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Analysis: पटना साहिब में शत्रुघ्न सिन्हा का ‘अपनों’ की तरफ से ही विरोध क्यों हो रहा है?

Amitesh | News18 Bihar
Updated: April 22, 2019, 5:28 PM IST
Analysis: पटना साहिब में शत्रुघ्न सिन्हा का ‘अपनों’ की तरफ से ही विरोध क्यों हो रहा है?
शत्रुघ्न सिन्हा (File Photo)

रही-सही कसर शत्रुघ्न सिन्हा के बड़बोले बयान से पूरी हो गई, जिसमें उन्होंने मायावती और अखिलश दोनों को ‘पीएम मैटेरियल’ बता दिया.

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बीजेपी के शत्रु बन चुके ‘बिहारी बाबू’ रविवार को जब पटना के पार्टी दफ्तर पहुंचे तो उनके विरोध में खूब नारे लगे. शत्रुघ्न सिन्हा सदाकत आश्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी के शिकार हो गए. अपनी ही पार्टी के दफ्तर में उन्हें खोटा सिक्का तक बता दिया गया. आरोप लगाते हुए कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि वो पूरे पांच साल क्षेत्र से गायब रहे हैं.

बैनर पोस्टर लेकर सदाकत आश्रम पहुंचे कार्यकर्ताओं ने शत्रुघ्न सिन्हा के विरोध में नारेबाजी की. विरोध करने वाले लोगों ने अपने-आप को कांग्रेस के अतिपिछड़ा सेल का नेता बताया और शत्रुघ्न सिन्हा को पहचानने तक से इनकार कर दिया.

अब सवाल उठता है कि आखिरकार शत्रुघ्न सिन्हा का अपनी पार्टी दफ्तर में ही कार्यकर्ताओं की तरफ से विरोध क्यों हो रहा है ? दरअसल, शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी छोड़कर हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं. कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे शत्रुघ्न सिन्हा को पार्टी के पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ता स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. बीजेपी के रविशंकर प्रसाद के मुकाबले महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस के टिकट पर शत्रुघ्न सिन्हा चुनाव मैदान में हैं.

लेकिन, पटना से कांग्रेस के उम्मीदवार होने के बावजूद उनकी पत्नी पूनम सिन्हा का समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ से चुनाव मैदान में उतरना भी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरा है, क्योंकि यूपी में सपा-बसपा-आरएलडी के महागठबंधन में कांग्रेस को जगह नहीं दी गई है. कांग्रेस की तरफ से लखनऊ में आचार्य प्रमोद कृष्णम चुनाव लड़ रहे हैं.

ऐसे में कांग्रेसी शत्रुघ्न सिन्हा की तरफ से कांग्रेस के बजाए सपा उम्मीदवार अपनी पत्नी पूनम सिन्हा के समर्थन में रोड शो करना कांग्रेसी नेताओं को नागवार गुजरा है. रही-सही कसर उनके बड़बोले बयान से पूरी हो गई, जिसमें उन्होंने मायावती और अखिलश दोनों को ‘पीएम मैटेरियल’ बता दिया. कांग्रेस की तरफ से अध्यक्ष राहुल गांधी ही चुनाव में पार्टी का मोर्चा थामे हुए हैं. राहुल के चेहरे को ही आगे कर कांग्रेस चुनाव मैदान में उतरी है. भले ही पीएम पद को लेकर कांग्रेस ने उनके नाम का ऐलान नहीं किया हो, लेकिन, कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो राहुल ही पीएम पद के प्रबल दावेदार होंगे.

एकतरफ कांग्रेस का राहुल को आगे करना और दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी के लोकसभा उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा की तरफ से मायावती और अखिलेश को पीएम मैटेरियल बताना ही उनकी परेशानी को बढ़ा रहा है. इसे अपरिपक्व राजनीति का प्रतीक कहें या फिर बड़बोलापन, दूसरों को खामोश करने वाले ‘शॉटगन’ इस मामले में खुद खामोश रहने को मजबूर हो गए हैं. लेकिन, कांग्रेस के साथ-साथ सपा-बसपा को लेकर भी दिखाया गया उनका प्रेम यूं ही नहीं हो सकता है. लगता है ‘बिहारी बाबू’ बिहार के अलावा यूपी समेत दूसरी जगहों से भी अपने लिए संभावनाओं को तलाशने में लगे हैं.

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First published: April 22, 2019, 5:26 PM IST
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