Patna: डॉक्टरों के गांव अमहारा के लोग कोरोना काल में कर रहे डॉक्टर का इंतजार

अमहारा गांव के गांव में एकमात्र प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र का नजारा.

अमहारा गांव के गांव में एकमात्र प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र का नजारा.

इस गांव के कई बड़े-बड़े डॉक्टर पटना समेत देश विदेश में लोगों का इलाज कर रहे हैं. लेकिन अमहारा गांव में एकमात्र प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र है और वहां भी ताला लटका रहता है. किसी डॉक्टर की नियुक्ति यहां नहीं.

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पटना. बिहार (Bihar) की राजधानी पटना (Patna) से महज 40 किलोमीटर दूर एक गांव अमहारा है, जिसे डॉक्टरों का गांव कहा जाता है. इस गांव के कई बड़े-बड़े डॉक्टर पटना समेत देश विदेश में लोगों का इलाज कर रहे हैं. लेकिन आपको जान कर यह आश्चर्य होगा कि इस गांव में एकमात्र प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र है और वहां भी ताला लटका रहता है. इस स्वास्थ्य उपकेंद्र को तो लोगों ने अब तबेला बना दिया है.

बिहटा प्रखंड में है अमहारा

अमहारा गांव पटना से सटे बिहटा प्रखंड में है. यहां का प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र कोरोना महामारी में भी पिछले कई दिनों से बंद पड़ा है. यहां न तो डॉक्टर आते हैं और न किसी का इलाज होता है. इस उप स्वास्थ्य केंद्र में ताला लटका है और इसकी जमीन और पुराने भवनों पर लोगों ने कब्जा कर गाय-भैंस और भेड़-बकरियां बांध रखी हैं. अमराह पंचायत के सरपंच गोपाल तिवारी का कहना है कि उन्होंने कई बार उप स्वास्थ्य केंद्र से कब्जा हटाने की कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं हुए. गांव के अन्य लोगों का कहना है कि उन्हें इलाज के लिए बिहटा ही जाना होता है. न तो गांव में कोरोना जांच की व्यवस्था है और न ही लोगों को वैक्सीन पड़ रही है. आपको यह जान कर हैरानी होगी कि इस गांव के 100 से अधिक लोग अभी देश-विदेश के जाने-माने डॉक्टर हैं. पटना के कई बड़े डॉक्टर भी इसी गांव के हैं. गांव के लोग अपने गांव के डॉक्टरों का आंकड़ा 300 के पार बताते हैं. इसके अलावा इस गांव में डॉक्टरों के साथ कई अन्य बड़े अफसर भी हैं, जो देश के अलग-अलग राज्यों में बड़े ओहदे पर हैं.

डॉक्टरों का गांव
पटना से सटे अमहारा गांव किसी शहर से कम नही. यहां बड़े-बड़े आलीशान घर देख आप यह कह नहीं सकते हैं कि इस डॉक्टरों के गांव में डॉक्टर ही नहीं है और इस कोरोना संकट में ये लोग भगवान भरोसे हैं. गांव में कई लोगों की मौत भी हो गई. गांववालों का कहना है कि वे अपने गांव के बड़े डॉक्टर से पटना इलाज कराने जाते हैं तो उनका इलाज हो जाता है. लेकिन गांव में उन्हें देखने वाला कोई नहीं है. सरकार की तरफ से इस कोरोना महामारी में गांव वालों को मदद नहीं मिल रही है.

डॉक्टरों की पूरी खेप

इसी गांव के आतिश सिंह का कहना है कि इस गांव के कई बड़े-बड़े नामी गिरामी डॉक्टर हैं. उन्होंने बताया कि डॉ सत्यजीत सिंह, डॉ स्व. उत्पल कांत, डॉ शशि रंजन, डॉ रमाकांत, डॉ सतीश कुमार, डॉ रंजीत कुमार (जो इंग्लैंड में रहते हैं), डॉ सतीश कुमार (इंग्लैंड में रहते हैं), प्रो. सचिदानंद (जिनके घर में कई डॉक्टर हैं और ये लोग पूरे परिवार के साथ अमेरिका में जा बसे हैं) सब इसी गांव के हैं. लेकिन गांव में जब बारी इलाज कराने की आती है तो इन्हें कम्युनिटी हेल्थ वर्करों के पास जाना पड़ता है.

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