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बिहार में रहते हैं तो पहले से खरीद लें जरूरत की दवाएं, इन तीन दिन बंद रहेंगे सभी मेडिकल स्टोर्स

Sanjay Kumar | News18 Bihar
Updated: January 20, 2020, 11:42 PM IST
बिहार में रहते हैं तो पहले से खरीद लें जरूरत की दवाएं, इन तीन दिन बंद रहेंगे सभी मेडिकल स्टोर्स
(सांकेतिक तस्वीर)

बिहार के मरीजों (Patients) के लिए आने वाले अगले कुछ दिन संकट से भरे होंगे. 22 से लेकर 24 जनवरी तक बिहार के सभी दवा दुकानदार हड़ताल (Strike) पर रहेंगे. इस बात का ऐलान बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने कर दिया है.

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पटना. सोमवार की देर शाम बुलाई गई बैठक में बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (Bihar Chemist and Druggist Association) ने इस पर अंतिम रूप से मुहर लगा दी है. दरअसल बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सभी 52 हज़ार दवा दुकानदारों को इस शर्त पर दवा बेचने की अनुमति देने का फैसला किया कि उनकी दुकान में अनिवार्य रूप से एक फार्मासिस्ट (Pharmacist) हो. लेकिन दवा दुकानदारों ने सरकार की शर्त को इस आधार पर खारिज कर दिया है कि बिहार में अभी मात्र साढ़े सात हजार फार्मासिस्ट हैं, ऐसे में 52 हज़ार दुकानों के लिए फार्मासिस्ट की व्यवस्था कैसे हो पाएगी.

सरकारी अस्पताल और बड़े नर्सिंग होम में ही दवा आपूर्ति
बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष परसन कुमार ने बताया की 3 दिनों की हड़ताल में केवल सरकारी अस्पतालों और बड़े नर्सिंग होम में ही दवा की आपूर्ति की जाएगी. ऐसा बिहार ड्रग कंट्रोलर के विशेष अनुरोध पर किया गया है. एसोसिएशन के महासचिव अमरेंद्र कुमार ने बताया कि सरकार का फैसला तुगलकी फरमान है, जिसका पालन करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है. एसोसिएसन ने कहा है कि हज़ारों दवा दुकानें पुरानी हैं, जिनका लाइसेंस पहले ही जारी हो चुका है. ऐसे में सरकार जबकि नई दुकानों के लिए फार्मासिस्ट के माध्यम से दवा बिक्री अनिवार्य कर चुकी है, तो सभी दुकानों के लिए फार्मासिस्ट की बहाली की अनिवार्यता का फैसला सही नहीं है.

अनिश्चितकालीन हड़ताल की धमकी

बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार उनकी बात नहीं मानती है तो मार्च में बिहार की सभी दवा दुकानों को अनिश्चितकाल के लिये बन्द कर दिया जाएगा. एसोसिएशन ने कहा है कि अनिश्चितकाल हड़ताल के 15 दिन पहले से ही दवा की खरीद बन्द कर दी जाएगी.

20 साल पहले हुई थी लंबी हड़ताल
3 दिनों तक दवा दुकानों को बन्द रखने का यह फैसला बड़ा फैसला माना जा रहा है. इसके पहले साल 2000 में दवा दुकानदारों ने टीओटी के मुद्दे पर 7 दिनों तक दवा दुकानों में हड़ताल कर दी थी, जिसे लेकर काफी बवाल मचा था.ये भी पढ़ें -
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First published: January 20, 2020, 11:19 PM IST
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