पहला कारण भोगौलिक और भूवैज्ञानिक है. वहीं, दूसरा कारण मानवीय है. उन्होंने बताया कि बिहार के कई शहर गंगा तट के किनारे है, जिसकी वजह से मिट्टी कच्ची है जो पूरी तरह से बैठ नहीं पाती. ऐसे में ये धूल कण बनकर हवा में हमेशा मौजूद रहती है.
सबसे अधिक प्रदूषण गाड़ियों के धुएं से



गौरतलब है कि बिहार सरकार बढ़ते प्रदूषण को लेकर रिसर्च कर रही है, जिससे यह पता चल पाएगा कि प्रदूषण के कारक क्या हैं? यह रिपोर्ट भी इस महीने के अंत तक सार्वजनिक की जाएगी. हालांकि, पटना के प्रदूषण को लेकर रिसर्च पूरा कर लिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, यहां सबसे ज्यादा 32 प्रतिशत प्रदूषण वाहनों के धुएं से हो रही है.
प्रदूषण के लिए धूल-कण भी है बड़ी वजह

वहीं, 17 प्रतिशत प्रदूषण पटना के आस-पास के इलाकों से जबकि 12 प्रतिशत धूल से हो रही है. कच्ची सड़कों के किनारे पेवमेंट के कारण गाड़ियां चलने से भी काफी घूल उड़ती है, जबकि 10 प्रतिशत हीटिंग से भी प्रदूषण फैल रहा है. इसमें सड़क किनारे बने खाने-पीने की दुकानों या फिर एलपीजी गैस के इस्तेमाल से होती है. 7 प्रतिशत इंडस्ट्रिएल वेस्ट, 7 प्रतिशत वेस्टेज बर्न, 5 प्रतिशत जेनेरेटर के चलने से, 4 प्रतिशत ईंट भट्ठों से होता है. 



प्रदूषण को लेकर सरकार सजग

बिहार सरकार प्रदूषण को लेकर अब सजग दिख रही है. पहले ही 15 साल पुरानी गाड़ि‍यों को बैन कर दिया गया है. वहीं, बिहार प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अलावा कई और विभाग जैसे रोड कंसट्रक्शन, अर्बन डेवलपमेंट और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को प्रदूषण रोकने के लिये शोर्ट-टर्म, मिड टर्म और लॉग टर्म प्लान बना कर काम करने को कहा गया है. हालांकि सरकार का मानना है प्रदूषण रोकथाम के लिए लोगों की सजगता सबसे अहम है.


ये भी पढ़ें








News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए पटना से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 21, 2019, 7:45 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...