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जानिए सियासी जोड़ियों के दम पर ही आखिर कैसे चलती है बिहार में हुकुमत

News18 Bihar
Updated: October 20, 2019, 1:12 PM IST
जानिए सियासी जोड़ियों के दम पर ही आखिर कैसे चलती है बिहार में हुकुमत
नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाई थी, लेकिन ये दोस्ती बाद में टूट गई. (फाइल फोटो)

लंबे समय से बिहार (Bihar) की राजनीति को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते है कि बिहार में जब भी कोई मज़बूत गठबंधन (Alliance) हुआ है जीत उसे ही मिली है और यही कारण कि बिहार में 15 सालों से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) राज कर रहे हैं

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पटना. एक कहावत है, एक से भले दो. ये कहवात बिहार की राजनीति में बिल्कुल सटीक बैठती है. दरअसल लंबे समय से बिहार में सियासी जोड़ियों के दम पर ना सिर्फ सरकार बनती रही है बल्कि इनके आगे विरोधियों ने घुटने भी टेके हैं. बिहार के सियासी हालात के जो आंकड़े हैं वो भी बताने के लिए काफी हैं कि पिछले 15 सालों से कैसे सियासी जोड़ियों के दम पर हुकूमत चल रही है. बिहार में गठबंधन क्यों है जरूरी  है इसे समझने की जरूरत है.

2020 को लेकर एनडीए में साफ है तस्वीर

अमित शाह के एक बयान ने बिहार के सियासी हलके में भूचाल ला दिया है इस वक़्त जब बिहार के सियासत में इस बात को लेकर चर्चा तेज़ थी की क्या नीतीश कुमार भाजपा से नाराज़ है. क्या 2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश भाजपा का दामन छोड़ महागठबंधन के साथ जा सकते हैं, क्या 2015 की तस्वीर एक बार फिर से बिहार में दिखाई पड़ेगी लेकिन इसी बीच अमित शाह ने नीतीश कुमार की अगुवाई में चुनाव लड़ने की बात कह तमाम अटकलों को एक साथ शांत कर दिया.

आख़िर क्यों बिहार में कोई भी पार्टी अकेले चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पाती है, हम इसका जवाब आंकड़ों से दिखाते हैं कि आख़िर बिहार में गठबंधन ही क्यों मजबूरी है.

साल 2005

इस साल बिहार में जेडीयू और बीजेपी ने मिलकर चुनाव लड़ा. परिणाम- बिहार में एन डी ए को शानदार जीत मिली

साल 2010
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इस साल बीजेपी और जेडीयू ने फिर से मिलकर चुनाव लड़ा फिर जीत एनडीए को जीत मिली.

साल 2014

साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जेडीयू-बीजेपी से अलग हुई. परिणाम जेडीयू को करारी हार का सामना करना पड़ा. बीजेपी लोजपा और आरएलएसपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. शानदार जीत मिली

साल 2015

नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हुए. विधानसभा के चुनाव में महागठबंधन के साथ हुए, परिणाम महागठबंधन को शानदार जीत मिली

साल 2019

इस साल के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर से नीतीश कुमार बीजेपी के साथ आए. एनडीए ने 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की.

सफलता की कुंजी हैं सियासी जोड़ियां

ये आंकड़ों बताने के लिए शायद काफी हैं कि अकेले कभी भी कोई पार्टी बिहार में सफल नही हो पाई और उन्हें किसी ना किसी सहयोगी की ज़रूरत जरूर पड़ ही जाती है. अब जब अमित शाह के बयान से साफ़ हो गया कि बीजेपी और जेडीयू मिलकर चुनाव लड़ेगी वहीं महागठबंधन की तस्वीर अभी तक साफ़ नहीं हो पाई है, यही वजह है कि राजद इस बात को बखूबी समझ तो रही है बावजूद इसके ये दावा कर रही है की हम पूरी मज़बूती से चुनाव लड़ेंगे.पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानन्द तिवारी हों या फिर खुद तेजस्वी दोनों अपनी पार्टी की जीत का ताल ठोक रहे हैं वही जेडीयू एन डी ए गठबंधन की मज़बूती के पिछले आंकड़े का हवाला देकर विरोधी पर हमला बोलते हुए अपनी जीत का दावा कर रहे है.



लंबे समय से बिहार की राजनीति को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते है कि बिहार में जब भी कोई मज़बूत गठबंधन हुआ है जीत उसे ही मिली है और यही कारण कि बिहार में 15 सालों से नीतीश कुमार राज कर रहे हैं क्योंकि नीतीश कुमार ने इस फार्मूले को बखूबी समझ भी लिया है और अपना भी लिया है. 2020 में बीजेपी -जेडीयू की यह जोड़ी कितना कामयाब होती है ये तो वक्त बताएगा लेकिन ये आंकड़े एनडीए को बेहद सुकून देने वाले हैं.

रिपोर्ट- अमित कुमार सिंह

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First published: October 20, 2019, 1:04 PM IST
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