बिहार में 6500 न्यायमित्रों से हो रहा अन्याय, 28 माह से नहीं मिला मानदेय

राज्य के कुल 8392 ग्राम पंचायतों में से सभी पंचायतों को भले ही न्याय मित्र की सुविधा नहीं मिल सकी, पर जिन पंचायतों को न्याय मित्र मिल भी गया, वहां मानदेय के भुगतान नहीं होने से न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न हो रही है

News18 Bihar
Updated: May 4, 2018, 2:40 PM IST
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Updated: May 4, 2018, 2:40 PM IST
बिहार सरकार ने ग्राम पंचायत को सरपंच और उनके सहयोग के लिए हर पंचायत में एक एक न्याय मित्र की सुविधा दी है. परंतु न्याय मित्रों को तय समय पर मानदेय नहीं मिलने से आम लोगों को न्याय मिलना तो दूर खुद न्याय मित्र ही सात हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय प्राप्त करने की सरकार से गुहार लगा रहे है.

नीतीश सरकार न्याय मित्रों के साथ ही अन्याय कर रही है. प्रदेश के लगभग 6500 न्यायमित्रों को 28 माह से मानदेय नहीं मिला है. राज्य सरकार ने 2006 से न्याय मित्रों की नियुक्ति तो कर दी, परंतु इनको मानदेय देने के लिए कोई सटीक इंतजाम नहीं किया.



ग्राम पंचायतों की न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ रहा है असर
राज्य के कुल 8392 ग्राम पंचायतों में से सभी पंचायतों को भले ही न्याय मित्र की सुविधा नहीं मिल सकी, पर जिन पंचायतों को न्याय मित्र मिल भी गया, वहां मानदेय के भुगतान नहीं होने से न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न हो रही है. न्यायमित्रों की यह स्थिति कमोवेश पूरे राज्य में है. पंचायती राज विभाग का दावा जो भी हो, पर हकीकत यह है कि मानदेय का भुगतान नहीं होने का असर ग्राम पंचायतों की न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ रहा है. अररिया जिले के सगुना पंचायत के न्याय मित्र ने कहा की उन्हें तो 28 माह से मानदेय नहीं मिला है. जबकि उन्हें पंचायत की न्यायिक प्रक्रिया में प्रतिदीन भाग लेना पड़ता है.

मुंगेर, अररिया, पूर्णिया जिले के न्यायमित्रों का भी यही हाल
मानदेय नहीं मिलने की शिकायत मुंगेर और अररिया के न्याय मित्रों ने भी की। उन्होंने कहा कि इसका काम पर असर पड़ रहा है. मुंगेर जिले के ग्राम पंचायत की न्याय मित्र कामिनी कुमारी ने कहा, समय पर मानदेय नहीं ही मिल रहा है. कोर्ट से होने वाली आय से काम चलाना पड़ रहा है. इसकी पुष्टि पंचायत के सरपंच पति ने भी की. यही शिकायत पूर्णिया जिले के न्याय मित्र का भी है, उन्होंने कहा की मानदेय नहीं मिलने से मनोबल पर बुरा असर पड़ता है. इसके लिए जिला पंचायती राज पदाधिकारी को जिम्मेबार बताए हुए न्याय मित्र ने कहा एक तो मानदेय कम है, दूसरे उसका भी समय पर भुगतान न हो तो कैसे काम चलेगा.

समय पर भुगतान के लिए सेल का गठन
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वही न्याय मित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी ने कहा कि जिला स्तर पर ये समस्याएं हैं. इससे न्याय मित्रों को भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि न्याय मित्रों को समय पर मानदेय के भुगतान से ही आम लोगों को समय पर न्याय की उम्मीद की जा सकती है. उन्होंने सरकार से सभी बकाए के भुगतान के साथ ही न्याय मित्रों के बैंक खाते में मानदेय के भुगतान की मांग की. इससे भुगतान में समय लगने की समस्या दूर हो जाएगी. न्याय मित्रों के मानदेय के बकाये को स्वीकार करते हुए विभागीय सचिव अरविन्द कुमार चौधरी ने कहा कि भुगतान में देरी की समस्या अब दूर कर ली गई है. समय पर भुगतान के लिए सेल का गठन कर लिया गया है. जल्द ही न्याय मित्रों को मानदेय के भुगतान की समस्या स्थायी रूप से समाप्त हो जाएगी.

सभी पंचायतों में न्याय मित्र की नियुक्ति की प्रक्रिया भी पूरी नहीं 
एक तो सभी पंचायतों में न्याय मित्र की नियुक्ति की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की जा सकी है, जहां नियुक्ति भी हुई वहां उन्हें मानदेय नहीं मिल रहा है. ऐसे में गांव के स्तर पर आम लोगों को न्याय नहीं मिलने में समस्या आएगी. साथ ही उपरी अदालतों पर मुकदमों का बोझ बढ़ेगा. इससे बचने के लिए जरूरी है कि निचले स्तर पर न्याय मित्र की कल्पना को जमीन पर उतरा जाए जिससे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ग्राम पंचायत की परिकल्पना को पूरा किया जा सके.
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